पहले तीन को दिए नोटिस: अब पसंदीदा की तैनाती का प्लान; निगम अफसर अपना प्रभाव जमाने के लिए राजस्व विभाग में दागी छवि वालों की ताजपोशी में जुटे
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के राजस्व विभाग में कुर्सी की बोली लगने लगी है। जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा, उसे मनपसंद कुर्सी दे दी जाएगी। अफसरों ने अपनी कमाई के लिए निगम में यह खेल शुरू किया है। इससे वर्षों से काम करने वालों को नाकारा बताकर निगमायुक्त के समक्ष उनकी छवि खराब करने और दागी छवि वालों को आगे लाने के प्रयास हो रहे हैं।
इस खेल में अपरोक्ष तौर पर निगमायुक्त को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे पहली बैठक में तीन को नोटिस थमाए गए। वहीं अब होने वाली बैठक में आधा दर्जन एआरओ को हटाकर उनकी जगह पसंदीदा की तैनाती करने की कवायद शुरू हो गई है।
निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते जो अफसर जिस कुर्सी पर बैठा है, उसने अपनी कमाई के लिए वहीं रास्ते बना लिए। ऐसे में राजस्व विभाग के एक अफसर ने तो अपनी कमाई के लिए अधीनस्थ अफसरों की छवि खराब कर उनकी जगह अन्य को बैठाने का ‘अभियान’ छेड़ दिया है।
हालांकि निगमायुक्त इसे सुधार की प्रक्रिया समझ रहे हैं, जबकि हकीकत में यह कमाई का खेल है, जिसमें काम करने वालों को उपेक्षित कर पीछे धकेलने व दागी छवि वालों को आगे लाने का प्रयास है। अफसर ने इस खेल में अपना प्रभाव जमाने के साथ ही जोन पर अपनी पसंद के एआरओ को तैनात करने की प्लानिंग तैयार कर ली है।
इसके लिए बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सभी से वसूली का रिकॉर्ड तलब किया गया। अब निगमायुक्त के समक्ष बैठक में कम वसूली वाले को टारगेट कर हटाने के निर्देश जारी करा दिए जाएंगे और अपना पसंदीदा अफसर बैठा दिया जाएगा।
मनचाही कुर्सी... निगम के पुराने दागदार छवि वाले अफसरों, जिन पर पूर्व में घोटाले के आरोप लग चुके हैं, ने मनपसंद कुर्सी हथियाने के मंसूबों के चलते इस अफसर के इर्द-गिर्द मंडराना शुरू कर दिया है। एक अफसर को एआरओ की कुर्सी मिल गई।
अब उससे तीन लाख रुपए हर माह मिलने के एवज में उसके पसंदीदा जोन पर पदस्थ करने का खेल रचा जा रहा है। निगमायुक्त के साथ हुई बैठक में तीन एआरओ को लापरवाह बताकर नोटिस थमाने के बाद अब अगली बैठक में अधिकतम बोली लगाने वाले को उसकी पसंद की कुर्सी दिलाने के लिए मेहनत व ईमानदारी से काम करने वाले एआरओ को हटाने की भूमिका तैयार की जाएगी। इसकी रूपरेखा तैयार की जाने लगी है।
निगमायुक्त बेखबर… निगम के एक अफसर ने अपनी कमाई के लिए जो खेल रचा, उसमें निगमायुक्त को बिना कुछ बताए शामिल कर लिया गया। यही वजह है कि अफसर ने भ्रामक जानकारी देकर निगमायुक्त को यह भरोसा दिला दिया कि वह जो कर रहा, वह निगमहित में है।
अफसर की इस करतूत को लेकर निगम गलियारों में चर्चा होने लगी है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उक्त अफसर ज्यादा दिन तक अपनी कारगुजारी छिपा नहीं सकेगा।
जिस दिन निगमायुक्त को उसके मंसूबे पता चलेंगे, उसी दिन उसका विभाग बदल दिया जाएगा। हालांकि इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि निगमायुक्त जब तक समझेंगे तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
सबकुछ मैं करूंगा... राजस्व विभाग के अफसर ने मातहतों पर नकेल कसने के लिए नया पैंतरा आजमाया। उसने आदेश जारी कर दिए हैं कि सबकुछ मैं ही करूंगा। नया खाता खोलना, संपत्ति में संशोधन करना, नामांतरण करना सहित कोई भी कार्य मेरी अनुमति बगैर संभव नहीं होगा।
उक्त अफसर निगमायुक्त को फिलहाल यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहा कि सब कामचोर हैं। मैं निगमहित में नए कर्मचारियों को जिम्मा सौंपूंगा, जो बेहतर हैं। सूत्रों के मुताबिक यह सब महज बड़ा फेरबदल करने की साजिश का हिस्सा है, जिसमें निगमायुक्त अनजाने में फंस गए और तीन एआरओ को नोटिस जारी कर दिए।
2, 6, 9 और 12 में वसूली लक्ष्य के अनुरूप नहीं
निगम में कुल 22 जोन हैं। इनमें से चार जोन 2, 6, 9 और 12 में निगम ने वर्षों से लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं की है। यहां की वास्तविकता को निगमायुक्त से छिपाया गया, जबकि हकीकत में इन जोन में गरीब बस्तियां, पुराने निर्माण व राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र शामिल हैं।
इसके चलते यहां उतनी वसूली नहीं हो पाती। इस तरह अफसर द्वारा जानबूझकर निगमायुक्त की छवि को खराब करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
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