मेट्रो परियोजना के नाम पर नेताजी की प्रतिमा हटाने की हो रही तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मेट्रो परियोजना के नाम पर शहर में मनमानी और बिना ठोस कार्ययोजना के काम किए जाने के आरोप एक बार फिर तेज हो गए हैं। ताजा मामला नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा से जुड़ा है, जिसे हटाने की तैयारी मेट्रो कॉर्पोरेशन द्वारा की जा रही है। इस फैसले को लेकर स्थानीय रहवासियों, सामाजिक संगठनों और अधिवक्ता वर्ग में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
इंदौर के बड़ा गणपति चौराहे पर पूर्व में स्थापित नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा को चौराहे के कायाकल्प के दौरान हटाकर शारदा कन्या स्कूल के पास स्थापित किया गया था। इसे स्मार्ट सिटी योजना के तहत नया रूप दिया गया, लेकिन इस पूरे कायाकल्प में हुए खर्च, घटिया निर्माण और अनियमितताओं को लेकर पहले ही शिकायतें ऊपर तक की जा चुकी हैं। अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने इस संबंध में प्रशासन और संबंधित विभागों को लिखित शिकायत भी दी थी।
कहां स्थापित की जाएगी अभी स्पष्ट नहीं
अब जानकारी के अनुसार खुलासा हुआ है कि मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए इसी स्थान से नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा को फिर से हटाने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा हटाने के बाद उसे कहां और किस स्थान पर स्थापित किया जाएगा, इस पर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
मेट्रो परियोजना अधिकारियों ने जल्द से जल्द प्रतिमा और उससे जुड़े सभी निर्माण कार्य हटाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के विरोध में क्षेत्र के रहवासियों ने अधिवक्ता द्विवेदी की अगुवाई में आंदोलन और कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है।
द्विवेदी ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार और भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर दुर्भावना और जलन की भावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दुर्भावना श्यामा प्रसाद मुखर्जी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बीच रहे वैचारिक मतभेदों और टकराव से जुड़ी मानसिकता का परिणाम है।
दोहरी मानसिकता के साथ काम कर रही सरकार
द्विवेदी ने सवाल उठाया कि मेट्रो परियोजना की योजना बनाते समय क्या अधिकारियों ने यह विचार किया कि इस स्थान पर स्थापित नेताजी की प्रतिमा भी अतिक्रमण मानी जाएगी? यदि प्रतिमा हटाई जाती है तो इससे होने वाले सौंदर्यीकरण के नुकसान, करोड़ों रुपए के खर्च, लगाए गए गमलों और अन्य संरचनाओं का क्या होगा, इसका जवाब कौन देगा?
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश के महापुरुषों की प्रतिमाओं और ऐतिहासिक स्थलों को लेकर दोहरी मानसिकता के साथ काम कर रही है और नेताजी की प्रतिमा हटाने का फैसला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मामले को लेकर आने वाले दिनों में विरोध और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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