एजी की राय को आदेश में उद्धृत करना गलत परंपरा, विवेक तन्खा: सोम डिस्टलरीज लाइसेंस निलंबन पर नया विवाद
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सोम डिस्टलरीज समूह के लाइसेंस निलंबन आदेश को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर प्रदेश के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश के वरिष्ठ कानूनविद एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के बयान का हवाला देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
तन्खा ने 4 फरवरी 2026 को जारी आबकारी आयुक्त मध्य प्रदेश (ग्वालियर) के आदेश को एक्स पर टैग करते हुए लिखा कि सोम डिस्टलरीज का लाइसेंस निलंबन आदेश महाधिवक्ता (एजी) की राय को उद्धृत करते हुए जारी किया गया है।
महाधिवक्ता का पद संवैधानिक है और सरकार को राय देना उनका संवैधानिक दायित्व है, लेकिन जब उस राय को आदेश का हिस्सा बना दिया जाता है तो अदालत में उसी आदेश की पैरवी एजी कैसे करेंगे? यह एक गलत प्रथा है।
केके मिश्रा के तीखे सवाल
कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने पोस्ट में लिखा कि दो वर्ष पूर्व न्यायालय द्वारा सोम डिस्टलरीज के निलंबन के आदेश के बावजूद फाइल क्यों दबाई? अब जो आदेश पारित हुआ है, उसमें महाधिवक्ता की राय का उल्लेख कर कंपनी के बचाव के लिए कानूनी रास्ते क्यों खुले छोड़े गए? आखिर आबकारी अधिकारी किसके प्रभाव में इस तरह के निर्णय ले रहे हैं?
उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा
मदहोश विभाग के मदहोश अधिकारी आखिर किसके प्रभाव में यह गलत काम कर रहे हैं? इस मदहोशी में और कौन-कौन शामिल है, जबकि दूषित शराब/पानी पीने से 33 लोगों की जीवनलीला समाप्त हो चुकी है। एक का साथ, कई का विकास, वाह मेरे अमृतकाल, रामराज्य!
यह है पूरा मामला: मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने नकली शराब परिवहन परमिट, कूटरचित दस्तावेज और अवैध शराब परिवहन के गंभीर मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सोम डिस्टलरीज समूह के खिलाफ सख्त कदम उठाया है।
आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने 04 फरवरी 2026 से प्रभावी आदेश जारी करते हुए इन यूनिट्स के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल निलंबित किए सोम डिस्टलरीज प्रालि, सेहतगंज (जिला रायसेन), सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लि, रोजराचक (जिला रायसेन)।
अदालत में आरोप सिद्ध
देपालपुर के अपर सत्र न्यायाधीश ने प्रकरण क्रमांक 21/2021 में यह प्रमाणित किया कि नकली शराब परिवहन परमिट तैयार किए गए, कूटरचित दस्तावेज एवं फर्जी बिल्टियों का उपयोग हुआ, शासन को भारी राजस्व हानि पहुंचाई गई, कंपनी को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा गया। अदालत ने सोम डिस्टलरीज समूह के निदेशक एवं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को दोषी ठहराते हुए कई आरोपियों को कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
हाई कोर्ट से आंशिक राहत, पर निलंबन बरकरार
हाईकोर्ट ने सजा के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगाई है, पर लाइसेंस निलंबन पर रोक नहीं, दोषसिद्धि का आदेश प्रभावी है। मामले में धारा 31(1)(ख) एवं (ग), धारा 44 के उल्लंघन को प्रमाणित मानते हुए विभाग ने डी-1, एफएल-9, सीएस-1 सहित सभी प्रमुख लाइसेंस सस्पेंड किए हैं। लापरवाही का खुलासा होने पर आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को सेवा से बर्खास्त किया गया अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है।
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