ऑपरेशन क्लीन: फिर दो पुलिसकर्मियों पर गिरी कार्रवाई की गाज; एएसआई को बनाया सिपाही, हेड कांस्टेबल की एक वेतनवृद्धि रोकी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । भ्रष्टाचार, लापरवाही और संदिग्ध आचरण से विभाग की छवि खराब करने वाले पुलिसकर्मियों पर कमिश्नर की ऑपरेशन क्लीन मुहिम के तहत कार्रवाई जारी है। इसके तहत एक एएसआई को पदावनत करते हुए
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भ्रष्टाचार, लापरवाही और संदिग्ध आचरण से विभाग की छवि खराब करने वाले पुलिसकर्मियों पर कमिश्नर की ऑपरेशन क्लीन मुहिम के तहत कार्रवाई जारी है। इसके तहत एक एएसआई को पदावनत करते हुए सिपाही बना दिया गया, वहीं एक हेड कांस्टेबल की एक वेतनवृद्धि रोकी गई।
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (मुख्यालय) आरके सिंह के अनुसार एएसआई सुभाष वर्मा (गार्ड प्रभारी) का डिमोशन कर उन्हें कांस्टेबल बनाया है। उन्हें एक साथ दो रैंक नीचे किया गया। ये ऐसी पहली सजा है। वहीं हेड कांस्टेबल मनोज सिसोदिया की एक वेतनवृद्धि रोकी गई। करीब सालभर पहले कांस्टेबल मुकेश लोधी द्वारा की गई खुदकुशी के मामले में लापरवाही सामने आने पर उक्त कार्रवाई की गई।
ये था पूरा मामला
आरक्षक मुकेश लोधी ने 22 दिसंबर 2024 को सपना-संगीता स्थित यूनियन बैंक के गार्ड रूम में फांसी लगा ली थी। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने एडिशनल डीसीपी (मुख्यालय) सीमा अलावा को जांच सौंपी थी। जांच में खुलासा हुआ कि एएसआई सुभाषचंद्र वर्मा गार्ड प्रभारी थे।
उन्होंने हेड कांस्टेबल मनोज सिसोदिया, कांस्टेबल रवि पांडे, उमराव चौहान और मुकेश लोधी को ड्यूटी पर रवाना किया था। 21 दिसंबर को रवि पांडे ने सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक, मनोज सिसोदिया ने 2 से रात 8 बजे तक ड्यूटी की। मुकेश लोधी रात 8 बजे पहुंचा।
अगली सुबह आरक्षक रवि पहुंचा तो मुकेश फंदे पर लटका मिला। जब हेड कांस्टेबल मनोज सिसोदिया के बयान हुए तो उसने कहा कि आरक्षक उमराव तबीयत खराब होने का बोलकर घर चला गया था, जिसके बाद एएसआई सुभाष वर्मा ने उसकी ड्यूटी बदल दी थी।
अब तक दो टीआई सहित एक दर्जन पुलिसकर्मी दंडित
ऑपरेशन क्लीन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह विजय नगर टीआई रहे रवींद्र गुर्जर को 3 साल के लिए एसआई, एमआईजी टीआई अजय वर्मा को 5 साल के लिए एसआई बनाकर डिमोशन कर चुके हैं। टीआई हाकमसिंह पंवार की खुदकुशी मामले में अक्टूबर 2025 में एएसआई रंजना बघेल को, घूसखोरी कर लोडिंग चालक से 50 रुपए मांगने वाले ट्रैफिक एएसआई कमलसिंह डाबर को, राजवाड़ा पर नो एंट्री में घुसे मिनी ट्रक के चालक से ऑनलाइन रिश्वत लेने वाले ट्रैफिक एएसआई रामअवतार दीक्षित को, बिना सूचना दिए 376 दिन तक गैर हाजिर रहने वाले एएसआई विकास रघुवंशी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
वहीं भ्रष्टाचार के जिस मामले में टीआई अजय वर्मा को एसआई बनाया गया, उसी मामले में विवादित एएसआई धीरज शर्मा को भी डिमोट कर 5 साल के लिए कांस्टेबल बना दिया गया। इसके बाद नवंबर 2025 में शिवपुरी में हुई अजय तोमर की हत्या में षड्यंत्रकारी के रूप में भूमिका सामने आने पर उसके एएसआई भाई भानुप्रतापसिंह तोमर (डीसीपी मुख्यालय कार्यालय इंदौर में पदस्थ था।) को बर्खास्त किया जा चुका है।
टीआई इंद्रमणि पटेल पर मेहरबानी क्यों?
विभाग की छवि खराब करने वाले पुलिसकर्मियों पर लगातार हो रही कार्रवाई से जहां महकमे में भय का माहौल है, वहीं प्रदेश ही नहीं देशभर में पुलिस की छवि खराब करने वाले चंदन नगर थाने के टीआई इंद्रमणि पटेल पर कार्रवाई नहीं होने के चलते कहा जा रहा है कि पुलिस कमिश्नर का ऑपरेशन क्लीनÓ पूरी तरह क्लीन नहीं है।
विवादित टीआई इंद्रमणि पटेल ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में विभाग की छवि खराब की है। उन पर ठोस कार्रवाई तो दूर फटकार तक नहीं लगाई गई, जबकि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बगैर अपराध इंजीनियर छात्र को 30 घंटे थाने में बैठाने के मामले में लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से जवाब मांगा था कि टीआई इंद्रमणि पटेल पर क्या विभागीय कार्रवाई हुई, बताएं।
हालांकि मामले में हाई कोर्ट से टीआई पटेल को राहत मिल गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक और पॉकेट गवाह की याचिका लंबित है, जिसे लेकर पटेल पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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