ब्राह्मण बेटियों पर बयान देने वाले आईएएस मामले में हुआ नया खुलासा
फर्जी फैसले का ‘गुरु’ कौन? निलंबित जज ने खुद मांगी अग्रिम जमानत, एसआईटी सतर्क खुलासा फर्स्ट, इंदौर । फर्जी फैसला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण पर ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी कर
Khulasa First
संवाददाता

फर्जी फैसले का ‘गुरु’ कौन? निलंबित जज ने खुद मांगी अग्रिम जमानत, एसआईटी सतर्क
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
फर्जी फैसला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण पर ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले आईएएस संतोष वर्मा को क्लीनचिट देने वाले तत्कालीन स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत खुद मुश्किलों में घिर गए हैं। हाई कोर्ट से पूछताछ की अनुमति मिलते ही रावत ने सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी है। इधर, पुलिस व एसआईटी ने साफ कर दिया कि जमानत का विरोध करेंगे।
जज रावत को हाई कोर्ट ने लगभग 20 दिन पहले ही निलंबित किया था। पुलिस लंबे समय से रावत को मुख्य संदेही मान रही थी और इसी के चलते पूछताछ की अनुमति भी मांगी गई थी। अनुमति मिलते ही रावत सतर्क हो गए और कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगा दी।
खुद फरियादी और अब खुद संदेही भी
इस मामले का सबसे रोचक पहलू यह है कि रावत ने ही 2021 में थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी। यानी शुरुआत में वे फरियादी थे, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो उसी केस में संदेह की सूई उन्हीं पर आकर टिक गई। सूत्रों के मुताबिक रावत की गिरफ्तारी होने पर जिला कोर्ट के एक अन्य निलंबित जज की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि इसी जज के जरिये रावत और आईएएस वर्मा के संबंध गहरे हुए थे।
मोबाइल में छिपा राज, 5 बार एक ही बहाना
एसआईटी ने बताया रावत के कोर्टरूम से हार्ड डिस्क रिकवर कर फर्जी फैसले की कॉपी निकाल ली गई थी। टाइपिस्ट नीतू सिंह से जब्त पेनड्राइव की भी फोरेंसिक रिकवरी हो चुकी है। अब असली राज रावत के मोबाइल में बताया जा रहा है, लेकिन पांच बार नोटिस भेजने के बाद भी रावत का एक ही जवाब है कि मोबाइल टूट गया है। जमानत पर रोक लगी तो एसआईटी को गहन पूछताछ का मौका मिलेगा, जिससे फर्जी फैसले के नेटवर्क की कई परतों का खुलासा होने की उम्मीद है।
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