50 करोड़ की ड्रग्स बनाने से पहले ही गिरफ्तार हुए तस्कर: ड्रग्स माफिया का गढ़ बनता जा रहा आगर मालवा जिला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, आगर मालवा।
मध्यप्रदेश का आगर मालवा जिला अब किसी आशंका या आरोप तक सीमित नहीं रहा। लगातार सामने आ रहे खुलासों के बाद यह कड़वी सच्चाई बन चुकी है कि यह जिला धीरे-धीरे ड्रग्स माफिया के लिए एक सुरक्षित, योजनाबद्ध और निर्भीक ऑपरेशन ज़ोन में तब्दील हो गया है। बीते कुछ महीनों में एक के बाद एक सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि यहां न सिर्फ ड्रग्स नेटवर्क मौजूद है, बल्कि उसने गहरी जड़ें जमा ली हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतने बड़े और संगठित ड्रग्स कारोबार का खुलासा हर बार बाहरी एजेंसियां कर रही हैं, जबकि स्थानीय पुलिस की भूमिका बार-बार संदेह के घेरे में खड़ी नजर आती है। एक बार फिर राजस्थान पुलिस की कार्रवाई ने आगर मालवा से जुड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा किया हैं।
राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 320 किलो 720 ग्राम संदिग्ध केमिकल (2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपीओफिनोन) जब्त किया गया है। जांच में सामने आया है कि इसी केमिकल से करीब 50 करोड़ रुपये की एमडी और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जानी थी।
जानकारी के मुताबिक यह खतरनाक केमिकल महाराष्ट्र से कोटा होते हुए आगर मालवा लाया जा रहा था। यहीं से ड्रग्स निर्माण और सप्लाई की पूरी श्रृंखला सक्रिय थी। सवाल यह नहीं है कि यह खेप पकड़ी कैसे गई, बल्कि असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित केमिकल आगर मालवा तक पहुंच कैसे गई और स्थानीय स्तर पर इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।
मंगलवार रात हुई इस कार्रवाई में राजस्थान पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को डिटेन किया। वहीं सुसनेर क्षेत्र से केमिकल की डिलीवरी लेने पहुंचे आगर मालवा निवासी जय नारायण उर्फ मम्मू और उसका साथी रामलाल भी गिरफ्तार किए गए। इस तरह कुल पांच आरोपियों को राजस्थान पुलिस ने पकड़ा। यह तथ्य बेहद गंभीर है कि आरोपी आगर मालवा के हैं, नेटवर्क की धुरी आगर मालवा है, लेकिन कार्रवाई हर बार बाहरी एजेंसियां कर रही हैं।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आगर मालवा और आसपास के इलाकों में ड्रग्स निर्माण का नेटवर्क सुनियोजित तरीके से फैलाया जा रहा था। आरोपियों की निशानदेही पर राजगढ़ जिले के माचलपुर थाना क्षेत्र में संचालित एक ड्रग्स फैक्ट्री का भी खुलासा हुआ, जहां से ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और केमिकल बरामद किए गए। पूरे मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच जारी है।
यह मामला किसी एक दिन या किसी एक गिरोह तक सीमित नहीं है। खुलासा फर्स्ट पहले भी लगातार चेतावनी देता रहा है कि आगर मालवा में ड्रग्स नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। इस पूरी श्रृंखला की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी, जब एक राजनीतिक दल से जुड़े राहुल आंजना के खिलाफ ड्रग्स से जुड़े मामले में कार्रवाई सामने आई। उस समय इसे एक बड़ा खुलासा माना गया, लेकिन आज यह स्पष्ट हो चुका है कि वह सिर्फ नेटवर्क की पहली परत थी।
इसके बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, तस्वीर और भी भयावह होती चली गई। सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो को भी आगर मालवा में चल रही ड्रग्स फैक्ट्री की जानकारी मिलने पर यहां आकर कार्रवाई करनी पड़ी। यह अपने आप में संकेत था कि मामला स्थानीय पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो चुका है।
हाल ही में आगर मालवा पुलिस खुद 80 पुलिसकर्मियों की टीम के साथ राजस्थान के झालावाड़ जिले के ग्राम घाटाखेड़ी गई और वहां से एमडी ड्रग्स का बड़ा जखीरा तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लाई। लेकिन सवाल यहीं और गहरा हो जाता है—जब कार्रवाई के लिए आगर मालवा पुलिस को दूसरे राज्य जाना पड़ रहा है, तो जिले के भीतर बैठे ड्रग्स माफिया आखिर क्यों नहीं दिखाई दिए। खुलासा फर्स्ट की पड़ताल में ग्राम आमला की एक नर्सरी में ड्रग्स निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का भी खुलासा हुआ था। नर्सरी, जहां हरियाली होनी चाहिए थी, वहां पौधों की आड़ में ज़हर तैयार किया जा रहा था। यह कोई अस्थायी ठिकाना नहीं, बल्कि सोच-समझकर चुना गया सुरक्षित अड्डा था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या स्थानीय पुलिस को इन गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी?
क्या ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है?
या फिर ड्रग्स माफिया को यह भरोसा था कि यहां कोई पूछने वाला नहीं?
लगातार सामने आ रहे ठिकाने, नर्सरी से लेकर फैक्ट्री तक ड्रग्स निर्माण की पुष्टि, अंतरराज्यीय केमिकल सप्लाई और करोड़ों की एमडी ड्रग्स का प्लान—यह सब किसी एक चूक का परिणाम नहीं हो सकता। यह लंबे समय से पनपता आया संगठित अपराध है, जो स्थानीय स्तर पर मिली ढील के बिना संभव नहीं है।
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