स्लीपर बस घोटाले पर तीखी प्रतिक्रिया: परिवहन विभाग की लापरवाही से उजड़ रहेे परिवार; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश में अवैध स्लीपर बसों के संचालन को लेकर सामने आ रही घटनाओं पर अब जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।
इस मामले में सड़क परिवहन कर्मचारी-अधिकारी उत्थान समिति मध्य प्रदेश अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उच्च स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनदेखी का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन सेवा में यात्रा करने वाले असंख्य यात्री आज भी असुरक्षित हालात में सफर करने को मजबूर हैं।
कई परिवारों ने अपने परिजन को दुर्घटनाओं में हमेशा के लिए खो दिए तो कई लोग गंभीर रूप से शारीरिक विकलांग होकर जीवन गुजारने को विवश हैं।
दुर्घटना का कारण चाहे जो भी रहा हो, लेकिन इससे परिवहन व्यवस्था की विफलता और दोष स्पष्ट रूप से उजागर होता है।
नियमों की हो रही अनदेखी
उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के अधिकारियों पर संवैधानिक रूप से यह जिम्मेदारी है कि वे नीति, नियम, आदेश और निर्देशों का सख्ती से पालन कराएं। इसके बदले उन्हें शासन से नियमित वेतन मिलता है, बावजूद इसके नियमों की खुलेआम अनदेखी, गलत को रोकने में उदासीनता और नियम तोड़ने वालों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलना पूरे सिस्टम पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं
श्याम सुंदर शर्मा ने मांग की कि जो हो चुका है उस पर आत्ममंथन हो, दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। इस मुद्दे पर साफ तौर पर कहा गया है कि अवैध स्लीपर बसों का संचालन केवल एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के परिवहन तंत्र से जुड़ा गंभीर घोटाला है।
कानून, न्यायालय के आदेश और मानव जीवन तीनों की अनदेखी करते हुए वर्षों से यह अवैध व्यवस्था फल-फूल रही है, जिसके चलते सैकड़ों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
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