क्लब चुनाव से पहले गरमाई सियासत: पूर्व अध्यक्ष और सचिव के बीच शुरू हुआ मैसेज वार; एक-दूसरे पर लगाए आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब के चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले ही क्लब की राजनीति गर्माने लगी है। पूर्व अध्यक्ष पम्मी छाबड़ा और वर्तमान सचिव संजय गोरानी के बीच पत्रों और संदेशों के जरिए चल रही बहस ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है।
दो कार्यकाल तक ही किसी पद पर रह सकता
क्लब के संविधान के अनुसार कोई भी सदस्य लगातार दो कार्यकाल तक ही किसी पद पर रह सकता है। तीसरी बार चुनाव लड़ने से पहले उसे एक कार्यकाल का अवकाश लेना अनिवार्य होता है।
मौजूदा अध्यक्ष टोनी सचदेवा और सचिव संजय गोरानी लगातार दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, ऐसे में उनकी तीसरी बार चुनाव लड़ने की पात्रता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
छाबड़ा ने संविधान का हवाला देकर उठाया मुद्दा
यशवंत क्लब के पूर्व अध्यक्ष पम्मी छाबड़ा ने अध्यक्ष, सभापति और सभी सदस्यों को पत्र लिखकर तीसरे कार्यकाल की पात्रता का मुद्दा उठाया है। उन्होंने लिखा है कि कुछ कार्यसमिति सदस्य एक पत्र पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं, जिसमें दो कार्यकाल के बाद अनिवार्य अवकाश की व्यवस्था को हटाकर लगातार चुनाव लड़ने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
क्लब एक सेवाभावी संस्था है
छाबड़ा ने अपने पत्र में कहा कि राजनीतिक पदों पर काम करने वाले सांसद-विधायक पूर्णतः पेशेवर होते हैं और उन्हें सरकार से वेतन व सुविधाएं मिलती हैं, जबकि क्लब एक सेवाभावी संस्था है।
यहां पदाधिकारी बिना किसी आर्थिक लाभ के समय और ऊर्जा लगाते हैं, इसलिए संविधान में दो कार्यकाल के बाद एक कार्यकाल का अंतराल दूरदर्शिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रखा गया है।
दिया अमेरिका का उदाहरण
उन्होंने उदाहरण देते हुए लिखा कि अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश में भी राष्ट्रपति अधिकतम दो बार ही चुना जा सकता है। हमारे क्लब में तो केवल तीसरे कार्यकाल में चुनाव नहीं लड़ने की शर्त है, जिसके बाद सदस्य फिर से चुनाव लड़ सकता है।
निर्माण समिति का भी किया उल्लेख
छाबड़ा ने क्लब में चल रहे निर्माण कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली आमसभा में सात सदस्यों की एक समिति बनाई गई थी। इसमें वर्तमान सभापति और सचिव निर्माण कार्य पूरे होने तक सदस्य बने रहेंगे, जबकि कमेटी द्वारा नियुक्त तीन सदस्य भी इसमें शामिल रहेंगे।
केवल दो पद सभापति और सचिव चुनाव के अनुसार बदलते रहेंगे। ऐसे में निर्माण कार्यों को लेकर किसी तरह की आशंका निराधार है।
एक ही व्यक्ति बार-बार पद पर क्यों?
छाबड़ा ने पत्र में यह भी लिखा कि जब कोई व्यक्ति दो या चार साल के बाद फिर उसी पद पर आने की कोशिश करता है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि अपने व्यावसायिक दायित्वों के बीच वह बार-बार वही जिम्मेदारी क्यों लेना चाहता है।
ऐसी स्थिति में अनावश्यक शंकाएं और चर्चाएं जन्म लेती हैं, जो संस्था की गरिमा के लिए उचित नहीं हैं।
गोरानी ने आरोपों को बताया भ्रामक
वहीं वर्तमान सचिव संजय गोरानी ने छाबड़ा के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि कुछ सदस्य जानबूझकर क्लब के सदस्यों में भ्रम फैला रहे हैं कि मैनेजिंग कमेटी संविधान बदलने के लिए अभियान चला रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मैनेजिंग कमेटी ने अपनी किसी बैठक में इस नियम को हटाने का प्रस्ताव न तो रखा है और न ही उस पर विचार किया है। गोरानी के अनुसार कुछ सदस्य मिलकर Requisition EOGM बुलाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें इस नियम में बदलाव की मांग की जा सकती है।
संविधान के अनुसार 80 सदस्य मिलकर ऐसी बैठक बुलाने का अनुरोध कर सकते हैं और यदि ऐसा पत्र कमेटी को मिलता है तो 15 दिनों के भीतर EOGM बुलाना अनिवार्य होगा।
चार साल के काम भी गिनाए
गोरानी ने अपने जवाबी पत्र में पिछले चार वर्षों में किए गए कामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 में क्लब की डिपॉजिट लगभग 10 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 20 करोड़ रुपये हो गई है।
इसके अलावा 100 नए सदस्य जोड़कर करीब 25 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त की गई है, जिससे क्लब के विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी कर्तव्यनिष्ठ कमेटी पर यह आरोप लगाना कि सदस्य किसी छिपी मंशा से दोबारा पद पर आना चाहते हैं, निंदनीय है।
गोरानी ने यह भी याद दिलाया कि कोविड काल के दौरान आरोप लगाने वाले ही बिना EOGM बुलाए अपना कार्यकाल दो वर्षों के लिए बढ़ा चुके थे।
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