संघ मप्र में चलाएगा नशे के खिलाफ अभियान
KHULASA FIRST
संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में पिछले बीस साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन जिस तेजी से नशे के सौदागर और एमडी ड्रग की फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं, उसने सियासी हलकों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की चिंता भी बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने लंबे समय तक भाजपा सरकार रहने के बावजूद नशे का यह जाल इतना गहरा कैसे हो गया?
बताया जाता है कि हाल ही में जयपुर में आयोजित संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक में देशभर में फैलते नशे के कारोबार और उसमें फंसती युवा पीढ़ी पर गंभीर मंथन हुआ। विशेष रूप से मध्यप्रदेश की स्थिति पर चिंता जताई गई। बैठक में कुछ पदाधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि पिछले दो दशकों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो फिर रोज-रोज एमडी ड्रग की फैक्ट्रियां पकड़े जाने का क्या संकेत है?
बताते हैं कि बैठक में एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि इतना संगठित और व्यापक नशे का कारोबार बिना किसी सत्तात्मक संरक्षण के फल-फूल नहीं सकता। यह बयान भले ही बंद कमरे में दिया गया हो, लेकिन इसके निहितार्थ दूर तक सुनाई दे रहे हैं।
बैठक का निष्कर्ष यह कि संघ स्वयं मप्र में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाएगा। नारदजी कहते हैं, यदि संघ सचमुच मैदान में उतर आया, तो सत्तारूढ़ दल के कुछ ऐसे चेहरे भी उजागर हो सकते हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नशे के कारोबारियों के पनाहगार माने जाते रहे हैं। अब देखना यह है कि संघ का यह अभियान सामाजिक शुद्धि का आंदोलन बनता है या फिर राजनीतिक हलचल का नया अध्याय लिखता है।
‘बड़े भाईसाब’ की कथित ‘सीडी ’ चर्चाओं में!
एक महामंडलेश्वर पर लगे दुष्कर्म के आरोपों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि, प्रदेश के सियासी गलियारों में एक कथित ‘सीडी’ चर्चा का विषय बन गई है। यह ‘सीडी’ भाजपा के पदाधिकारी रह चुके एक ‘बड़े भाईसाब’ से जुड़ी बताई जा रही है।
भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस कथित ‘सीडी’ को लेकर तरह-तरह की कहानियां चल रही हैं। चर्चा है कि जिन लोगों के ‘बड़े भाईसाब’ से ‘हित’ नहीं सध पाए वे पर्दे के पीछे से ‘सीडी’ का यह खेल रहे हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ‘सीडी’ कहां की है ?
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में कोई ‘सीडी’ है या फिर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का यह एक और हथकंडा? फिलहाल ‘चरित्र हनन’ की चर्चाओं ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। देखना यह है कि आगे यह कथित ‘सीडी कांड’ महज अफवाह साबित होता है या फिर किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका बनता है।
किसकेे फोन पर निरस्त हुई भोपाल जिला कार्यकारिणी?
मध्यप्रदेश भाजपा की भोपाल जिला कार्यकारिणी का गठन इस बार किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं रहा। लंबे इंतजार के बाद जैसे-तैसे सूची को जारी किया गया, लेकिन महज आधे घंटे के भीतर उसे निरस्त भी कर दिया गया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि घोषित कार्यकारिणी इतनी जल्दी इतिहास बन गई?
बताते हैं कि यह जिला कार्यकारिणी प्रदेश के सबसे ‘नामचीन नेताजी’ के साथ भोपाल के भाजपा विधायकों, सांसद, संभागीय एवं जिला संयोजक को दरकिनार कर एक पूर्व विधायक के प्रभाव में जारी की गई थी। इतना ही नहीं, इसमें दो ऐसे चेहरे शामिल किए गए थे, जो पार्टी के सदस्य तक नहीं थे।
तथा जिन्होंने हालिया नगर निगम और विधानसभा चुनाव में बगावत कर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। सूची सार्वजनिक होते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। बताते हैं कि इसके बाद प्रदेश के सबसे ‘नामचीन नेता’ का फोन सीधे प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा।
फोन पर क्या बातचीत हुई, यह तो अंदरखाने की बात है, लेकिन परिणाम सबके सामने था। घोषित कार्यकारिणी आधे घंटे के बाद ही निरस्त कर दी गई। नारदजी कहते हैं कि भोपाल जैसे महत्वपूर्ण जिले में भाजपा संगठन की संरचना तय हो और ‘नामचीन नेताजी’ की अनदेखी कर दी जाए, ऐसा कैसे हो सकता है?
मप्र की ‘सुदर्शनाओं’ की दिल्ली परिक्रमा
मध्यप्रदेश भाजपा की दो अति-महत्वाकांक्षी ‘सुदर्शनाओं’ की गतिविधियों को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में खूब कानाफूसी है। दरअसल, राजनीति में आए इन सुदर्शनाओं अभी चार-पांच साल ही हुए हैं, लेकिन सियासत की सीढ़ियां फुर्ती से चढ़ने की चाहत में दोनों ने दिल्ली परिक्रमा शुरू की है। कभी पार्टी के किसी केंद्रीय नेता से शिष्टाचार भेंट, तो कभी संगठन के किसी प्रभावशाली पदाधिकारी से मुलाकात, हर दरबार में इनकी हाजिरी चल रही है।
कहते हैं, राजनीति में समय से ज्यादा महत्व ‘संपर्क’ का होता है। शायद यही कारण है कि दोनों सुदर्शनाएं हाईकमान की नजरों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। दिल्ली में उनकी सक्रियता चर्चा का विषय बन रही है। नारदजी कहते हैं कि दिल्ली दरबार में इन ‘सुदर्शनाओं’ की हाजिरी का सु-फल क्या, कब और कैसे मिलता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
नहीं छूट रहा बड़े साहब का ‘संस्कृति’ प्रेम
राज्य मंत्रालय में पदस्थ एक बड़े साहब इन दिनों अपने अनोखे ‘संस्कृति प्रेम’ के कारण चर्चाओं में हैं। कुछ समय पहले ही इन साहब को प्रदेश के मुखिया से सीधे जुड़े अहम महकमे में पदस्थ किया गया है। साथ ही प्रदेश की कानून-व्यवस्था संभालने की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
लेकिन लगता है साहब का दिल अब भी ‘संस्कृति’ की गलियों में ही टहल रहा है। नए विभाग की फाइलें बेचैनी से खुलने का इंतजार कर रही हैं। लेकिन साहब का मन अब भी पुराने सांस्कृतिक रंगमंच से उतरने को तैयार नहीं। पूरे महकमे में कानाफूसी है कि अगर साहब का ‘संस्कृति प्रेम’ थोड़ा कम हो जाए, तो शायद कानून-व्यवस्था की फाइलों की भी धूल झड़ने लगे।
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