निर्मम निगम: बेहद शर्मनाक-बेहद दर्दनाक, बेहद मर्मान्तक; इंदौर नगर निगम के रिमूवल अमले का अमानवीय चेहरा फिर आया सामने
Khulasa First
संवाददाता

अपनी आजीविका बचाने के लिए जान पर खेल गई भाजपा सरकार की ‘लाड़ली बहन-बेटी’
निगम ने सड़क किनारे खड़े ठेले को जब्त किया, वाहन में चढ़ाया, उसी ठेले पर लटक गईं मां-बेटी
वाहन से बाहर लटक रहे ठेले पर लटकी रहीं मां-बेटी, किसी को नहीं आई दया, न गाड़ी रोकी
रिमूवल वाहन के पीछे चल रही थी निगम की खाली जीप, लेकिन मौत से खेलती रही एक मां और उसकी मासूम बेटी
रसूखदारों पर बस नहीं चलता, ‘गरीब-गुरबों’ पर आए दिन जोर आजमाइश कर रौब झाड़ती है ‘पीली गैंग’
देश में निगम की स्वच्छ छवि को दागदार करने वाली हरकत पर कोई कार्रवाई नहीं
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रसूखदारों के सामने मेमना बनने वाला नगर निगम इंदौर का अमला गरीब-गुरबों पर रोज जोर आजमाइश कर खुद को तुर्रमखां समझता है। सड़क किनारे के उसे वे ही अतिक्रमण नजर आते हैं जो रोज खाने-कमाने वालों को सड़क पर ले आते हैं। आए दिन रिमूवल इन्हीं लोगों का होता है। वे रोते हैं, गिड़गिड़ाते हैं।
कभी ठेले पलट दिए जाते हैं तो कभी तौल कांटा उठा लिया जाता है। ठेला, रेहड़ी छुड़ाने के लिए अमले के पीछे-पीछे दौड़ भी लगाते हैं, लेकिन अमले का दिल नहीं पसीजता। पसीजे भी कैसे? पसीजने की भी तो कोई कीमत होती है न? जो इन रोज खाने-कमाने वालों से आए दिन तो अदा हो नहीं सकती।
जिनकी मासिक बंदी है उन्हें सब तरह के अतिक्रमण की छूट है। शेष को अपनी आजीविका बचाने के लिए वैसे ही जान पर खेलना पड़ता है, जैसे नगरीय प्रशासन मंत्री की विधानसभा की एक मां और उसकी मासूम बेटी खेल गई। ये दोनों मातृशक्ति भी उसी सरकार की ‘लाड़ली बहना’ हैं, जो भाजपा को 20 बरस से प्रदेश में और नगर निगम को इंदौर में 25 बरस से सत्ता दे रही हैं।
को ई बड़ी मजबूरी ही एक मां को अपनी तरुण बिटिया के साथ सड़क पर खड़ा होने को मजबूर करती है, अन्यथा बनते कोशिश जीवन का संघर्ष चारदीवारी के अंदर ही चलता रहता है। ऐसी ही एक मां अपनी बेटी के साथ गृहस्थी की गाड़ी खींचने के लिए सड़क किनारे ठेला लगाती है और आजीविका का वो ही एक मात्र साधन जब एकाएक छीन लिया जाए तो क्या होता है? इस सवाल का बेहद पीड़ादायक जवाब बुधवार को इंदौर की सड़कों पर मिला।
एक मां अपनी बीटिया के साथ उस ठेले पर लटकी हुई है जो स्वयं रिमूवल अमले के वाहन से बाहर तक लटका हुआ है। ठेला भी ऐसी हालत में लटका हुआ है कि जरा सी देर में वह वाहन की ऊंचाई से सड़क पर आ सकता है। उसी ठेले को बचाने की जद्दोजहद में दोनों मां-बेटी ने अपनी जान जोखिम में डाल दी।
उन्हें लगा होगा कि ऐसी खतरनाक स्थिति को देख रिमूवल वाला वाहन आगे थोड़े ही बढ़ेगा, लेकिन वाहन सिर्फ आगे ही नहीं बढ़ा, रफ्तार से दौड़ने भी लगा। बावजूद इसके मां-बेटी उस ठेले पर लटकी रहीं, जो स्वयं वाहन से बाहर जानलेवा हालत में लटक रहा था। दोनों मां-बेटी स्तब्ध रह गईं। अब कर भी क्या सकती हैं? जिनसे दया की उम्मीदें बांधी थीं वे तो बेहद निर्मम निकले।
उन्हें दया तो दूर ये डर भी नहीं सताया कि अगर ये दोनों मां-बेटी गिर गईं तो ऊपर क्या जवाब देंगे?, इंदौर शहर की कितनी छीछालेदर होगी?, हमारे अपने महकमे की कितनी बदनामी होगी?, हम पर क्या कार्रवाई होगी? कुछ फिक्र नहीं और अमला ऐसे अलमस्त हो मां-बेटी को जान पर खेलते देख रफ्तार से चलता रहा।
जिसने ये दृश्य देखा कलेजा मुंह को आ गया। मां-बेटी पर तरस से ज्यादा अमले की निर्ममता व बेपरवाही पर तरस आया कि आखिर सरकारी महकमे के लोग इतने बेदर्द कैसे हो सकते हैं? माना कि अपनी आजीविका बचाने को मां ने अपनी बेटी के साथ दुस्साहसी कदम उठाया और जिंदगी दांव पर लगा दी, लेकिन उन लोगों की मानवीयता कहां गई थी जिन्होंने ये सब देखते हुए भी न केवल गाड़ी स्टार्ट कर ली, बल्कि उसे बेफिक्री के साथ गति भी दे दी? ये जानते-बूझते कि पीछे मां-बेटी खतरनाक रूप से लटकी हुई हैं।
ये वीडियो... शहर के जागरूक एडवोकेट व इंदौर इनसाइट के जनक लखन शर्मा के जरिए दृश्यमान हुआ। मामला कुम्हारखाड़ी बाणगंगा क्षेत्र का है। यानी जिस महकमे ने ये अमानवीय स्वरूप दिखाया उसके मुखिया नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा क्षेत्र 1 का है।
नगर निगम का सब किया धरा उनके ही हिस्से में अंतत्वोगत्वा जाकर जमा होता है। जवाबदेही निगम के जिस रिमूवल अमले की बनती है उस अधिकारी बबलू कल्याणे के पास अव्वल तो इस पूरे घटनाक्रम की कोई रपट पहुंची ही नहीं थी और जब ये शर्मनाक हादसा शहर की सुर्खी बना तो इतना पता चला कि ये सब किसी रोहन यादव नाम के सुपरवाइजर अधिकारी की अगुआई में हुआ है।
अब शहर के नूतन निगमायुक्त व संवेदनशील महापौर का जिम्मा है कि वे भाजपा सरकार की इन लाड़ली बहन-बेटी के साथ हुए इस व्यवहार पर किस-किस की जवाबदेही तय करते हैं और उस जवाबदेही के बाद क्या कार्रवाई करते हैं?, क्योंकि जिस-जिस ने ये फोटो-वीडियो देखा, उसने नगर निगम की कार्यप्रणाली को धिक्कारा, जिसे पूरे देश में सबसे स्वच्छ नगर निगम का तमगा मिला हुआ है।
जिस बेटी को, जिस वक्त किसी स्कूल कॉलेज में होना चाहिए था, उस वक्त वह अपनी मां के साथ उस ठेले पर लटकी हुई थी, जो नगर निगम ने उठा लिया था। जिम्मेदारों को इस हालात की मारी बेटी में, अपनी बहन-बेटी नजर आएगी?
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