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प्रशासन पर बढ़ा दबाव इलाज सड़क पर, आक्रोश घरों में: भागीरथपुरा, 9416 लोगों की जांच, 2354 घरों का सर्वे, शुद्ध पानी सर्वोच्च प्राथमिकता

Khulasa First

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संवाददाता

05 जनवरी 2026, 5:33 pm
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प्रशासन पर बढ़ा दबाव इलाज सड़क पर, आक्रोश घरों में

स्वास्थ्य टीमें सक्रिय, महिलाएं उग्र

रिपोर्ट में पानी शुद्ध, तो 17 मौतें कैसे हो गईं

एक ही पानी की जांच तीन लैब में, दो में जहर, एक में नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र की दूषित जल त्रासदी के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में स्वास्थ्य, नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से प्रभावित क्षेत्र में निरंतर निगरानी, उपचार और जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, उबालकर पानी पीने और बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की समझाइश दी जा रही है।

सीएमएचओ डॉ. माधवप्रसाद हासानी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने रविवार को घर-घर रिंग और फॉलोअप सर्वे किया। 17 संयुक्त टीमें तैनात रहीं, जिनमें जन अभियान परिषद, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, सुपरवाइजर एवं एनजीओ के सदस्य शामिल रहे।

टीमों ने नागरिकों को दूषित जल से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया । स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट और पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीवेट (क्लीनवेट) किट वितरित की। किट के उपयोग की विधि भी समझाई ताकि पेयजल सुरक्षित हो।

आंकड़ों में अभियान

2354 घरों का सर्वे

9416 नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण

429 पुराने मरीजों का फॉलोअप

256 मरीज उपचार के बाद डिस्चार्ज

05 एम्बुलेंस की तैनाती

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मरीज दवाइयों का पूरा डोज लें। धात्री माताओं को 6 माह तक के शिशुओं को केवल मां का दूध पिलाने की सलाह दी जा रही है। उल्टी-दस्त पीड़ित वे मरीज, जिन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, दवाइयों का पूरा कोर्स लेने की सख्त हिदायत दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया बीच में दवा छोड़ने से संक्रमण दोबारा फैल सकता है।

तीन स्तर पर उपचार व्यवस्था

कलेक्टर वर्मा ने बताया दूषित जल प्रभावित नागरिकों के उपचार के लिए प्रशासन तीन स्तर पर कार्य कर रहा है—

अस्पतालों में भर्ती कर नि:शुल्क उपचार

दवाइयों, इंजेक्शन और आवश्यक संसाधनों की नि:शुल्क उपलब्धता

डिस्चार्ज मरीजों का नियमित फॉलोअप

प्रशासन के सतत प्रयासों से प्रभावितों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, हालांकि सतर्कता अभी भी पूरी तरह बरकरार है।

लीकेज सुधार और क्लोरीनेशन पर जोर... नगर निगम का अमला रिंग सर्वे के साथ-साथ पानी की पाइपलाइन में लीकेज की पहचान और मरम्मत कर रहा है। शुद्ध पेयजल के लिए क्लोरीनेटेड जल आपूर्ति की जा रही है, जबकि अन्य उपयोग के लिए सुरक्षित बोरवेल का उपयोग किया जा सकता है।

स्मार्ट सिटी कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक... स्मार्ट सिटी कार्यालय में कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) का कोई भी मरीज नहीं पाया गया है। विशेषज्ञ टीमें पानी के रेंडम सैंपल लेकर जांच कर रही हैं। जहां भी दूषित पानी पाया जाएगा, तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

30 से अधिक बीटों में क्लोरीनेशन अभियान... भागीरथपुरा क्षेत्र को 30 से अधिक बीटों में बांटकर प्रत्येक में नागरिकों के सहयोग से बोरिंग, होज और बेसमेंट टैंकों का क्लोरीनेशन किया जा रहा है। इसके बाद ही नागरिकों को बोरिंग के पानी के उपयोग की अनुमति दी जाएगी।

आयुष विभाग भी मैदान में... प्रभावित नागरिकों के लिए आयुष विभाग ने आयुर्वेदिक औषधि वितरण योजना बनाई है। सोमवार से शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय एवं आयुष चिकित्सकों द्वारा शिविर आयोजित कर औषधि वितरण और परामर्श दिया जाएगा। मरीजों का रिकॉर्ड रखकर नियमित फॉलोअप भी किया जाएगा।

पूरे जिले में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा... मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले के समस्त नगरीय निकायों और जनपद पंचायतों के अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए कि सभी जल स्रोतों का नियमित क्लोरीनीकरण, सैंपलिंग और टेस्टिंग मिशन मोड में 7 दिन में किया जाए।

