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सुखलिया पानी की टंकी से धड़ल्ले भरे जा रहे निजी टैंकर: निगम जोन 6 के उपयंत्री की मिलीभगत से फलफूल रहा पानी का कारोबार

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 फ़रवरी 2026, 7:58 पूर्वाह्न
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सुखलिया पानी की टंकी से धड़ल्ले भरे जा रहे निजी टैंकर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम जोन 6 के नर्मदा प्रोजेक्ट उपयंत्री की मिलीभगत से सुखलिया स्थित पानी की टंकी से निजी टैंकर भरे जा रहे हैं। इससे निगम अधिकारी की जेब गर्म हो रही है, वहीं नर्मदा का पानी बेचकर पानी माफिया भी जमकर कमाई कर रहा है। लंबे समय से जारी इस खेल की वजह से रहवासियों को पीने का पानी भी नहीं मिल रहा है।

दो दिन में एक दिन सप्लाय होने वाला नर्मदा का पानी महज पंद्रह से बीस मिनट घरों में पहुंच रहा है। उसमें भी गंदा पानी आने से रहवासी परेशान हो रहे हैं। कई शिकायतों के बाद निगम अफसर मूक दर्शक बने हुए हैं, जबकि जिम्मेदार पानी बेचकर कमाई करने में सक्रिय हैं।

शहर में पानी का कारोबार करने वालों और निगम जल यंत्रालय के अफसरों से मिलीभगत के कारण पानी का धंधा फलफूल रहा है। पानी के इस कारोबार से निगम अधिकारियों की कमाई हो रही है, वहीं महंगे दाम पर पानी बेचकर पानी माफिया भी जमकर कमाई कर रहे हैं।

ऐसे ही एक मामले का खुलासा जनहित में खुलासा फर्स्ट कर रहा है। इस मामले में नगर निगम जोन 6 लवकुश आवास विहार सुखलिया और बापट चौराहा स्थित पानी की टंकी से निजी टैंकर जग्गी वाटर टैंकर पानी भरकर स्कीम नंबर 78 कमर्शियल प्रतिष्ठान पर पहुंचाते देखा गया है।

हर टैंकर के एवज में मिलती है मोटी रकम
बताया जाता है कि यह निजी टैंकर हर दिन कई बार पानी की टंकी से पानी भरकर ले जाता है और उसे बेचता है। पानी के कारोबार में पानी की टंकी पर तैनात कर्मचारी निजी टैंकर के पहुंचते ही उसे बेखौफ भरना शुरू कर देता है। इसके लिए निगम जोन 6 पर पदस्थ नर्मदा प्रोजेक्ट के उपयंत्री पलाश पंडित व अन्य कर्मचारियों की सहमति मिली हुई है।

सूत्रों की मानें तो हर दिन कई टैंकर भरे जाने से निगम अधिकारी को हर टैंकर के एवज में मोटी रकम मिलती है। इस वजह से वह रहवासियों को दिया जाने वाली पानी निजी टैंकरों में भरवाकर बिकवा रहा है। यह पहला मौका नहीं है, पहले भी निजी टैंकर इसी पानी की टंकी पर पानी भरते पाए जाने पर निगम ने संंबंधित जल यंत्रालय अधिकारी को हटाने और टैंकर संचालक के खिलाफ एफआईआर कराने की कार्रवाई की थी, लेकिन अधिकारी बदलते ही पानी बेचने का खेल फिर जोर-शोर से शुरू हो गया है।

पंद्रह से बीस मिनट सप्लाय किया जा रहा पानी
निगम जोन 6 के जल यंत्रालय का कामकाज संभाल रहे नर्मदा प्रोजेक्ट के उपयंत्री पलाश पंडित पूरी तरह मनमानी कर रहे हैं। इसके चलते वार्ड 22 के शबरी नगर में दो दिन में एक दिन सप्लाय होने वाला नर्मदा का पानी मुश्किल से पंद्रह से बीस मिनट सप्लाय किया जा रहा है।

उसमें शुरुआत में नलों से गंदा पानी निकलता है। पानी का प्रेशर इतना कम होता है कि पानी पहली और दूसरी मंजिल के फ्लैट में पहुंचता ही नहीं है। इसकी कई बार रहवासियों ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन जिम्मेदारों ने कोई कारगर कार्रवाई नहीं की।

अब जब इन अधिकारियों द्वारा खुलेआम पानी बेचने का कारोबार करने का खुलासा हुआ है तो निगम जोनल कार्यालय में हड़कंप मच गया है। वहीं रहवासियों ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को शिकायत दर्ज कराई है।

जोन बदला, गतिविधि वही
वार्ड परिसीमन में वार्ड 22 जोन 5 से हटकर जोन 6 में पहुंच गया। इसके चलते लवकुश आवास विहार सुखलिया स्थित पानी की टंकी का नियंत्रण भी निगम जोन 5 के अफसरों से छिन गया। अब इस पानी की टंकी पर जोन 6 के अधिकारियों का नियंत्रण है।

इस तरह पानी की टंकी पर नियंत्रण करने वाले अधिकारी बदले, लेकिन पानी की टंकी पर निजी टैंकरो को पानी भरने की गतिविधियां पुराने तरीके से ही जारी हैं। हालांकि जोन बदलने के साथ ही अफसर भी बदले इससे घरों को मिलने वाला पानी निजी टैंकरो में भरकर बेचने का खेल बदस्तूर जारी है। जबकि रहवासी पानी के लिए परेशान होकर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं।

कार्रवाई की जाएगी
मैंने निजी टैंकर भरने के लिए इंकार किया है। इसके बाद भी टैंकर भरा गया तो कार्रवाई की जाएगी। -पलाश पंडित, जल यंत्रालय जोन 6

होटल और रेस्टोरेंट
नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से सुखलिया स्थित पानी की टंकी से निजी टैंकर पानी भरकर शहर के कई प्रमुख होटल, रेस्टोरेंट व अस्पताल में पहुंचा रहे हैं। निजी पानी के टैंकरों की कीमत एक हजार से पांच हजार रुपए तक तय रहती है। सूत्र बताते हैं कि अभी मौसम में बदलाव शुरू हुआ है, गर्मी की दस्तक होते ही पानी का कारोबार तेजी से पैर पसारने लगा है।

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाएग निगम अफसर घरों में पानी की सप्लाय कम करते जाएंगे और निजी टैंकरों को भरकर पानी बेचने वालों से कमाई करते जाएंगे। इससे रहवासी परेशान होते रहते हैं, जबकि निगम अधिकारी अपनी जेब भरते रहते हैं।

निरंजनपुर पानी बेचने वालों का गढ़
गौरतलब है कि निरंजनपुर पानी बेचने वालों का गढ़ बना हुआ है। यहां कई निजी टैंकर संचालक पानी बेचने का कारोबार वर्षों से कर रहे हैं। इसके चलते ही इन निजी टैंकर संचालकों ने निगम के जल यंत्रालय व अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर ली है, जिससे इनके टैंकर हर दिन पानी की टंकी से भरे जा रहे हैं।

जबकि पानी बेचने वाले इन टैंकरों का पानी कमर्शियल प्रतिष्ठानों में महंगे दाम पर बेचकर कमाई कर उसका हिस्सा अधिकारियों को भी दे रहे हैं। इससे शहर में पानी बेचने का कारोबार लगातार पैर पसार रहा है।

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