अब थाने भी होंगे कटघरे में: कंट्रोल रूम में मातहतों की बैठक में पुलिस कमिश्नर की दो टूक
KHULASA FIRST
संवाददाता

हर जोन से टॉप-2 और फ्लॉप-2 थानों का होगा चयन
इंदौर नगरीय पुलिस कमिश्नरी में ग्रेडिंग सिस्टम लागू
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर पुलिस कमिश्नरी में नए साल के साथ अब सिर्फ अपराधियों की नहीं, थानों की भी परीक्षा शुरू हो गई है। यानि थानों कामकाज भी कसौटी पर कसा जाएगा।
पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कल नगरीय क्षेत्र के सभी पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों की सख्त समीक्षा बैठक लेकर एक नई मूल्यांकन प्रणाली लागू कर दी है।
बैठक में साफ कर दिया है कि अब कुर्सी, ओहदा या बहाना नहीं चलेगा। हर थाने को हर माह अपना कामकाज साबित करना होगा। यह पहला मौका है जब इंदौर पुलिस में हर जोन के डीसीपी और एडीसीपी अपने-अपने जोन के दो सर्वश्रेष्ठ और दो सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले थानों का चयन करेंगे। जो थाने बेहतर काम करेंगे, वे पुरस्कृत होंगे और जो फिसड्डी साबित होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
कल दोपहर को पुलिस कमिश्र संतोष सिंह ने पलासिया चौराहा स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में सभी अफसरों और थाना प्रभारियों की अहम बैठक ली। इसमें पुलिस कमिश्नर ने दो टूक कहा कि फरियादियों की शिकायत चाहे छोटी हो या बड़ी, उसे गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना जाए।
शिकायत पर अपराध दर्ज करने या वैधानिक कार्रवाई में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने टीआई को स्टॉफ की रोजाना समीक्षा और अपराधियों पर सख्त प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
कई अहम बिंदुओं पर होगी थानों की ग्रेडिंग
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने साफ कर दिया कि थानों की ग्रेडिंग महिला संबंधी अपराधों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई, संपत्ति संबंधी अपराधों में रिकवरी और डिटेक्शन, गुम बालक-बालिकाओं की बरामदगी, समयसीमा में अनुसंधान और चार्जशीट, गंभीर और लंबित प्रकरणों का निराकरण, जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई, फॉरेंसिक और आधुनिक तकनीक का उपयोग, समन-वारंट की तामिली, माइनर एक्ट व प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन का समय पर निराकरण, ई-विवेचना, पेट्रोलिंग, आमजन से व्यवहार और फीडबैक तथा सामुदायिक पुलिसिंग जैसे कईअहम बिंदुओं पर होगी।
एसीपी की जबावदेही तय, गिरेगी ग्रेडिंग
पुलिस कमिश्नर ने एसीपी स्तर पर भी जवाबदेही तय कर दी है। कहा कि अपराधियों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के इस्तगासे 48 घंटे के भीतर थानों से प्राप्त किए जाएं और 72 घंटे में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी हो।
बाउंड ओवर या लिस्टेड अपराधियों के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में देरी होने पर संबंधित अधिकारी सीधे जवाबदेह होंगे।
खास बात यह है कि यदि एक ही सर्कल के दोनों थाने कमजोर प्रदर्शन करते हैं, तो उस सर्कल के एसीपी की ग्रेडिंग भी गिरेगी।
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