बंद कंपनियों के पुराने वाहन चलन से बाहर, लोग परेशान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश में हर वाहन पर अनिवार्य की जा चुकी एचएसआरपी यानी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट उन पुराने वाहनों पर नहीं लग पा रही, जिनकी कंपनियां बंद हो चुकी हैं। फिटनेस प्रक्रिया बंद होने से सैकड़ों वाहन खड़े हो गए हैं, लेकिन उनकी बैंक लोन की किस्तें चल रही हैं। इससे वाहन मालिक बुरी तरह परेशान हैं।
इंदौर में ही ऐसे 12 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। समस्या प्रदेशभर में बताई जा रही है। एक कंपनी के पास 2017 में खरीदे गए 15 डंपर हैं। शुरुआती दो साल फिटनेस मिली, फिर हर साल रिन्युअल होता रहा। इस साल कंपनी के लोग फिटनेस के लिए परिवहन विभाग पहुंचे तो कहा गया पहले एचएसआरपी लगवाइए, तभी फीस जमा होगी।
एचएसआरपी के लिए आवेदन किया तो प्रक्रिया वहीं अटक गई, क्योंकि वाहन निर्माता कंपनी बंद हो चुकी है। अब न एचएसआरपी लग पा रही है, न ही फिटनेस हो पा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे कई वाहन मालिक रोज आ रहे हैं। लोगों का कहना है फिटनेस नहीं होने से उनके कमर्शियल वाहन खड़े हैं।
एक व्यक्ति के दो कमर्शियल वाहन खड़े हैं लेकिन किस्तें भरना पड़ रही हैं, फिटनेस नहीं होने से वाहन नहीं चला पा रहे। अधिकारी भी परेशान हैं, क्योंकि समस्या प्रदेशभर की है। अधिकारियों ने मुख्यालय भी बात की, लेकिन निराकरण नहीं हुआ। ऐसे वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है।
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं लग रही
कई लोगों ने कंपनी की जगह दूसरों से एचएसआरपी लगवा ली। हालांकि इसे मान्य नहीं किया जा रहा। कहा जा रहा है अथॉरोइज्ड डीलर से ही लगवाएं। वाहन के ट्रांसफर, रिन्युअल व अन्य कामकाज भी 15 से 20 दिन लेट हो रहे हैं, क्योंकि पहले एचएसआरपी लगवाना होती है। इसमें सात से दस दिन लग रहे हैं। वाहनों के ट्रांसफर में देरी से क्रेता-विक्रेता शपथ-पत्र बनवाकर वाहन की डिलीवरी कर रहे हैं।
इसलिए हो रही दिक्कतें
1 अप्रैल 2019 से वाहनों पर एचएसआरपी अनिवार्य कर दी गई। इसके बाद के वाहनों पर तो लगकर आ रही। पुराने वाहनों पर एचएसआरपी लगाने के लिए अभियान चलाया गया था। करीब छह महीने पहले यह नियम लागू कर दिया गया कि किसी भी वाहन का ट्रांसफर, रिन्युअल, फिटनेस सहित सारे कामकाज तभी होंगे जब वाहनों पर एचएसआरपी लगी हो।
एचएसआरपी के लिए आवेदन संबंधित कंपनी में ही करना होता है। जिन वाहनों की कंपनियां बंद हो गईं, उनको परेशानी आ रही है। वाहन चालक को आवेदन में संबंधित कंपनी का बताना पड़ता है, उसके नहीं होने पर एचएसआरपी नहीं बन रही है।
मुख्यालय को अवगत कराया...
लगातार ऐसे वाहन चालक और कंपनी से जुड़े लोग आ रहे हैं। जो कंपनियां बंद हो गईं, उनके वाहन पर एचएसआरपी नहीं लग पा रही है। उनको लेकर मुख्यालय बात की है। - अर्चना मिश्रा, एआरटीओ
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