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शहर में ‘साइलेंट सिंडिकेट’ ग्राहकों की जेब पर सीधा वार: कमीशन पर शराब देना किया बंद, आए दिन हो रहे विवाद

ओवररेट पर कार्रवाई हुई तो मुनाफा कमाने एक जाजम पर आए शराब ठेकेदार खुलासा फर्स्ट, इंदौर । कान इधर से पकड़ो या उधर से बात एक ही है...। आज कल इंदौर के शराब ठेकेदार इसी कहावत पर अमल कर रहे हैं। पहले बीयर...

Khulasa First

संवाददाता

21 दिसंबर 2025, 10:09 पूर्वाह्न
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शहर में ‘साइलेंट सिंडिकेट’ ग्राहकों की जेब पर सीधा वार

ओवररेट पर कार्रवाई हुई तो मुनाफा कमाने एक जाजम पर आए शराब ठेकेदार

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
कान इधर से पकड़ो या उधर से बात एक ही है...। आज कल इंदौर के शराब ठेकेदार इसी कहावत पर अमल कर रहे हैं। पहले बीयर और देशी शराब ओवररेट में बेची जा रही थी, बदले में अंग्रेजी शराब की बोतलों पर ‘कमीशन’ देकर खेल संतुलित कर लिया जाता था, लेकिन जैसे ही ओवररेट की शिकायतों पर आबकारी विभाग ने सख्ती शुरू की, ठेकेदारों ने नया और ज्यादा चालाक रास्ता चुन लिया।

अब शहर में शराब की दुकानों पर न ओवररेट, न अंडररेट बल्कि ‘सिंडिकेट रेट’ लागू है। ठेकेदारों ने आपस में मौखिक सहमति बनाकर तय कर लिया कि शराब न तो एमएसपी से नीचे बिकेगी और न ही एमआरपी से ऊपर। बाहर से देखने में सब कुछ नियमों के मुताबिक, लेकिन असल खेल ग्राहकों के खिलाफ सेट किया गया है।

इंदौर जिले में कुल 173 देसी और विदेशी शराब की दुकानें हैं, जिनसे प्रदेश सरकार को पिछले वर्ष 1509 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। आबकारी नीति 2025-26 के तहत प्रदेश के 19 धार्मिक महत्व वाले स्थानों (जैसे उज्जैन, ओंकारेश्वर, आदि) में 1 अप्रैल 2025 से शराब दुकानें बंद कर दी गई हैं।

हालांकि इंदौर इन 19 स्थानों की सूची में शामिल नहीं है। इससे सरकार को 400 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है, जिसकी भरपाई इंदौर जैसे बड़े जिलों से की गई। यानि इस वित्त वर्ष में ठेके पिछली बार से 20 प्रतिशत ज्यादा राशि पर दिए गए। ठेकेदारों ने बढ़ी हुई राशि देकर ठेके तो रिन्यू करवा लिए, लेकिन वसूली का रास्ता ग्राहकों की जेब से निकाला।

अप्रैल माह से ही शराब के दाम न केवल बढ़ा दिए बल्कि ओवर रेट भी लेना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं देशी शराब की बोतल और हॉफ बंद कर इसे सिर्फ क्वार्टर तक सीमित कर दिया, ताकि ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। 80 रुपए का क्वार्टर (सफेद देशी, सबसे ज्यादा सेल इसी की होती है।) 90 रुपए में बेचा जाने लगा।

शहरी सीमा पर स्थित शराब दुकानों से लगे गांव, देहात में अपने एजेंटों के जरिए डायरी पर शराब बिकवाना शुरू कर दी। लगातार शिकायतें मिलने पर आबकारी विभाग ने भी मोर्चा संभाला और आबकारी कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी के नेतृत्व में सभी वृत्त प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में शराब ठेकेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी।

सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी के निर्देश पर लाखों रुपए पेनल्टी भी लगाई। गत महीने में पांच शराब दुकानों के ठेकेदारों पर करीब 12 लाख की पेनल्टी इसका उदाहरण है। चूंकि सर्दियां चल रही है और साल का अंत है। ऐसे में शराब की बिक्री अपने चरम पर होती है। साथ ही इस वित्त वर्ष को पूरा होने में साढ़े तीन माह ही शेष बचे हैं।

ऐसे में ठेकेदारों ने प्रतिस्पर्धा कर घाटा खाने से अच्छा मुनाफा कुटने के लिए एक जाजम पर आना ही उचित समझा। नतीजा ये रहा कि आपस में ही फोन पर चर्चा कर शहरभर में सिंडिकेट लगा दिया। में शराब दुकानों से शराब एमएसपी से नीचे और एमआरपी से ऊपर शराब नहीं बेचना तय किया है।

इसमें ये भी तय किया गया है कि जो ठेकेदार ऐसा नहीं करेगा उस पर आबकारी विभाग से कार्रवाई कराई जाएगी। हालांकि सिंडिकेट लगने से इससे अंग्रेजी शराब की बोतल लेने वालों को तो नुकसान हो रहा है लेकिन क्वार्टर लेने वालों को कोई विशेष फर्क नहीं पड़ रहा है।

हां, एक पखवाड़ा हो गया इस बात को
हां... इस बात को करीब एक पखवाड़ा हो गया है। ठेकेदार ऐसा कर रहे हैं तो गलत नहीं है। सहायक आबकारी आयुक्त के निर्देश पर इस सत्र में ओवर रेट पर लगातार कार्रवाई कर ठेकेदारों पर लाखों रुपए पेनल्टी लगाई है। यदि ठेकेदार एमएसपी से नीचे और एमआरपी से ऊपर शराब बेचेंगे तो आबकारी विभाग को एक बार फिर मोर्चा संभालना पड़ेगा। - देवेश चतुर्वेदी (कंट्रोलर आबकारी विभाग, इंदौर)

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