रेडवाल कॉलोनी में महिलाओं का प्रदर्शन... भागीरथपुरा की रेडवाल कॉलोनी में महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों महिलाओं ने खाली बाल्टियां लेकर प्रदर्शन किया और पार्षद कमल वाघेला पर बोरिंग के नाम पर पैसे मांगने तथा सरकारी टंकी के कथित निजी उपयोग के गंभीर आरोप लगाए। ड्रेनेज के नाम पर पूर्व में की गई वसूली का भी मुद्दा उठाकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित समाधान की मांग की।

कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त का निरीक्षण... कलेक्टर शिवम वर्मा और नवागत नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने रविवार सुबह अमले के साथ क्षेत्र का दौरा किया। त्रासदी पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की और नागरिकों से सीधे संवाद कर आश्वस्त किया घबराने की आवश्यकता नहीं। कलेक्टर ने कहा क्षेत्र में शुद्ध जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो लेवल पर कार्य किया जा रहा है और बोरिंग, पाइपलाइन तथा जल स्रोतों की लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रशासन का दावा... प्रशासन का कहना है भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित घटना पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं और नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी
जनप्रतिनिधि जिम्मेदारी से बच एक-दूसरे पर कर रहे दोषारोपण, ‘अधिकारी नेताओं की नहीं सुनते’ कहने वाले जनप्रतिनिधि इस्तीफा दें

भागीरथपुरा में गंदे पानी पीने मौतों का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा। एक ओर जहां आम नागरिक परिजनों की असमय मौत का दर्द झेल रहा है, दूसरी ओर क्षेत्र के विधायक व मंत्री, शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर और वार्ड के पार्षद राजनीतिक दबाव बनाकर मामले को उलझाने और न्यायिक जांच प्रभावित करने में जुटे हैं।

इसी राजनीतिक हस्तक्षेप का नतीजा है हाईकोर्ट में प्रस्तुत जवाब में भी पूरी सच्चाई सामने नहीं आ सकी क्योंकि सच्चाई सामने आते ही कई कुर्सियों के खिसकने का खतरा जो था । स्थिति यह है इस भयावह जल त्रासदी के लिए जिम्मेदार सभी पक्ष एक-दूसरे पर गलती का ठीकरा फोड़ने में लगे हैं।

कोई विभागीय लापरवाही का हवाला दे रहा है तो कोई राजनीतिक दबाव का जबकि सच्चाई यह है गंदे पानी की आपूर्ति का यह सिस्टम भोपाल से दिल्ली तक पक्ष और विपक्ष के नेताओं तक पहुंच चुका है।

विभागीय जांच की समीक्षा के बाद कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, कुछ को हटाया गया और विभागों का प्रभार भी बदला गया। नए अधिकारियों की नियुक्ति कर उन्हें जिम्मेदारियां भी सौंप दी गईं लेकिन बड़ा सवाल है अब तक किसी जनप्रतिनिधि पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या जनता ने उन्हें इसलिए चुना था कि बदले में गंदे पानी से परिजनों को गंवाना पड़े?

मंत्री का बयान- ‘मेरी भी नहीं सुनते अधिकारी’... जब किसी मंत्री को अपने ही विभाग के अफसरों पर यह आरोप लगाना पड़े ‘ये मेरी भी नहीं सुनते, फोन तक नहीं उठाते’ तो सवाल और भी गंभीर हो जाता है। ऐसा कौन सा काम था, जिसे करने से अधिकारी बच रहे थे? यदि वह काम नियमों के दायरे में था, तो क्यों नहीं हुआ? या फिर अधिकारी ऐसे आदेशों से इसलिए बचते रहे क्योंकि उन्हें अपनी कलम और भविष्य की जवाबदेही का डर था?

महापौर की कुर्सी, चार आयुक्त और साइन की राजनीति... शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर पुष्यमित्र भार्गव को बार-बार साबित करना पड़ रहा है अधिकारी उनकी नहीं सुनते। सवाल है कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं या दबाव और राजनीतिक अज्ञानता मुख्य वजह? चार-चार आयुक्त बदलने के बावजूद व्यवस्था नहीं सुधरी। महापौर के 41 माह के कार्यकाल में क्षितिज सिंघल पांचवें कमिश्नर हैं। प्रतिभा पाल, हर्षिका सिंह, शिवम वर्मा और दिलीप यादव आयुक्त रह चुके हैं। आरोप यह भी है निगम में विकास से ज्यादा ध्यान निर्माण एजेंसियों और कमीशन पर केंद्रित रहा।

