मान्यता प्राप्त कंपनियां ही कर सकेंगी स्लीपर बस की बॉडी का निर्माण: नए सुरक्षा नियमों से बस ऑपरेटरों में मचा हड़कंप
KHULASA FIRST
संवाददाता

स्लीपर बसों पर सख्ती
AIS-052 व AIS-115 लागू, स्थानीय बॉडी बिल्डरों पर रोक, बस मालिकों को नोटिस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 से स्लीपर बसों के संचालन को लेकर सख्त सुरक्षा नियम लागू कर दिए हैं। बस बॉडी कोड AIS-052 एवं AIS-115 के तहत अब स्लीपर कोच का निर्माण स्थानीय मैकेनिक या अनधिकृत बॉडी बिल्डरों द्वारा नहीं किया जा सकेगा। केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही स्लीपर बस बॉडी का निर्माण कर सकेंगी। नए नियमों के लागू होते ही देशभर के स्लीपर बस ऑपरेटरों में असंतोष और भय का माहौल बन गया है।
नए नियमों के अनुसार सभी स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन व अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास द्वार (हथौड़े सहित), 10 किलो का ग्रीन जोन अग्निशमन यंत्र, ड्राइवर के लिए नींद पहचानने वाली तकनीक, आपातकालीन दरवाजे और आधुनिक वायरिंग मानक अनिवार्य कर दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों को ब्लैकलिस्ट कर उनके परमिट रद्द किए जा रहे हैं।
इंदौर में 489 स्लीपर बस मालिकों को नोटिस
परिवहन विभाग ने इंदौर में टूरिस्ट और तीर्थ यात्राओं में संचालित 489 स्लीपर कोच बसों के मालिकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। वहीं कई क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों ने नॉन-एसी स्लीपर बसों का संचालन बंद करना भी शुरू कर दिया है।
बस मालिकों का सवाल: गलती हमारी या सिस्टम की?
बस ऑपरेटरों का कहना है कि उन्होंने केवल चेसिस खरीदा था, जिस पर आरटीओ से अधिकृत बॉडी बिल्डर ने बस बनाई, निर्माण के दौरान आरटीओ द्वारा निरीक्षण हुआ, बॉडी बिल्डर ने कंप्लीट सर्टिफिकेशन दिया, आरटीओ से फिटनेस, रजिस्ट्रेशन हुआ, इंश्योरेंस कंपनियों ने बीमा पास किया।
इसके बाद ही बसों को संचालन की अनुमति दी गई। बस मालिकों का आरोप है कि यदि अब इन बसों को अवैध बताया जा रहा है तो यह परिवहन विभाग, बॉडी बिल्डर और सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। नुकसान अब उन छोटे व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी एक बस की कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक है।
छोटे व्यापारियों पर सीधा संकट
बस संचालकों का कहना है कि एक स्लीपर बस से करीब 25 परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी होती है। कोरोना के बाद जैसे-तैसे हालात सुधरे थे, लेकिन नए नियमों से छोटे बस मालिकों के सामने बेरोजगारी और कर्ज में डूबने का खतरा खड़ा हो गया है।
संघ की प्रमुख मांगें
पहले से पंजीकृत 2×2 स्लीपर बसों को नए नियमों से राहत।
स्पष्ट लिखित गाइडलाइन जारी होने तक चालानी कार्रवाई पर रोक।
तीर्थ यात्री बसों को लंबी दूरी की व्यावसायिक बसों की श्रेणी में न रखा जाए।
बस ऑपरेटरों से संवाद कर व्यावहारिक निर्णय।
चारधाम यात्रा के बहिष्कार की चेतावनी
मध्यप्रदेश तीर्थ यात्रा बस ऑनर्स एवं एजेंट संघ की बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया तो चारधाम, बद्रीनाथ, गंगासागर यात्रा नहीं होगी, देशभर में बसों के चक्के जाम किए जाएंगे, सामूहिक आंदोलन और ज्ञापन दिए जाएंगे।
2×2 स्लीपर बसों पर नियमों का विरोध
तीर्थ यात्रा से जुड़े बस ऑपरेटरों और एजेंटों ने खास तौर पर 2×2 स्लीपर बसों को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि—हालिया हादसे 2×1 स्लीपर बसों में हुए हैं, इसके बावजूद 2×2 बसों पर भी वही नियम थोपे जा रहे हैं, 2×2 बसें साल में सिर्फ 1–2 सीजन तीर्थ यात्राओं में चलती हैं। इन पर नियम लागू होने से यात्रियों की क्षमता घटेगी, किराया बढ़ेगा और तीर्थ यात्रा आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएगी।
सरकार नहीं मानी तो आंदोलन तय
बस ऑपरेटरों का साफ कहना है कि यदि सरकार ने नियमों में बदलाव नहीं किया, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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