पुलिस की जवाबदेही का डेडलाइन-डे कमिश्नर, एडीसीपी, टीआई तलब: ‘30 घंटे बेगुनाह को हिरासत’ की आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चंदननगर थाने में एक युवक को बिना जुर्म बताए 30 घंटे हिरासत में रखने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठे, लेकिन इस प्रकरण ने इंदौर पुलिस की कार्रवाई पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई है। पिछली सुनवाई में बेहद कड़े शब्दों में नाराजगी जताते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर, एडीसीपी दिशाेश अग्रवाल और चंदननगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को पार्टी बनाकर तलब किया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि मामला अत्यंत गंभीर है और यदि कोई निर्दोष है तो उसके साथ किए गए हर गैरकानूनी कदम की जवाबदेही तय होगी।
मामले से जुड़े अधिवक्ता गगन बजाड़ के अनुसार इंदौर निवासी अनवर हुसैन पर चंदननगर पुलिस ने कालाबाजारी का केस दर्ज किया था। जमानत याचिका जिला न्यायालय और उसके बाद हाई कोर्ट से खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सरकार की ओर से पेश शपथपत्र में बताया गया कि हुसैन पर आठ गंभीर अपराध दर्ज हैं, लेकिन हुसैन के वकीलों का कहना है कि आठ में से चार प्रकरणों में तो उनका नाम ही नहीं है।
पुलिस ने गलत जानकारी देकर अदालत को गुमराह किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चंदननगर टीआई इंद्रमणि पटेल और एडीसीपी दिषेश अग्रवाल से सीधे जवाब मांगा, साथ ही इंदौर पुलिस कमिश्नर को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होने का आदेश दिया।
जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई तय, सबकी नजर अदालत पर
थाने में निर्दोषों के साथ बुरा व्यवहार, इंटरवीनर ने उठाया मुद्दा: इस सुनवाई के दौरान अधिवक्ता असद अली वारसी ने इंटरवीनर के रूप में आवेदन देकर एक और बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चंदननगर थाने में निर्दोष लोगों के साथ गलत व्यवहार किया जाता है। मेरे साथ भी टीआई ने शराब पीकर गाड़ी चलाने का झूठा मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस शिकायत को गंभीर मानते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी है, जिससे पुलिस प्रशासन मनमानी न कर सके।
हाई कोर्ट भी सख्त: हथकड़ी क्यों लगाई?, बेड़ियां भी लगा देते: इस मामले की सुनवाई दूसरी ओर हाईकोर्ट में भी चल रही है। यहां बगैर अपराध बताए युवक को रातभर थाने में रखने, हथकड़ी लगाने और अपमानित करने के मामले में सुनवाई चल रही है।
पीड़ित पक्ष ने 28 नवंबर को सुनवाई के दौरान पुलिस की हरकतों के वीडियो फुटेज कोर्ट में पेश किए। यह वीडियो फुटेज कोर्ट में जैसे ही चलाए गए सख्त तेवर दिखाकर न्यायमूर्ति ने टीआई इंद्रमणि पटेल को फटकारते हुए कहा कि हथकड़ी क्यों लगाई?
चाहो तो बेड़िया ही लगा देते। इस तरह का व्यवहार किसी भी सिविलाइज्ड सिस्टम का हिस्सा नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर के खिलाफ विभागीय और आपराधिक जांच दोनों के आदेश दिए और आज इस जांच की रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।
अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने का आवेदन लगाया: इस पूरे विवाद के बीच एक और मोड़ तब आया जब एक अन्य अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने का आवेदन लगा दिया। मामला एक रियल एस्टेट कारोबारी के परिचित पर नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप से शुरू हुआ था। यह व्यक्ति 12 नवंबर को दर्ज हुए केस में फरार था।
26 नवंबर को पुलिस ने उसके बेटे को उठाया, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि युवक को बिना अपराध बताए हथकड़ी लगाई, अपमानित किया और थाने में 30 घंटे रखा।
पीड़ित पक्ष ने फुटेज भी पेश किए, जिसमें स्पष्ट दिख रहा था कि युवक को आधी रात में हथकड़ी में लाया-ले जाया जा रहा था। इसी दौरान एक नया आवेदन लगा, जिसमें कहा गया कि याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय हाई कोर्ट ही करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई अहम: आज की सुनवाई कई कारणों से ऐतिहासिक मानी जा रही है। यह मामला पुलिस हिरासत और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है। पुलिस कमिश्नर सहित बड़े अधिकारियों को कोर्ट ने तलब किया है। पुलिस द्वारा कोर्ट में गलत तथ्य रखने का आरोप भी गंभीर है।
थाने में आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें पहली बार सीधे सुप्रीम कोर्ट में सुनी जा रही हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट आज सख्त आदेश देता है तो यह केस पूरे देश की पुलिसिंग व्यवस्था के लिए मिसाल बन सकता है। युवक और उसके परिवार का कहना है कि उसे किसी अपराध की जानकारी दिए बिना घर से उठा लिया गया।
पुलिस की दलीलें सवालों के घेरे में: चंदन नगर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि युवक पूछताछ के लिए लिया गया था। केस गंभीर था, जांच के तहत कार्रवाई की गई, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यदि गंभीर अपराध था तो एफआईआर में उसका नाम क्यों नहीं था और पूछताछ के नाम पर 30 घंटे हिरासत में क्यों रखा।
एडीसीपी और टीआई का जवाब आज सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा। चंदननगर थाने में हिरासत विवाद अब सिर्फ इंदौर का मामला नहीं रहा, यह पूरे देश की पुलिसिंग व्यवस्था, आम नागरिकों के अधिकार और कानून की सर्वोच्चता का विषय बन गया है।
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