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हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश: मीडिया न्यूज पर कंट्रोल के लिए लगी याचिका; स्थिति को बताया अंडर कंट्रोल, 4 की मौत मानी

शहर में दूषित पानी से फैले डायरिया ने गंभीर रूप ले लिया है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 201 मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 32 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है। इन हालातों के बीच राज्य शासन ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और नए मरीजों की संख्या में कमी आई है।

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 जनवरी 2026, 11:26 पूर्वाह्न
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हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में दूषित पानी से फैले डायरिया ने गंभीर रूप ले लिया है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 201 मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 32 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है।

इन हालातों के बीच राज्य शासन ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और नए मरीजों की संख्या में कमी आई है।

हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में शासन ने कहा है कि
डायरिया के नए मामलों में लगातार गिरावट आई है। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं। हालात अब अंडर कंट्रोल हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की गई है।

शासन ने 4 मौतें ही मानी
हालांकि शासन की स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतों को ही डायरिया से हुई मौत माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार उर्मिला, तारा, नंदलाल और हीरालाल की मृत्यु को ही आधिकारिक तौर पर डायरिया से जोड़ा गया है। बाकी मौतों को लेकर स्थिति को अभी अस्पष्ट बताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुल 294 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे। इनमें से 93 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। 201 मरीज अभी इलाजरत हैं, जिनमें 32 आईसीयू में हैं।

मीडिया कंट्रोल की मांग
परदेशीपुरा निवासी भगवान भराणे ने इस मामले में इंटरविनर बनकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल पेश हुए।

याचिका में मांग की गई है कि
इस मामले को लेकर फेक न्यूज पर रोक लगाई जाए। सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म पर 2000 मरीज भर्ती और रोज 10–15 मौतों की खबरें चलाई जा रही हैं, जो भ्रामक हैं। केवल अथेंटिक और सत्यापित जानकारी के प्रसारण के निर्देश दिए जाएं।

भराणे ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता भी इस घटना से प्रभावित होकर अस्पताल में भर्ती हैं। फर्जी खबरों के चलते परिवार और क्षेत्रवासियों में भय और मानसिक तनाव का माहौल बन रहा है।

शासन की सफाई
स्टेटस रिपोर्ट में शासन ने अपनी कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि 29 दिसंबर से ही टीमें सक्रिय कर दी गई थीं। 30 दिसंबर को आदेश जारी कर अस्पतालों में मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया गया।

प्रभावित क्षेत्रों में 30 से ज्यादा टीमें, जिनमें 100 से अधिक कर्मचारी शामिल थे, तैनात की गईं। रोजाना टैंकरों से स्वच्छ पानी की सप्लाई की जा रही है।

निगमायुक्त, अपर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी लगातार मैदानी दौरे और मॉनिटरिंग कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाइपलाइन लीकेज का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट से जुड़ा ड्रेनेज पाया गया, जिसे सुधार लिया गया है।

भागीरथपुरा पानी कांड में दो जनहित याचिकाएं
इस मामले में हाईकोर्ट में कुल दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। अधिवक्ता अभिनव धनोतकर और हाईकोर्ट बार अध्यक्ष रितेश ईनाणी द्वारा अधिवक्ता मनीष यादव और करण बैरागी के माध्यम से, याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी है।

इन याचिकाओं में

दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने

पीड़ितों का निःशुल्क इलाज

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश देने की मांग की गई है।

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