बेटे के जन्मदिन के बहाने प्रेमचंद गुड्डू का शक्ति प्रदर्शन: हजारों कार्यकर्ता जुटे; सम्मेलन में हेलीकॉप्टर से पहुंचे गुड्डू
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संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
रतलाम जिले की आलोट विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने बेटे अजीत बोरासी के जन्मदिन के बहाने ऐसा शक्ति प्रदर्शन किया, जिसने मप्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। नगर पंचम विहार कॉलोनी स्थित निवास के पास आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में हजारों की संख्या में समर्थक जुटे।
खास बात यह रही कि गुड्डू इंदौर से हेलीकॉप्टर के जरिए आलोट पहुंचे, जिससे पूरे आयोजन को ‘पावर शो’ के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस जिंदाबाद और गुड्डू जिंदाबाद के नारे जरूर गूंजते रहे, लेकिन मंच और पंडाल में कांग्रेस का एक भी झंडा नजर नहीं आया।
गौरतलब है कि आलोट विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरने के बाद यह पहला मौका था, जब प्रेमचंद गुड्डू ने क्षेत्र में खुलकर अपनी ताकत दिखाई। उनके पुत्र अजीत बोरासी को कांग्रेस हाईकमान ने विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार का प्रभारी बनाकर भेजा था, लेकिन मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से अब तक प्रेमचंद गुड्डू और अजीत बोरासी की कांग्रेस में औपचारिक वापसी की कोई घोषणा नहीं हुई है।
बता दें कि प्रेमचंद गुड्डू की बेटी रीना बोरासी को दो महीने पहले मप्र महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस मौके पर प्रेमचंद गुड्डू ने बाला साहेब ठाकरे के अंदाज में शाही कुर्सी पर बैठे-बैठे सम्मलेन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने बीते 30 वर्षों से क्षेत्र की सेवा की है।
जनता ने उन्हें विधानसभा से लेकर संसद तक पहुंचाया है और इस भरोसे का कर्ज वे कभी नहीं उतार सकते। उन्होंने दोहराया कि उनके लिए क्षेत्र का विकास हमेशा सर्वोपरि रहा है। इस मौके पर उनके बेटे
अजीत बोरासी ने कहा कि वे कांग्रेस के लिए पहले भी जनता के साथ खड़े थे, आज भी हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं की ताकत से कांग्रेस का परचम लहराएंगे। उन्होंने कहा कि कई नेता आए और गए, लेकिन वे क्षेत्र में आज भी अंगद की तरह डटे हुए हैं।
प्रेमचंद गुड्डू का राजनीतिक सफर: प्रेमचंद गुड्डू पिछले तीन दशकों से मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं।
वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में उनकी गिनती होती है। आलोट क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ रही है। वे 1998 और 2003 में विधायक तथा 2009 में सांसद रह चुके हैं।
वर्ष 2023 में पार्टी से दूरी बनाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन हाल ही के शक्ति प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ अब भी बरकरार है।
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