दो दिन में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के दिए आदेश: शहर के बीच मेट्रो पर हाईकोर्ट सख्त
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । शहर के बीच मेट्रो ट्रेन शुरू करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। तय समय पर भी शासन की ओर से जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के बीच मेट्रो ट्रेन शुरू करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। तय समय पर भी शासन की ओर से जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और दो दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता समाजसेवी किशोर कोडवानी स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहे और अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि मेट्रो का प्रस्ताव और प्रेजेंटेशन जिला योजना समिति में ही अटका हुआ है। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन सहित सभी मुद्दे प्रमुख सचिव के समक्ष रखे जाएं और वहीं निर्णय लिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
शासन की ओर से सरकारी एडवोकेट भुवन गौतम ने पक्ष रखा। कोर्ट को बताया कि मेट्रो की ओर से रिपोर्ट पेश की जानी थी, लेकिन अब तक नहीं की गई। इस पर याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी ने कहा, हम मेट्रो के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मेट्रो का स्वरूप क्या होगा, कैसे बनेगी, सर्वे में क्या-क्या विसंगतियां हैं, इस पर कोई भी अधिकृत रूप से बताने को तैयार नहीं है।
कोडवानी ने यह भी कहा कि भूमिगत मेट्रो से शहर की हेरिटेज इमारतों को नुकसान पहुंचेगा, भूगर्भीय संरचना प्रभावित होगी और कई नई समस्याएं खड़ी होंगी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की मांगों और मुद्दों सहित अभ्यावेदन प्रमुख सचिव को भेजा जाए।
ऐतिहासिक स्थलों पर खतरे की आशंका
याचिकाकर्ता का कहना है कि बंगाली चौराहे से एयरपोर्ट तक मेट्रो चलाने की योजना से शहर की पहचान प्रभावित होगी। हाईकोर्ट, रानी सराय, राजबाड़ा जैसे ऐतिहासिक स्थल खुदाई से खतरे में आ सकते हैं। इसके लिए पुरातत्व विभाग से भी अनुमति नहीं ली गई है और जिला योजना समिति में भी इस प्रोजेक्ट को कभी सहमति के लिए नहीं रखा गया।
अंडरग्राउंड मेट्रो पर बढ़ेगा खर्च
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेट्रो के दूसरे चरण में खजराना रोड से अंडरग्राउंड संचालन की घोषणा की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मेट्रो अंडरग्राउंड हो या एलिवेटेड, दोनों ही स्थितियों में शहर और व्यापारियों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा शहर में पहले से हरियाली का संकट है। मेट्रो के लिए हजारों पेड़ काटे जाएंगे। रीगल तिराहे के पेड़ों पर हजारों तोते रहते हैं, खुदाई शुरू होते ही सबसे पहले यही पेड़ खत्म होंगे।
11 महीने से जवाब नहीं, कोर्ट ने आखिरी मौका दिया
पिछली सुनवाइयों में भी शासन की ओर से कोई जवाब पेश नहीं किया गया था। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति लेते हुए कहा 11 महीने से शासन जवाब नहीं दे रहा, ऐसे में इस प्रोजेक्ट पर स्टे लगाया जाए। हाईकोर्ट ने शासन को अंतिम अवसर देते हुए पहले 18 दिसंबर की तारीख तय की थी, लेकिन उस दिन भी जवाब नहीं आया। मामले की सुनवाई प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ कर रही है। पिछली सुनवाई में मेट्रो के वकील भी उपस्थित नहीं थे।
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