राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई: अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा- पुलिस की ढिलाई बर्दाश्त नहीं..
पुलिस को किसी मामले में 7 तो किसी मामले में 15 दिन का अल्टीमेटम खुलासा फर्स्ट, इंदौर । राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में जनसुनवाई के दौरान पु
Khulasa First
संवाददाता

पुलिस को किसी मामले में 7 तो किसी मामले में 15 दिन का अल्टीमेटम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में जनसुनवाई के दौरान पुलिस को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने महिलाओं को न्याय दिलाने में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही को अस्वीकार्य बताते हुए फटकार लगाई। स्पष्ट किया शिकायतों को नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त नहीं होगा, खासकर घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों में पुलिस की लचर कार्यप्रणाली साफ नजर आई।
जनसुनवाई में जानकारी दी गई जिले से 164 शिकायतें हैं, जिनमें से 122 को निपटा दिया गया। शुक्रवार की जनसुनवाई में 44 मामले आए, जिनमें 11 सेक्सुअल हैरेसमेंट, 2 रेप/अटेम्प्ट टू रेप, 12 दहेज उत्पीड़न और एक एसिड अटैक के मामले शामिल थे। अधिकांश पीड़िताओं ने अध्यक्ष विजया रहाटकर को आपबीती सुनाई, जिनमें न केवल पारिवारिक उत्पीड़न की घटनाएं थीं, बल्कि पुलिस की ज्यादती और जुल्म की शिकायतें भी।
कई महिलाओं ने बताया पुलिस ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, उल्टे धमकाया या अनदेखा किया। रहाटकर ने गहरी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
तीन तलाक पर सख्त रुख
तीन तलाक के मुद्दे पर भी आयोग ने सख्त रुख अपनाया। एक महिला ने मर्चेंट नेवी में नौकरी करने वाले पति द्वारा व्हाट्सएप पर तीन तलाक की धमकी की शिकायत की। रहाटकर ने पुलिस को तुरंत एफआईआर के निर्देश दिए। पुलिस के दोहरे रवैये पर कटाक्ष किया महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई धीमी है, जबकि भारत सरकार ने ट्रिपल तलाक पर कानून बनाया है। ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया जाए। पुरुषों के मामले में त्वरित एक्शन लिया जाता है।
संभगायुक्त सुदामा खांडे, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा सहित महिला प्रकरण से जुड़े मामलों के अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे। प्रकरणों पर उनसे विस्तृत चर्चा हुई, जहां राहत के साथ-साथ अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कड़ी कार्रवाई पर जोर दिया।
प्रोटेक्शन ऑफिसर और इंटरनल कमेटी अनिवार्य
महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए आयोग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। दो महीने में सभी जिलों में प्रोटेक्शन ऑफिसर नियुक्त करने और 10 से अधिक महिलाओं वाले विभागों में इंटरनल कम्प्लेंट कमेटी गठित करने का आदेश दिया। रहाटकर ने कहा ये कदम महिलाओं को तत्काल न्याय दिलाने में मदद करेंगे।
प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर की शुरुआत... विवाहों में समन्वय और तलाक की संख्या कम करने के लिए आयोग ने प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर शुरू करने की घोषणा की। ये सेंटर तहसील स्तर पर होंगे, जहां मनोवैज्ञानिक और सोशल वर्क विशेषज्ञों द्वारा शादी से पहले काउंसलिंग दी जाएगी। देशभर में 100 ऐसे सेंटर बनाने की योजना है। रहाटकर ने जोर दिया पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग जरूरी है ताकि छोटे विवाद बड़े रूप न लें।
एक घटना से जिंदगी खत्म नहीं होती
अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पीड़ित महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा जिंदगी किसी एक रिश्ते या घटना से खत्म नहीं होती। कठिनाइयों के बावजूद नई शुरुआत करें। वरिष्ठ अधिकारियों को प्रकरणों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने, महिलाओं की सुरक्षा, न्याय और कल्याण के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए है।
आयोग की पहल महिलाओं को न्याय दिलवाने की दिशा में महत्वपूर्ण तब ही साबित होगी जब उसके निर्देशों का पालन पुलिस तत्परता और निष्पक्षता से करेगी।
एक पीड़िता ने पति की हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होने की शिकायत की। बताया हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई और अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग की होने के बावजूद आर्थिक सहायता भी नहीं मिली। गर्भवती है। रहाटकर ने जांच अधिकारी को सात दिन में गिरफ्तारी कर रिपोर्ट देने का सख्त आदेश दिया।
इसी तरह, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न के कई मामलों में महिलाओं ने पतियों की धमकियों का जिक्र किया। एक महिला ने कहा जमानत पर रिहा पति वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहा है, लेकिन पुलिस चुप है। अध्यक्ष ने पुलिस को सात दिनों में गिरफ्तारी और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को आदेशित किया।
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