प्रमोशन पर ‘ब्रेक’, संतोष वर्मा के बाद अब पवन जैन पर गिरी गाज: दागी अफसरों पर सरकार का शिकंजा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । ब्राह्मण बेटियों को लेकर असभ्य और आपत्तिजनक बयान देकर सुर्खियों में आए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा की पदोन्नति पर रोक के बाद अब एक और दागी अफसर पवन जैन की बारी आ गई है। वर्ष 2013...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्राह्मण बेटियों को लेकर असभ्य और आपत्तिजनक बयान देकर सुर्खियों में आए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा की पदोन्नति पर रोक के बाद अब एक और दागी अफसर पवन जैन की बारी आ गई है। वर्ष 2013 बैच के अधिकारी पवन जैन की पदोन्नति भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
उनके खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में दर्ज धोखाधड़ी के गंभीर मामले को आधार बनाते हुए सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब आरोपों से घिरे अधिकारियों को आगे बढ़ाने का दौर खत्म होने वाला है।
मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने पवन जैन को पदोन्नत कर अपर सचिव बनाने से साफ इनकार कर दिया। समिति का मानना है कि जब तक ईओडब्ल्यू में दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच लंबित है तब तक पदोन्नति देना न सिर्फ नियमों के खिलाफ होगा, बल्कि प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े करेगा।
दूसरी बैठक में जोड़ा गया पवन जैन का नाम
गौरतलब है कि पवन जैन को वर्ष 2020 में राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में पदोन्नत किए जाने को लेकर भी उस समय आपत्ति उठी थी। प्रदेश में 1 जनवरी 2026 को विभिन्न संवर्ग के अधिकारियों को नियमित पदोन्नति दी जानी है। इसके लिए आईएएस संवर्ग में अब तक दो बार डीपीसी की बैठक हो चुकी है।
पहली बैठक में अनुराग चौधरी, ऋषि गर्ग, तरुण भटनागर और संतोष वर्मा को पदोन्नति से वंचित रखने का निर्णय लिया गया था। शुक्रवार को हुई दूसरी बैठक में पवन जैन का नाम भी इस सूची में जोड़ दिया गया। विभागीय अधिकारियों का साफ कहना है कि जिन अधिकारियों पर गंभीर जांच चल रही है, उन्हें प्रमोशन देना नियमों और नैतिकता दोनों के खिलाफ है।
ईओडब्ल्यू में धोखाधड़ी का केस दर्ज है-
पवन जैन के खिलाफ ईओडब्ल्यू में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज है। इसके बावजूद उन्हें पहले आईएएस संवर्ग में शामिल कर लिया गया था। तब तर्क दिया गया था कि मामला दर्ज तो है, लेकिन अभी चालान पेश नहीं हुआ है। हैरानी है कि अभियोजन की स्वीकृति के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ही आगे नहीं बढ़ रहा था, जिससे मामला वर्षों अटका रहा।
पवन जैन पर गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का खुला दुरुपयोग करते हुए बंधक रखे गए 25 प्रतिशत भूखंडों को बिना कार्य पूर्णता के अनधिकृत रूप से मुक्त कर दिया। बैतूल में एसडीएम रहते हुए उन्होंने आदिवासियों की जमीन नियमों को ताक पर रखकर सामान्य वर्ग के लोगों को बेचने की अनुमति दे दी थी। इस गंभीर अनियमितता के चलते उन्हें बैतूल से हटाया गया था। यही नहीं, दिव्यांग व्यक्ति से अभद्रता के मामले में उन्हें इंदौर एडीएम पद से भी हटाया जा चुका है।
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