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लोकायुक्त के रडार पर चौहत्तर शिक्षक: इंदौर के शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 जनवरी 2026, 12:10 अपराह्न
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लोकायुक्त के रडार पर चौहत्तर शिक्षक

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के शिक्षा विभाग में जड़ें जमा चुके एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जहां 74 शिक्षकों द्वारा फर्जी डिग्रियों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोकायुक्त ने इस गंभीर अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग से इन तमाम संदिग्ध शिक्षकों का कच्चा-चिट्ठा तलब किया है।

विभाग में मचे हड़कंप के बीच अब इन शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति से लेकर उनकी सेवा पुस्तिका, डीएड-बीएड की अंकसूचियों और संविलियन आदेशों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि वर्ष 2006-07 की संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से बड़े पैमाने पर कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर अपात्रों को सरकारी कुर्सियों पर बैठाया गया।

हैरत की बात यह है कि इस पूरे घोटाले की परतें साल 2021 में ही खुलनी शुरू हो गई थीं, जब 77 शिक्षकों के विरुद्ध शुरुआती शिकायत दर्ज हुई थी। तत्कालीन जांच में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्पष्ट कर दिया था कि अधिकांश शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत की गई अंकसूचियां उनके रिकॉर्ड से मेल नहीं खातीं।

जांच समिति की रिपोर्ट में तो यहां तक खुलासा हुआ कि कई शिक्षकों ने एक ही रोल नंबर पर दूसरे अभ्यर्थियों की मार्कशीट को कांट-छांट कर अपना बना लिया था। बावजूद इसके, विभाग के भीतर बैठे रसूखदारों और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं क्योंकि सितंबर 2024 में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए जाने के बावजूद संकुल प्राचार्यों ने अब तक पुलिस की चौखट पर कदम नहीं रखा है।

सांवेर विखं अंतर्गत उत्कृष्ट उमावि, कउमावि सहित चन्द्रावतीगंज, डकाच्या और मांगल्या जैसे संकुलों में तैनात ये शिक्षक विभागीय सुस्ती का फायदा उठाकर सालों से सरकारी खजाने को चपत लगा रहे हैं। लोकायुक्त की इस सक्रियता ने अब उन अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है जिन्होंने जांच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालकर रखा था।

वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी ने मामले की गंभीरता को स्वीकारते हुए अब त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में ये ‹फर्जी› गुरुजी इतने सालों तक तंत्र को ठेंगा दिखाते रहे।

आधिकारिक पक्ष:
74 शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला बेहद गंभीर है और हमारे संज्ञान में है। दस्तावेजों के सत्यापन और पूर्व की जांच रिपोर्टों का बारीकी से पुनरावलोकन किया जा रहा है।

इस मामले में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - शांता स्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी, इंदौर

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