निगम की अनुमति में कानून की खुली अवहेलना: बड़ा सराफा में एफएआर से दान की जमीन तक अवैध निर्माण का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

1.50 की अनुमति, 1.79 पर निर्माण कैसे? प्लॉट जोड़, संरक्षण और भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे के पीछे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के सबसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्र बड़ा सराफा बाजार में निगम द्वारा दी गई भवन पुनर्निर्माण (री-रेक्ट) अनुमति से कानून, नियम और प्रशासनिक जवाबदेही का खुलासा हुआ है।
निगम के ही आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि जहां अनुमेय एफएआर 1.50 निर्धारित है, वहीं उपभोग एफएआर 1.79 दर्ज किया गया है। यह न सिर्फ मप्र भू-विकास नियम, 2012, बल्कि नगर निगम अधि. व भारतीय भवन संहिता की सीधी अवहेलना है।
इतना ही नहीं, दान की गई जमीन पर बहुमंजिला व्यावसायिक निर्माण, प्लॉटों का संयुक्तिकरण और कथित राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण ने इस पूरे मामले को एक बड़े एफएआर और अवैध निर्माण घोटाले का रूप दे दिया है।
कुल प्लॉट क्षेत्रफल 247.41 वर्गमीटर
शुद्ध प्लॉट क्षेत्र 213.99 वर्गमीटर {अनुमेय एफएआर 1.50
उपभोग एफएआर 1.79 { अनुमेय कुल निर्माण क्षेत्र 487.05 वर्गमीटर { प्रस्तावित/दर्शाया गया निर्माण क्षेत्र 383.09 वर्गमीटर
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से ओवर-डेवलपमेंट का मामला है, जिसे न तो नियमित किया जा सकता है और न ही नजरअंदाज।
इन कानूनों की उड़ाई धज्जियां
मध्य प्रदेश भू-विकास नियम, 2012 { नियम 7 व 12 एफएआर, ग्राउंड कवरेज व सेटबैक से अधिक निर्माण प्रतिबंधित { नियम 23 अनुमेय एफएआर से अधिक निर्माण अवैध विकास {मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 {धारा 292 व 293 स्वीकृति के विपरीत निर्माण दंडनीय {धारा 307 नियम विरुद्ध निर्माण पर आयुक्त को तत्काल कार्रवाई का अधिकार।
ग्राउंड से थर्ड फ्लोर तक दुकानें ही दुकानें
नक्शों के अनुसार {ग्राउंड फ्लोर पर 131.33 वर्गमीटर पूर्ण व्यावसायिक उपयोग { फर्स्ट, सेकंड और थर्ड फ्लोर पर लगातार दुकानें { टेरेस को नॉन एफएआर बताया गया, लेकिन वास्तविक उपयोग संदिग्ध { ग्राउंड फ्लोर में 60 और 80 फीट चौड़े पैसेज, लिफ्ट और सीढ़ियों के बीच दुकानों का घनत्व इस ओर इशारा करता है कि अधिकतम मुनाफे के लिए डिजाइन में हेरफेर किया गया।
नक्शा कुछ, हकीकत कुछ और
विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में कम मंजिल का नक्शा दिखाकर वास्तविकता में अधिक तल का निर्माण कर दुकानों की बिक्री कर दी जाती है। बड़ा सराफा जैसे संकरे बाजार में यह स्थिति आग, भगदड़, संरचनात्मक कमजोरी और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद खतरनाक है, जो भारतीय भवन संहिता (एनबीसी) की भावना के खिलाफ है।
दान की जमीन पर बहुमंजिला इमारत, प्लॉट जोड़ कैसे?: 44, बड़ा सराफा के मामले में जगदीश मंदिर को दान में मिली जमीन पर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत बनाए जाने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि यह जमीन पुजारी परिवार द्वारा लगभग 40 करोड़ रुपए में बेची गई, जिसके बाद प्रभावशाली बिल्डरों ने कथित रसूख के दम पर नियमों को दरकिनार कर निर्माण शुरू कर दिया।
नियमों के अनुसार दान की गई भूमि न बेची जा सकती है और न ही उस पर व्यावसायिक बहुमंजिला निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। फिर भी प्लॉटों को जोड़कर निर्माण किए जाने का आरोप है।
बीओ-बीआई की मिलीभगत का आरोप: सूत्रों का दावा है कि यह केवल मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही नहीं, बल्कि भवन अनुमति शाखा, अतिक्रमण दस्ता, जोन कार्यालय और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत का नतीजा है। प्रोटेक्शन मनी के चलते कई अवैध निर्माण पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ निर्माणाधीन हैं।
कठोर कार्रवाई की मांग: नागरिक संगठनों और व्यापारियों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो। जिम्मेदार अधिकारियों पर धारा 292/293 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। नियम विरुद्ध निर्माण पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण प्रक्रिया शुरू हो।
अब सवाल यह है नगर निगम कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगा या यह मामला भी अन्य विवादित निर्माणों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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