खबर
Top News

अमानक बॉडी और एल्यूमिनियम संरचना से जिंदा जल गए यात्री: स्लीपर कोच बसों पर गडकरी का बड़ा कबूलनामा

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 जनवरी 2026, 12:51 अपराह्न
376 views
शेयर करें:
अमानक बॉडी और एल्यूमिनियम संरचना से जिंदा जल गए यात्री

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश में स्लीपर कोच बसों से हो रही भीषण दुर्घटनाओं और जिंदा जलकर मौतों के मामलों में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के बयान से बड़ा खुलासा हुआ है। एक मीडिया कार्यक्रम में गडकरी ने स्वीकार किया कि अमानक एल्यूमिनियम बॉडी और गलत डिजाइन के कारण यात्री बसों में फंस जाते हैं और आग लगने की स्थिति में बाहर नहीं निकल पाते। उन्होंने इसे अपनी भी गलती मानते हुए कहा कि अब इस पर सख्त कदम उठाए जा चुके हैं।

मीडिया कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि स्लीपर कोच बसों की बॉडी एल्यूमिनियम की और अमानक होने के कारण आग लगने पर लोग अंदर फंस जाते हैं और जलकर मर जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब नया बस बॉडी कोड लाया गया है, जिसमें कांच के पास प्लास्टिक का हथौड़ा होगा ताकि आपात स्थिति में कांच तुरंत तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला जा सके।

बस बॉडी बिल्डरों की मनमानी पर सरकार की नाकामी
गडकरी ने बताया कि पंजाब, लुधियाना और इंदौर जैसे शहरों में बस बॉडी बिल्डर हथौड़ा लेकर निर्माण में भिड़ जाते हैं। वह लगातार उनसे सुधार करने को कहते रहे, लेकिन वे केवल लिखित आश्वासन देते थे और मानकों का पालन नहीं करते थे।

उन्होंने कहा कि मैं उनके प्रति सहानुभूति रखता था और कहता था कि स्टैंडर्ड मेंटेन करो, लेकिन वे नहीं करते थे। आखिरकार अब हमने तय कर लिया है कि अलग से बस बॉडी बनेगी ही नहीं।

अब केवल ओईएम ही बनाएंगे बस बॉडी
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब बस की बॉडी वही कंपनी बनाएगी जो चेसिस तैयार करेगी। टाटा, अशोक लिलैंड सहित निजी क्षेत्र की 3–4 प्रतिष्ठित कंपनियां इस व्यवस्था में शामिल होंगी। सभी की क्वालिटी समान होगी और आईआईटी की इंस्पेक्शन कमेटी द्वारा पूरी जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी।

पंजीयन ही अवैध
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्य परिवहन विधिक विशेषज्ञ सूरज प्रकाश अग्रवाल ने बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा स्लीपर कोच बस अवैधानिक है और उसका रजिस्ट्रेशन ही नहीं हो सकता। बावजूद 25 वर्षों से सरकार और शासन आंखें मूंदे बैठे रहे।

बीमा और फाइनेंस कंपनियों पर भी गंभीर आरोप
एडवोकेट अग्रवाल ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां अधिक प्रीमियम और फाइनेंस कंपनियां ब्याज के लालच में बिना कानून का सत्यापन किए ऐसी बसों के पंजीयन का रास्ता आसान करती रहीं। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाएं एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रहीं, जबकि जनता किराया देकर अपनी जान गंवाती रही।

यह भूल नहीं, सुनियोजित लापरवाही
अग्रवाल ने दो टूक कहा कि वह 10–12 वर्षों से मीडिया और कानून के माध्यम से सरकार को इस खतरे से आगाह करते आ रहे हैं। अब इसे अनजाने में हुई गलती कहना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कोई भी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!