दस्तावेजों में कमी बताकर मान्यता कर रहे निरस्त: स्कूल शिक्षा विभाग में डीपीसी मिश्रा की मनमानी से निजी स्कूल संचालक परेशान; कलेक्टर के समक्ष करेंगे अपील
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिला परियोजना समन्वयक की मनमानी से निजी स्कूलों की मान्यता खतरे में है। कई स्कूल संचालकों ने डीपीसी पर मनमानी के आरोप लगाते हुए कहा कि मान्यता के आवेदन में कमी पूर्ति का मौका दिए बिना ही स्कूलों की मान्यता समाप्त कर रहे हैं, जिससे स्कूल संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
नए शैक्षणिक सत्र में कक्षाओं का संचालन करने के लिए डीपीसी द्वारा पांचवीं व आठवीं कक्षा तक के स्कूलों को मान्यता दी जाती है, लेकिन इस वर्ष स्कूलों की मान्यता जारी करने के मामले में डीपीसी मनमानी कर रहे हैं। जिससे निजी स्कूल संचालक परेशान होने लगे हैं।
कई स्कूल संचालकों ने मान्यता के लिए आवेदन किए, ऐसे में दस्तावेजों की कमी होने पर उनमें कमीपूर्ति कराई जानी चाहिए, लेकिन डीपीसी मनमानी करते हुए किसी भी स्कूल संचालक को कमीपूर्ति का मौका नही दे रहे हैं। बल्कि अधूर दस्तावेज बताकर स्कूलों की मान्यता निरस्त की जा रही है। इससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
कमी पूर्ति का अवसर भी नहीं दिया: ज्ञात रहे कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा नवीन मान्यता एवं मान्यता नवीनीकरण की प्रक्रिया में प्रावधान है कि पांचवी एवं आठवीं की मान्यता में बीआरसी की अनुशंसा से डीपीसी द्वारा स्कूलों को मान्यता प्रदान की जाती है।
नियमानुसार यदि किसी स्कूल की मान्यता संबंधी दस्तावेजों में कोई कमी होती है तो डीपीसी कार्यालय द्वारा सूचना देकर कमी पूर्ति कराई जाती है, यही प्रावधान हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों की मान्यता अपनाया जाता है, लेकिन डीपीसी संजय मिश्रा द्वारा बीआरसी की अनुशंसा के बाद मान्यता के लिए किए गए आवेदन में कमी पूर्ति का अवसर दिए बिना ही स्कूलों की मान्यता निरस्त कर रहे हैं, जबकि मान्यता निरस्त करने के पूर्व स्कूल संचालक को एक अवसर दिया जाना चाहिए।
निरस्त की मान्यता
महू बीआरसी द्वारा मान्यता की अनुशंसा किए जाने के बाद भी डीपीसी द्वारा कमी पूर्ति का अवसर दिए बिना पेनफील्ड इंटरनेशल स्कूल की मान्यता निरस्त कर दी। स्कूल संचालिका कीर्ति अग्रवाल का कहना है डीपीसी की टीम द्वारा अवकाश के दिन निरीक्षण किया गया जब स्टूडेंट और टीचर नहीं थे। उन्होंने बताया कि वर्षों से संचालित विद्यालय मान्यता के अधिकतर नियम की पूर्ति करता है। इसके बाद भी स्कूल की मान्यता निरस्त कर दी गई। उन्होंने अपने एक्स पर पोस्ट कर शासन से नियम अनुसार मान्यता की गुहार की है। इसी तरह शहर के कई स्कूल संचालकों ने डीपीसी पर आरोप लगाया है कि खेल मैदान के नाम पर उन्होंने स्कूलों की मान्यता निरस्त कर दी है। जबकि शासन के नियम के मुताबिक स्कूलों को अब तक मान्यता मिलती रही है।
खेल मैदान न होने से भी निरस्त की मान्यता: निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी खामियों के चलते शिक्षकों का डेटा अपडेट नहीं हो सका है। कुछ स्कूल संचालकों ने जानकारी के अभाव में गैर शैक्षणिक स्टाफ को भी पोर्टल पर अपडेट कर दिया। पोर्टल पर बीएड, डीएड शिक्षक ही अपडेट होते हैं, इसके चलते डीपीसी ने त्रुटिपूर्ण डेटा को आधार मानकर कई स्कूलों की मान्यता निरस्त कर दी। डीपीसी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने कई स्कूलों की मान्यता खेल मैदान न होने से निरस्त कर दी है। जबकि शासन का नियम है कि यदि स्कूल के नजदीक पार्क या खुली भूमि है तो उसे मान्य किया जाए।
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