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इंदौर में नियमों का खुला कत्ल, अफसर मौन: सरकारी जमीन पर अवैध साम्राज्य; शिकायतें, दस्तावेज और खतरे सब सामने, फिर भी नाले पर खड़ी हो रही इमारत

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 जनवरी 2026, 12:00 अपराह्न
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इंदौर में नियमों का खुला कत्ल, अफसर मौन

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सरकारी जमीन हड़पने और अवैध निर्माण के खुलासों के बावजूद अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। शिकायतें की जा रही हैं, दस्तावेज सामने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ टालमटोल हो रही है।

इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरा खेल साठगांठ और राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है, जहां नियमों को ताक में रखकर भू-माफिया बेखौफ निर्माण कर रहे और आम जनता इसकी कीमत चुका रही है।

इंदौर में ऐसे अनेक प्रकरणों का खुलासा हो चुका है, जिनमें शिकायतकर्ता वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे, लेकिन विवादित भूमि पर निर्माण पहले पूरा हो जाता है और बाद में फाइलों पर धूल जम जाती है।

भोले-भाले लोग भू-माफियाओं के जाल में फंस चुके हैं, जहां मोटे लेन-देन के दम पर सरकारी जमीन निजी संपत्ति में तब्दील कर दी जाती है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन सरकारी एजेंसियों को भ्रष्टाचार पकड़ना और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे भी मौन साधे बैठी हैं। पूछने पर रटा-रटाया जवाब दिया जाता है- शिकायत नहीं मिली, जबकि कानून अधिकारियों को स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार देता है, जिसे जानबूझकर भुला दिया गया है।

नगर निगम में बीते वर्षों में बड़े-बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे हो चुके हैं। भागीरथपुरा इसका बड़ा उदाहरण है, लेकिन न तो सबक लिया गया और न ही सिस्टम सुधरा। जनप्रतिनिधियों को जनता सिर्फ चुनाव के वक्त याद आती है, सत्ता में आते ही पूरा ध्यान कमीशनखोरी पर केंद्रित हो जाता है। जनता परेशान हो तो हो। यह सोच अब आम होती जा रही है।

नाले पर बन रही अवैध इमारत, भविष्य में बड़े हादसे की आशंका... मौजूदा मामला भविष्य में बड़ी दुर्घटना को न्योता देता नजर आ रहा है। जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह नाले से सटी हुई है। बारिश के मौसम में जलभराव के कारण नींव धंसने की गंभीर आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एनजीटी नियमों के अनुसार नाले के 30 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यह अवैध बिल्डिंग कैसे खड़ी हो रही है, यह बड़ा सवाल है।

पूर्व कलेक्टर द्वारा पूर्व में ऐसी ही कार्रवाई की जा चुकी है, फिर यह अवैध निर्माण कैसे छूट गया? नगर निगम के जोनल अधिकारी और बिल्डिंग अधिकारी द्वारा जानकारी छिपाए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

जमीन विवरण और नामांतरण पर सवाल... यह भूमि तहसील राऊ, जिला इंदौर के अंतर्गत खसरा नंबर 1397/मिन-1, रकबा 0.202 हेक्टेयर है। भूमि स्वामी के रूप में मेसर्स राघव एसोसिएट्स भागीदारी फर्म 519 नर्सिंग वार्ड जबलपुर तर्फे शकुंतलाबाई पति कन्हैयालाल बड़े, अनिल पिता एसकेडी सोनी, मनीष, मनोज पिता केडी सोनी, धर्मेंद्र पिता केएल बड़े के नाम दर्ज हैं।

2019 में हक त्याग-पत्र के आधार पर तहसीलदार द्वारा नामांतरण स्वीकार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि जो जमीन पूर्व में नदी और वर्तमान में नाले से लगी है, जिसे मलबा डालकर पाटा गया, क्या उस पर नामांतरण वैधानिक था?

टीएनसीपी ने किस आधार पर स्वीकृति दी? निगम के बीओ और बीआई ने निर्माण रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की? इस अवैध निर्माण के कारण आसपास की कॉलोनियों के रास्ते तक बंद हो चुके हैं, जिससे रहवासियों को भारी परेशानी झेलना पड़ रही है।

बुकिंग चालू, बैंक लोन का भी दावा!... इंदर मोटवानी के अनुसार 2 बीएचके (1020 वर्गफीट) की कीमत लगभग 55 लाख रुपए, 3 बीएचके (1140 वर्गफीट) के फ्लैट्स भी हैं, 5 हजार 5 सौ रुपए वर्गफीट के अनुसार रेट है, बिल्डिंग के लगभग सभी फ्लोर पर बुकिंग हो चुकी है।

हैरानी की बात यह है कि नाले के पास सरकारी जमीन पर निर्माण के सवाल पर दावा किया जा रहा है कि सभी विभागों से मंजूरी है और बैंक से लोन भी पास हो जाएगा। यह दावा सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।

राजनीतिक कनेक्शन और चुप्पी...बताया जा रहा है कि शकुंतला बड़े कांग्रेस की पूर्व पार्षद रह चुकी हैं। ऐसे में राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी गहराती जा रही है। निगम को शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक निर्माण हटाया नहीं गया, यह सीधे-सीधे मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

अधिकारी बोले- जांच होगी... इस पूरे मामले पर जोन हरसिद्धि के भवन अधिकारी वैभव देवलासे ने जांच कर नियम अनुसार कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना यह है कि यह बयान सिर्फ कागजों तक सीमित रहता है या वाकई अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलता है।

आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि अगर जनता खुद आवाज नहीं उठाएगी, तो बेलगाम भ्रष्टाचार पर नकेल कसना मुश्किल है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन जागेगा या एक और अवैध इमारत को हादसे का सबब बनने का इंतजार करेगा?

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