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एमपीपीएससी मुख्यालय के बाहर डटे सत्याग्रही: भर्ती प्रक्रिया में विसंगति के विरुद्ध युवाओं का ठंडी रात में महा-आंदोलन

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 जनवरी 2026, 9:19 पूर्वाह्न
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एमपीपीएससी मुख्यालय के बाहर डटे सत्याग्रही

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश के लाखों शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ और भर्ती प्रक्रियाओं में व्याप्त विसंगति के विरुद्ध नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के नेतृत्व में भर्ती सत्याग्रह फिर अंगड़ाई ले चुका है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी मांगें पूरी न होने से आक्रोशित छात्र शनिवार से ही मप्र लोकसेवा आयोग के समक्ष डेरा डाले हुए हैं। कड़ाके की ठंड और प्रशासन की सख्ती के बावजूद युवा जायज मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं।

दिसंबर 2024 में हुए विशाल आंदोलन के बाद शासन ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए आमंत्रित किया था, परंतु धरातल पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण युवाओं को पुनः सड़क पर उतरने के लिए विवश होना पड़ा। यद्यपि प्रशासन ने पदयात्रा की अनुमति देने में आनाकानी की, किंतु उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी की पैरवी से मिली अनुमति ने आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की है। शनिवार दोपहर शुरू हुआ धरना पूरी रात जारी रहा। अभ्यर्थी खुले आसमान के नीचे अपने अधिकारों की हुंकार भरते रहे।

सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य रंजीत किसानवंशी, राधे जाट, हेमराज गुर्जर और धर्मवीर विश्नोई ने स्पष्ट किया यह केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है राज्य सेवा परीक्षा 2024 में पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 700 की जाए और राज्य वन सेवा 2026 में भी पदों की वृद्धि हो, विशेषकर सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रिक्त पदों को भरा जाए।

इसके अतिरिक्त, राज्य अभियांत्रिकी सेवा में न्यूनतम 400 पद और सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी भर्ती में 300 पदों के विज्ञापन की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और आधुनिक सुधारों पर बल देते हुए मांग की साक्षात्कार के अंकों को सीमित कर 100 किया जाए और परीक्षा चक्र को संघ लोकसेवा आयोग की तर्ज पर एक वर्ष के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए।

सहायक प्राध्यापक भर्ती में अंतिम वर्ष के छात्रों को सम्मिलित करने और अतिथि विद्वान आरक्षण के स्थान पर पूर्ववत बोनस अंक पद्धति लागू करने की मांग भी पुरजोर तरीके से रखी गई है।

अभ्यर्थी निराशा के गर्त में
युवाओं का कहना है प्रश्न-पत्रों में त्रुटियों की भरमार और परीक्षा तिथियों में बार-बार होने वाले परिवर्तन ने उनकी मानसिक स्थिति और आर्थिक संसाधनों को भारी क्षति पहुंचाई है।इस भर्ती सत्याग्रह ने अब प्रदेशव्यापी रूप ले लिया है।

युवाओं ने चेतावनी दी है जब तक पदों में वृद्धि और भर्ती कैलेंडर की शुचिता को लेकर ठोस आदेश जारी नहीं होते, उनका लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा। प्रशासन और आयोग की चुप्पी के बीच अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर है।

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