पुलिसकर्मियों का असली ड्रामा: नकली चौकी में
नौ क्वार्टर का झूठा केस बनाने की नौटंकी कर युवक को पीटा और वसूले रुपए शिकायत पर ऑफिस से पुलिसकर्मियों को दे दिया आवेदक का नंबर खुलासा फर्स्ट…इंदौर । झूठे केस में फंसाने के नाम पर वसूली पुलिसकर्मियों क
Khulasa First
संवाददाता

नौ क्वार्टर का झूठा केस बनाने की नौटंकी कर युवक को पीटा और वसूले रुपए
शिकायत पर ऑफिस से पुलिसकर्मियों को दे दिया आवेदक का नंबर
खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
झूठे केस में फंसाने के नाम पर वसूली पुलिसकर्मियों की फितरत है। ऐसे ही एक मामले में परदेशीपुरा थाने के एक हेड कांस्टेबल के लाइन अटैच होने के मामले को अभी ज्यादा दिन नहीं बीते कि जिले के देहात में ऐसा ही एक मामला फिर सामने आ गया।
दोस्तों के साथ पार्टी मनाने जाने के लिए देसी शराब के नौ क्वार्टर खरीदते ही एक युवक को खुड़ैल थाने के पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया। उस पर शराब तस्करी का केस बनाने का डर दिखाकर एक नकली पुलिस चौकी में ले गए और मारपीट कर पांच हजार रुपए वसूल लिए। शिकायत करने पर आला अफसर ने पीड़ित को जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन उनके ऑफिस से यह जानकारी लीक होकर संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंच गई। नतीजा ये हुआ कि अब पुलिसकर्मी पीड़ित पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
कलेक्ट्रेट देहात एसपी कार्यालय पहुंचे रोहन जाटव ने कल बताया कि वह अपने कुछ दोस्तों के साथ 30 नवंबर को पार्टी करने कम्पेल जा रहा था। ऑनलाइन पेमेंट कर देवगुराड़िया शराब दुकान से नौ क्वार्टर देसी शराब खरीदी।
वहां से पुल के पास पहुंचा था कि तभी खुड़ैल थाने के सिपाही देवेंद्र तिवारी व एएसआई संजीव तिवारी ने उसे रोक लिया। तलाशी के नाम पर शराब के क्वार्टर निकालते हुए तस्करी का आरोप लगाया। धमकाकर गालियां देते हुए गाड़ी में बैठाया और देवगुराड़िया चौराहा स्थित बंद पड़ी पुलिस चौकी के आगे एक सरकारी भवन में ले गए। वहां एक टेबल, कुर्सी और दो-तीन पलंग थे
पास में बाइक भी खड़ी थी। एएसआई संजीव तिवारी ने टेबल पर से एक रजिस्टर उठाया और उसे खोलकर नाम-पता पूछा। आबकारी एक्ट का केस बनाने और हवालात में डालने की धमकी देकर गालियां दीं और डंडे से पीटना शुरू कर दिया। जेल जाने से बचने के लिए मैंने रुपए देकर अपनी जान छुड़ाई।
शिकायतकर्ता की गोपनीयता भंग
रोहन के अनुसार पूरे घटनाक्रम की शिकायत कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय में देहात के अफसर को कर दी। उन्होंने भी जांच के आदेश देते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन उनके कार्यालय से शिकायतकर्ता की गोपनीयता भंग करते हुए मेरा नाम और नंबर संबंधित पुलिसकर्मियों को बता दिया गया। इसके बाद पुलिसकर्मी देवेंद्र तिवारी और एएसआई संजीव तिवारी केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। संभवत: पुलिसकर्मी उक्त फर्जी पुलिस चौकी पर कई और लोगों से भी इसी तरह वसूलीबाजी कर चुके हैं।
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