हादसे के पांच दिन बाद पहुंचे भाजपा शहर अध्यक्ष... इस गंभीर हादसे के चार-पांच दिन बाद भाजपा शहर अध्यक्ष घटनास्थल पर पहुंचे। पहुंचते ही राजनीतिक रंग दिखाना शुरू कर दिया और कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाने लगे जबकि कांग्रेस के नेता भोपाल से घटना के अगले ही दिन सुबह इंदौर पहुंच गए थे। शहर अध्यक्ष को भागीरथपुरा पहुंचने में चार से पांच दिन लग गए। प्रतीत होता है मानो मंत्री द्वारा मंच से दी गई नसीहत ‘तंबाकू, गुटखा छोड़ दो’ नागवार गुजर गई हो।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17वीं मौत

रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69)
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों का आंकड़ा अब 17 हो गया है। हाल ही 69 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा ने भी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उन्हें 1 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था, जहां रविवार दोपहर 1 बजे उनकी मौत हो गई। मौैत का कारण दूषित पानी से उनकी किडनी खराब होना बताया गया।

भागीरथपुरा की 17 लाशों पर ‘क्लीन चिट’ की सियासत; मंत्री विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर साझा की सैंपल की निगेटिव रिपोर्ट, सवाल- जब मौतें हो रही थीं, तब का सच कहां है?

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 मौतों को लेकर मची चीख-पुकार के बाद अब मैनेजमेंट का दौर शुरू हो गया है। शहर इन मौतों के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है।

मंत्री ने प्रशासन की एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया है कि क्षेत्र में पेयजल पूरी तरह शुद्ध है और जांच में सभी खतरनाक बैक्टीरिया निगेटिव पाए गए हैं। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि पानी अमृत की तरह साफ था, तो फिर भागीरथपुरा की गलियों में 17 अर्थियां कैसे उठ गईं? क्या उन लोगों की मौत के पीछे कोई अदृश्य शक्ति थी या फिर यह सिस्टम की नाकामी को कागजों के नीचे दबाने की कोशिश है?

कैबिनेट मंत्री ने अपनी फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और स्थानीय प्रशासन के नेतृत्व की पीठ थपथपाते हुए लिखा कि भागीरथपुरा में जल शुद्धिकरण के लिए किए गए क्लोरिनेशन के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया पानी के 5 सैंपल में ई-कोलाई, वाइब्रियो कॉलेरा, साल्मोनेला और रोटा जैसे जानलेवा वायरस नहीं मिले।

हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ रिपोर्ट में पानी को क्लीन चिट दी जा रही है, तो दूसरी तरफ सावधानी के तौर पर जनता से अब भी पानी उबालकर पीने का आग्रह किया जा रहा है, जो खुद सरकारी दावों पर विरोधाभास खड़ा करता है।

16 मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन?... भागीरथपुरा का यह घटनाक्रम अब केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लीपापोती का उदाहरण बनता जा रहा है। ‘अब कहां ढूंढ़ने जाओगे मेरे कातिल... आप तो कत्ल का इल्जाम भी हमीं पर रख दो’ वाली पंक्तियां आज इंदौर के इस वार्ड में पूरी तरह चरितार्थ हो रही हैं। 16 घरों के चिराग बुझने के बाद अब कागजी आंकड़ों के जरिये यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि सिस्टम की कोई गलती नहीं थी। खुलासा फर्स्ट इस पूरे मामले में प्रशासन से यह सीधा सवाल पूछता है कि अगर पानी पूरी तरह रोगमुक्त है तो फिर 16 लोगों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है?

प्रशासन पर उठे सवाल... प्रशासन के इस रवैये को लेकर अब जनता के बीच चर्चा है। जानकारों का कहना है कि जब महामारी ने पैर पसारे थे, उस वक्त की असल रिपोर्ट सार्वजनिक करने के बजाय अब सुधार कार्य और भारी क्लोरिनेशन के बाद लिए गए सैंपल की रिपोर्ट दिखाकर खुद को बेगुनाह साबित किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर उन परिवारों के साथ भद्दा मजाक है, जिन्होंने दूषित पानी की वजह से अपनों को खो दिया। अगर पानी वाकई शुरू से ही साफ था, तो नगर निगम की टीमें पिछले कई दिन से युद्धस्तर पर ड्रेनेज और पेयजल की लाइनें अलग करने की मशक्कत क्यों कर रही थीं..?

