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उप मुख्यमंत्री के आरोपों पर सियासत तेज: मौत के दो हफ्ते पहले किया था दावा; बीजेपी के भ्रष्टाचार की फाइल मेरे पास

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 जनवरी 2026, 12:30 अपराह्न
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उप मुख्यमंत्री के आरोपों पर सियासत तेज

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हो गया। उनकी मौत के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मौत से करीब दो हफ्ता पहले उन्होंने 1999 की भाजपा-शिवसेना सरकार पर घोटाले का आरोप लगाया था।

लागत जानबूझकर बढ़ाकर पेश की गई
13 जनवरी को दिए गए एक बयान में अजित पवार ने दावा किया था कि वर्ष 1999 में एक सिंचाई परियोजना की लागत जानबूझकर बढ़ाकर पेश की गई थी ताकि ‘पार्टी फंड’ के लिए रकम जुटाई जा सके।

वास्तविक लागत काम थी
पवार ने कहा था कि पुरंदार लिफ्ट सिंचाई योजना की फाइल जब उनके पास आई तो उसकी लागत 330 करोड़ रुपए बताई गई थी, जबकि वास्तविक लागत करीब 220 करोड़ रुपए थी।

योजना से जुड़ी फाइल उनके पास मौजूद
पवार का आरोप था कि इसमें 100 करोड़ रुपए पार्टी फंड और 10 करोड़ रुपए संबंधित अधिकारियों के लिए जोड़े गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उस योजना से जुड़ी फाइल आज भी उनके पास मौजूद है।

बीजेपी ने जताई थी नाराजगी
अजित पवार के इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पार्टी नेताओं ने इसे पवार का “उचित बर्ताव नहीं” बताया और हैरानी जताई थी। उस वक्त भाजपा नेताओं ने इसे बेवजह का विवाद करार दिया था। 1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र में भाजपा और अविभाजित शिवसेना की सरकार थी।

उस दौरान सिंचाई मंत्री भाजपा के एकनाथ खड्से थे। खड्से ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि अजित पवार खुद सिंचाई घोटाले के आरोपों से घिरे रहे हैं और ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।

खुद अजित पवार पर भी लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप
यह भी उल्लेखनीय है कि अजित पवार स्वयं भी सिंचाई घोटाले को लेकर आरोपों के घेरे में रहे। नवंबर 2018 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के तत्कालीन डीजीपी संजय बरवे ने हलफनामे में कहा था कि पवार ने सिंचाई परियोजनाओं के ठेकों में हस्तक्षेप किया था।

हालांकि, ACB ने उन्हें किसी भी मामले में आरोपी नहीं बनाया। नवंबर 2019 में नौ मामलों में जांच बंद करने की सिफारिश की गई।

तब के ACB प्रमुख परम बीर सिंह ने स्पष्ट किया था कि ये केस अजित पवार से संबंधित नहीं थे। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में भी ACB ने कहा था कि पवार के खिलाफ कोई ठोस गड़बड़ी नहीं मिली।

राजनीति में बदले रिश्ते
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि जिस सरकार पर अजित पवार ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, उसी सरकार के नेता देवेंद्र फड़नवीस आज उनके राजनीतिक सहयोगी रहे। कभी फड़नवीस ने अजित पवार को भ्रष्टाचारी बताते हुए कहा था कि भाजपा की सरकार आई तो पवार जेल में होंगे।

लेकिन समय बदला, समीकरण बदले और बाद में फड़नवीस ने अजित पवार को डिप्टी सीएम की कुर्सी सौंपी, साथ ही एक दिन मुख्यमंत्री बनने की शुभकामनाएं भी दीं।

अब उठ रहे सवाल
अब अजित पवार की असामयिक मौत के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। क्या भाजपा और एनसीपी के बीच सब कुछ सामान्य था? क्या पवार के आरोप सिर्फ बयान थे या किसी बड़े खुलासे की तैयारी? और क्या वह कथित फाइल अब सामने आएगी? फिलहाल इन सवालों के जवाब अनुत्तरित हैं।

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