ऐ री सखी मंगल गाओ री: कलियुग में द्वापरयुग को जीयेगा इंदौर
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संवाददाता

श्री गोवर्धननाथ मंदिर, वल्लभकुल परिवार में शुभ यज्ञोपवीत प्रस्ताव
अहिल्या नगरी के उत्सव में देश ही नहीं, दुनियाभर से जुटेगी ‘वल्लभ सृष्टि'
शहर के पश्चिमी हिस्से में त्योहार-सा बना माहौल
14 फरवरी से प्रारंभ उत्सव में 19 फरवरी तक होंगे प्रभु के विभिन्न मनोरथ
18 को गोवर्धननाथ मंदिर से निकलेगी ‘विनेकी', राजवाड़ा तक भव्य तैयारियां शुरू
गृह शांति यज्ञ के साथ शुरू हुए प्रस्ताव से जुड़े कार्यक्रम, दस्तूर गार्डन में होगा मुख्य मनोरथ
भव्य रसिया गान, फूल फाग, शास्त्रीय संगीत व सांस्कृतिक संध्या की होंगी प्रस्तुतियां
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
न जारा द्वापरयुग-सा ही है, जबकि अभी तो शुभारंभ है। जैसे-जैसे दिवस बढ़ते जाएंगे, अहिल्या नगरी की धरा धन्य होती जाएगी। एक साथ अनेकानेक श्री वल्लभकुल-कुटुंब के श्रीचरण जो इंदौर की धरा पर उतरेंगे। वही कुल, जो अखंड भूमंडलाचार्य आचार्य श्री वल्लभाचार्यजी के अलौकिक व दैवीय प्राकट्य से जुड़ा है।
ऐसा कुल-कुटुंब, जो साक्षात परमब्रह्म योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य सेवा, स्वानुभाव व साक्षात्कार से जुड़ा है। ऐसा वल्लभकुल, जिसने प्रभु श्रीकृष्ण के अटूट लाड़ लड़ाए। ये लाड़ 14वीं सदी से आज तक अनवरत ऐसे ही देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘सात पीठ' में एक साथ लड़ाए जा रहे हैं।
ठाकुरजी ने इसी कुल को यह सौभाग्य दिया कि वह जगत-नियंता भी वल्लभकुल बालकों के साथ कुल का ही हिस्सा हो गए। ठीक वैसे ही, जैसे कोई एक परिवार के सदस्य होते हैं। रक्त संबंधी रिश्तों-सा नाता ठाकुरजी, श्रीजी, श्रीनाथजी, श्री गोवर्धननाथजी, श्री विट्ठलनाथजी, श्री गोकुलचंद्रमाजी, श्री गिरिराजधरण प्रभु से वल्लभकुल का है।
भगवान श्रीकृष्ण के ही ये सब स्वरूप हैं और सबके सब वल्लभकुल में समाहित हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर का भी ये परम सौभाग्य है कि अहिल्या नगरी को वल्लभाचार्य परंपरा से जुड़ा परिवार का सान्निध्य व सामीप्य प्राप्त हुआ है। शहर के पश्चिमी हिस्से, यानी पुराने इंदौर का श्री गोवर्धननाथ मंदिर, यानी हवेली इसी अलौकिकता का प्रतीक है। आज ये हवेली उत्सव में निमग्न है और दृश्य द्वापर-सा है।
जी हां, गोवर्धननाथ मंदिर इन दिनों एक ऐसे प्रस्ताव के आनंद में आकंठ डूबा हुआ है, जो यज्ञोपवीत से जुड़ा है। प्रस्ताव का ये सौभाग्य पु.पा.नि. ली. गोस्वामी श्री 108 श्री देवकीनंदनजी महाराज के परिवार में आया है। आप श्री के चिरंजीव पु.पा. गोस्वामी श्री 108 श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के पुत्र गोस्वामी श्री ज्येष्ठात्मज चिरंजीवी प्रियव्रजरायजी बावाश्री का शुभ यग्योपवीत प्रस्ताव है।
साथ में नि.ली. प्रकाश शर्मा एवं दिव्यप्रभा बेटीजी (कांकरोली) के सुपौत्र व अ.सौ. भामिनी बेटीजी एवं नीलाभ शर्मा के सुपुत्र चि. सौहार्द शर्मा का भी यज्ञोपवीत होना तय हुआ है। वल्लभकुल के इस शुभ प्रसंग को नि.ली.गो. श्री विट्ठलेशरायजी महाराज (काकाजी महाराज), गो. श्री रुक्मणी बहुजी महाराज, गो. श्री लक्ष्मी बहुजी का शुभाशीर्वाद प्राप्त है।
इस शुभ प्रस्ताव का आयोजन यूं तो 9 फरवरी से शुरू हो गया है। कल, यानी शनिवार को हवेली प्रांगण में गृह शांति यज्ञ के साथ इस आयोजन का विधिवत शुभारंभ हुआ। मुख्य आयोजन 18 व 19 फरवरी को होगा।
18 को विनेकी (शोभायात्रा) निकलेगी। ये शोभायात्रा मंदिर परिसर से सायं 7 बजे प्रारंभ होकर इंदौर के हृदयस्थल राजवाड़ा तक जाएगी। शुभ यज्ञोपवीत 19 फरवरी को सुबह 9 बजे से दस्तूर गार्डन में शुरू होगा।
श्रीवल्लभकुल आचार्यो की अगवानी में बिछे वैष्णवजनों के पलक पांवड़े- इस शुभ प्रसंग में देशभर से वल्लभाचार्य परिवार से जुड़े वल्लभ आचार्य-बालक-बहु जी व बेटी जी पधार रहें हैं। इसमे नाथद्वारा, कांकरोली, कामवन, कोटा, ब्रजमण्डल, मुंबई से लेकर साथ समंदर पार अमेरिका से सिंगापुर तक से जजमान पधार रहें हैं।
वल्लभ कुल परम्परा के हिसाब से सबकी अगवानी की तैयारी हो रहीं हैं। पश्चिमी इंदौर के दस्तूर गार्डन, रामकृष्ण बाग सहित अन्य गेस्ट हाइस ही नहीं, वैष्णवजनों के आवास पर भी आहार-विश्राम की व्यवस्था की गई हैं। श्रीनाथद्वारा के मुख्य तिलकायत भी इस प्रस्ताव के साक्षी होंगे।
प्रस्ताव को लेकर विभिन्न समितियां दिन रात व्यवस्था में जुटी हुई हैं। मन्दिर परिसर में प्रतिदिन जनसैलाब उमड़ रहा हैं। चिरंजीवी बालको की गोद भराई के लिए लम्बी कतारे लग रहीं हैं। गोद भराई का रविवार अंतिम दिवस होगा। इसके बाद मुख्य उत्सव शुरू हो जाएंगे।
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