17 मौतों के बाद सियासी लीपापोती, इमेज बचाने का खेल; कलेक्टर के दावे को सीएमएचओ ने सिरे से नकारा
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत के बाद जब इंदौर की राजनीति गरमाई, तो जिम्मेदारी लेने के बजाय सत्ताधारी खेमे में छवि सुधारने की कवायद शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय की छवि को चमकाने के लिए एक सोचा-समझा दांव खेला गया।

घटना के बाद से ही पूरे भागीरथपुरा में पार्षदों और बीजेपी नेताओं का जबरदस्त विरोध हो रहा था। जनता के गुस्से और सवालों से बचने के लिए शनिवार-रविवार को अचानक सोशल मीडिया पर अरबिंदो अस्पताल की एक रिपोर्ट इंदौर के वाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दी गई। इसमें पानी की सभी जांच नेगेटिव बताई गई।

यानी पानी पूरी तरह शुद्ध बताया गया। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यही है कि अगर पानी में कोई बैक्टीरिया था ही नहीं, तो फिर 17 लोगों की मौत किस वजह से हुई? क्या ये मौतें अपने आप हो गईं या फिर सच्चाई को ढंकने के लिए ऐसी रिपोर्टों का सहारा लिया जा रहा है?

इंदौर ही नहीं, पूरा प्रदेश जानता है कि अरबिंदो अस्पताल के कर्ताधर्ता वही डॉ. विनोद भंडारी हैं, जिनका नाम पहले भी विवादों में रहा है। कोविडकाल में भी मंत्रियों के इशारे पर शहर को गुमराह करने वाले आंकड़े देने के आरोप लग चुके हैं।

अब एक बार फिर वही अस्पताल चर्चा में है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस रिपोर्ट का मकसद सच्चाई सामने लाना था या फिर राजनीतिक चेहरे की किरकिरी रोकना?

हैरानी है कि जिस रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर प्रचारित किया, उसके लिए किसी जिम्मेदार विभाग ने औपचारिक रूप से मांग ही नहीं की थी, वहीं दूसरी ओर सरकारी लैब की रिपोर्ट पानी में खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि कर चुकी है।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज व निगम की जांच में पानी जानलेवा बताया गया, लेकिन इन रिपोर्टों को दबाने व निजी लैब की रिपोर्ट आगे बढ़ाने की कोशिश अब प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

16 मौतों के बाद भी अगर जवाबदेही तय करने के बजाय कथित तौर पर ऐसी रिपोर्टों के जरिये लीपापोती की जा रही है, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनता की आंखों में धूल झोंकने की खुली कोशिश मानी जाएगी।

जांच पर उठे सवाल: जब दो सरकारी लैब में दूषित पानी की पुष्टि हुई तो निजी लैब में जांच किसके आदेश पर कराई गई?

कलेक्टर का दावा झूठा
सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि पानी दूषित है। उसमें जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए। सैंपल भेजने को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर विरोधाभास सामने आया है। कलेक्टर का कहना है सैंपल स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए, जबकि सीएमएचओ डॉ. हासानी ने स्पष्ट कहा कि सैंपल उनके स्तर से नहीं भेजे गए। अब सवाल यह है कि आखिर निजी लैब तक सैंपल किसके निर्देश पर पहुंचे?

तीन लैब, तीन तस्वीरें... एमजीएम मेडिकल कॉलेज लैब (1 जनवरी 2026) माइक्रोबायोलॉजी लैब की रिपोर्ट में ई-कोलाई, शिगेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की स्पष्ट पुष्टि हुई।

नगर निगम लैब (4 जनवरी 2026)... मूसाखेड़ी स्थित निगम लैब की रिपोर्ट में बोरिंग का पानी भी दूषित मिला। जांच में फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी बताई गई। निजी मेडिकल कॉलेज की लैब (4 जनवरी 2026) रिपोर्ट में किसी भी बैक्टीरिया की पुष्टि नहीं की गई।

अब सवाल सीधा है
पानी शुद्ध था, तो 17 लोगों की मौत किस वजह से हुई? अगर पानी दूषित था, तो निजी लैब की रिपोर्ट किस सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रही है? जांच के नाम पर यह विरोधाभास न सिर्फ प्रशासन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उन मौतों के साथ भी गंभीर अन्याय है, जिनकी जिम्मेदारी तय होना अब भी बाकी है।

हेल्पलाइन नंबर जारी...भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह की घटना शहर के अन्य क्षेत्र में घटित न हो, इसके लिए नगर निगम ने गंदे पानी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इसके चलते अब नर्मदा जलप्रदाय से जुड़ी किसी भी समस्या पर आम नागरिक सीधे 74404-43500 और 74404-40511 नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कंट्रोल रूम में दर्ज हर शिकायत को शिकायत पंजी में दर्ज कर त्वरित निराकरण करने और आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह भागीरथपुरा में इलाज के लिए भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। किसी भी व्यक्ति को उल्टी-दस्त की समस्या हो तो इसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 94065-05508 पर दे सकते हैं।

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