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पूरा भुगतान किए बिना ही दूसरी कंपनी को बेच दी जमीन, किसानों से किया धोखा: 45 करोड़ के जमीन सौदे में बड़ा खुलासा

पुणे की रियल एस्टेट कंपनियों पर किसानों के साथ धोखाधड़ी का आरोप खुलासा फर्स्ट, इंदौर। पुणे की विशाल छुगेरा रियलिटी इंडिया प्रालि व वक्रतुंड बिल्डर द्वारा हातोद के सतलाना में किसानों से की गई 27 बीघा ज

Khulasa First

संवाददाता

04 दिसंबर 2025, 2:27 अपराह्न
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पूरा भुगतान किए बिना ही दूसरी कंपनी को बेच दी जमीन, किसानों से किया धोखा

पुणे की रियल एस्टेट कंपनियों पर किसानों के साथ धोखाधड़ी का आरोप

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।

पुणे की विशाल छुगेरा रियलिटी इंडिया प्रालि व वक्रतुंड बिल्डर द्वारा हातोद के सतलाना में किसानों से की गई 27 बीघा जमीन के 45 करोड़ के सौदे में धोखाधड़ी का नया खुलासा हुआ है। जानकारी मिली है कि पूरा भुगतान किए बिना ही विशाल छुगेरा और शिवम दास महंत ने वही जमीन एक रियल एस्टेट बिल्डर को दोबारा बेच दी थी।

रियल एस्टेट कंपनी ने जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के लिए टीएनसी और अन्य डेवलपमेंट अनुमतियों के लिए आवेदन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं, पुणे के बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनी के बीच हुए अनुबंध के आधार पर कच्ची जमीन के रूप में डायरी पर इन्वेस्टर्स को प्लॉट तक बेच दिए गए, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत प्लॉट बिक चुके थे।

जब इसकी खबर किसान परिवार तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत टीएनसी और अन्य विभागों में आपत्ति दर्ज कराई। आपत्तियों की जांच में यह खुलासा हुआ कि किसानों को सिर्फ 12-13 करोड़ रुपये ही दिए गए थे, जबकि 32-33 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित था। किसानों से धोखाधड़ी सामने आते ही ओमेक्स रियल एस्टेट ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए डायरी पर किए गए सभी सौदों को रद्द कर इन्वेस्टर्स को रकम वापस कर दी।

दलाली के लालच में फिर अधर में सौदा
किसानों का शेष भुगतान चुकाने के नाम पर विशाल छुगेरा और शिवम दास महंत ने उनसे वादा किया कि बकाया रकम के बराबर मूल्य की अन्य जगह जमीन दिलाई जाएगी। जमीन देखकर किसान भी तैयार हो गए थे और सभी शर्तें लगभग तय हो चुकी थीं, लेकिन जैसे ही शिवम को मनमाफिक दलाली नहीं मिली उसने सौदा रुकवा दिया। नतीजतन किसानों को एक बार फिर धोखे का सामना करना पड़ा।

किसानों के फोन न उठाकर बचते रहे बिल्डर: किसानों ने जब भी अपने शेष भुगतान को लेकर विशाल और शिवम से संपर्क करना चाहा, दोनों एक-दूसरे का हवाला देते हुए तारीख पर तारीख देते रहे, लेकिन तय दिन पर पैसे नहीं दिए गए। आखिरकार स्थिति यह हो गई कि दोनों ने किसानों के फोन उठाना ही बंद कर दिया, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई।

प्रशासन की कड़ी नीति के बावजूद खुली लूट: इंदौर जिला प्रशासन कई बार डायरी पर प्लॉट बेचने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करता है, लेकिन वास्तविकता इससे उलट सामने आई है। हातोद तहसील में किसानों के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी हो गई और इसकी भनक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को नहीं लगी।

इसी तरह के कई मामलों में डायरी पर प्लॉट बेचकर करोड़ों रुपए की ठगी की जा चुकी है। हजारों पीड़ित आज भी प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय कब मिलेगा किसी को पता नहीं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई ठग बिल्डर अन्य राज्यों के रहने वाले हैं। धोखाधड़ी करने के बाद वे दोबारा इंदौर लौटकर नहीं आए और प्रशासन ने भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखाई।

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