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ईडब्ल्यूएस-एलआईजी संपत्तियों पर कब्जा: सरकारी संरक्षण में गैंग सक्रिय; नीति के दुरुपयोग से छिन रहा गरीबों का हक

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 जनवरी 2026, 9:41 पूर्वाह्न
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ईडब्ल्यूएस-एलआईजी संपत्तियों पर कब्जा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस/ एलआईजी) के लिए आरक्षित भूखंडों, फ्लैट और मकानों पर संगठित रूप से कब्जा करने वाली गैंग के सक्रिय होने और उसे कथित सरकारी व राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोप का खुलासा हुआ है। आरोप लगाया गया है कि जनकल्याणकारी नीतियों का खुलेआम दुरुपयोग कर गरीबों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है।

नियमानुसार निजी कॉलोनियों और सरकारी योजनाओं में एक निश्चित प्रतिशत में भूखंड/फ्लैट व मकान कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित होते हैं। इनमें पात्रता के लिए आवेदक का निम्न आय वर्ग का होना अनिवार्य है तथा पति-पत्नी को एक परिवार मानते हुए, पूरे मध्य प्रदेश में उनके नाम कोई अन्य संपत्ति नहीं होना चाहिए। आरोप है इसके बावजूद फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर अपात्र इन भूखंडों को हथिया रहे हैं।

आईडीए की शर्तें भी बेअसर
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) लीज डीड में स्पष्ट शर्तें रखता है और बिक्री की स्थिति में नामांतरण नहीं करता, बावजूद इन शर्तों को दरकिनार कर अवैध अंतरण भी हो रहा है।

सर्टिफिकेट ‘निर्माण’ में सरकारी संरक्षण का आरोप
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोदकुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के सर्टिफिकेट सरकारी संरक्षण में बनाए जा रहे हैं और भाजपा नेताओं के संरक्षण में यह पूरा नेटवर्क फल-फूल रहा है।

आरक्षित भूखंड, फ्लैट और मकान इस गैंग द्वारा हथिया लिए जाते हैं, फिर इन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है और दूसरी जगह फिर आरक्षित संपत्ति ले ली जाती है।

ई-रजिस्ट्रेशन की खामी बनी हथियार
द्विवेदी ने बताया ई-रजिस्ट्रेशन में कमजोर व निम्न आय वर्ग की सूची संलग्न तो की जाती है, लेकिन वह रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं होती।

इसका फायदा उठाकर बिल्डर और कॉलोनाइजर दस्तावेजों में अंतरण की रोक या समयावधि का उल्लेख नहीं करते। न ही यह जानकारी दी जाती है संबंधित फ्लैट, मकान या प्लॉट आरक्षित है, न कोई सूचना पटल लगाया जाता है। नतीजतन आम नागरिक अनजाने में इन आरक्षित संपत्तियों को खरीद लेता है।

आरोप- पूरे प्रदेश में सक्रिय है गैंग
उन्होंने दावा किया पूरे प्रदेश में संगठित गैंग सक्रिय है, जो धड़ल्ले से सर्टिफिकेट बनवाती है, जनप्रतिनिधियों के दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल कर बिल्डरों व कॉलोनाइजरों से आरक्षित संपत्तियां खरीदती है और फिर उन्हें महंगे दामों पर बेच देती है।

जिम्मेदारी से बचते अधिकारी
प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया अधिकारियों ने स्वयं को जांच से बचाने के लिए नीति बना ली है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग की सूची बिल्डर या कॉलोनाइजर से मंगाकर केवल उसका अनुमोदन कर दिया जाए ताकि भविष्य में किसी जांच की स्थिति में जिम्मेदारी बिल्डर या कॉलोनाइजर पर डाली जा सके, जबकि सर्टिफिकेट जारी करना पूरी तरह अधिकारियों का दायित्व है।

स्पष्ट फार्मेट या नियम नहीं
द्विवेदी ने कहा जिला प्रशासन ने आज तक ऐसा कोई स्पष्ट फार्मेट या नियम तय नहीं किया, जिसमें आरक्षित संपत्तियों के अंतरण से जुड़े नियम, शर्तें और प्रतिबंध आम जनता के अवलोकन के लिए उपलब्ध हों। इससे आम आदमी अनजाने में इन संपत्तियों को खरीदने के जाल में फंस रहा है।

सरकार पर गंभीर सवाल
एडवोकेट द्विवेदी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अब आम आदमी के घरों, फ्लैटों और मकानों पर भी डाका डालने का खेल खेल रही है? भाजपा नेताओं ने गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के अधिकार हड़पने का संगठित तंत्र खड़ा कर दिया है, जो सामाजिक न्याय और गंदी बस्ती निर्मूलन जैसे कानूनों का खुला मजाक है।

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