नई कमान और पुरानी चुनौतियां, अब क्षितिज के सामने है ‘भगीरथ’ लक्ष्य
KHULASA FIRST
संवाददाता

भागीरथपुरा की त्रासदी के बाद क्या ‘स्वच्छता के सिरमौर’ की साख बचा पाएंगे नए निगमायुक्त
बुनियादी सुधार के साथ सियासी तालमेल बनाकर व्यवस्था में करना होगा सुधार
क्या दागदार हुई ‘स्वच्छता की राजधानी इंदौर की प्रतिष्ठा बचा पाएंगे नए निगमायुक्त
हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से एक दर्जन से अधिक लोगों की अकाल मौतों के बाद इंदौर नगर निगम में बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। आलोचनों के तीर झेल रहे निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव भी इसके शिकार हुए। यादव को अपना पद छोड़ना पड़ा तो काम के बोझ के मारे आठ विभागों का दायित्व संभाल रहे निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव पर निलंबन की गाज गिर गई।
आपको पता होगा कि संजीव श्रीवास्तव ही करीब 13 वर्षों से नगर निगम में पेयजल वितरण व्यवस्था का प्रबंध देख रहे थे। दिलीप कुमार यादव की पदस्थापना 9 सितंबर को की गई थी और विडंबना देखिये वे केवल चार माह ही अपने पद पर रह पाए। उनकी किस- किससे कथित रूप से नहीं बनी यह जगजाहिर है।
विडंबना देखिए, जिस इंदौर शहर को हम लगातार स्वच्छता का सिरमौर बना रहे हैं, उसी शहर की पाइप लाइनों में पानी के रूप में जहर घुल गया और लोगों की जान चली गई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पुराने निगम आयुक्त अपने चार माह के कार्यकाल में ऐसे बुनियादी सवाल पीछे छोड़ गए जिन्हें वर्षों से ‘स्वच्छता पुरस्कारों की चमक’ के नीचे दबा दिया गया था।
निश्चित रूप से डा मोहन यादव सरकार के इस व्यापक फेरबदल ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। 2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी क्षितिज सिंघल को अब इंदौर नगर निगम आयुक्त की महती जिम्मेदारी दी गई है। एक युवा अधिकारी के लिए अब इंदौर नगर निगम का दायित्व संभालना मात्र प्रशासनिक चुनौती ही नहीं है, नेतृत्व कौशल की परीक्षा भी है।
भागीरथपुरा की कभी न भूलने वाली घटना के बाद अब निगम आयुक्त की टीम के लिए ‘नई जंग’ निश्चित रूप से आरंभ होगी। जब 15 से अधिक मौतों पर सवाल दागे गए, जिम्मेदारी पूछी गई तो माननीय मंत्रीजी ने इसे सिस्टम में खामी बताया। जाहिर है नए निगम आयुक्त और उनकी टीम के सामने अब ‘भगीरथ’ चुनौतियां कम नहीं होंगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि छुटभैये नेताओं के साथ बड़े नेताओं का उन पर निशाना कम नहीं होगा।
जानकारों का कहना है कि भागीरथपुरा की घटना ने न केवल देश में सबसे स्वच्छ शहर के हालातों पर सवालिया निशान लगाए हैं बल्कि इंदौर नगर निगम की बुनियादी सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वच्छता के बिना स्वास्थ्य संभव नहीं है। भागीरथपुरा की घटना हमें इस बात की याद दिलाती है कि प्रशासनिक लापरवाही कैसे जन-स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है।
नए निगम आयुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर के पुराने जल वितरण नेटवर्क और सीवरेज लाइनों के आपस में मिल जाने की बड़ी समस्या को हल करना है। किसी न किसी नेता, विधायक, मंत्री का हवाला देकर काम के लिए मजबूर करने वाले भी कम नहीं हैं। ऐसे में निगम के अमले और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और शहर के हित में बेहतर काम के लिए उन्हें प्रेरित करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
और हां, सूटबूट पहनकर मंचों पर मुस्कराते अवार्ड लेने जाने वालों स्वच्छ सर्वेक्षण की बात तो अभी कृपया कीजिये ही मत, भागीरथपुरा की घटना से गंदी हुई शहर की छवि को पहले सुधारने की चिंता ही कर लीजिये। मेयर साब कह चुके हैं अधिकारी उनकी नहीं सुनते।
उम्मीद है नए साल में अब सब कुछ हालात सुधर जाएंगे। जनहित मामलों, आदेशों की अनसुनी नहीं होगी, फाइलें धूल नहीं खाएंगी। किसी तरह के टकराव के हालात निर्मित नहीं होंगे। अन्य अहम पदों के साथ सिवनी कलेक्टर रह चुके सिंघल को उज्जैन नगर निगम में महत्वपूर्ण कार्यों का अनुभव है ही। इन तेज तर्रार अधिकारी की छवि को उनके काम कितना उज्जवल करेंगे यह देखना भी दिलचस्प होगा।
क्षितिज सिंघल से जुड़ा एक रोचक किस्सा पढ़िये
इंदौर के नए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सिवनी कलेक्टर रहते हुए एक बार किसी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्हें वहां अव्यवस्था नजर आई, लेकिन नाराज हुए बगैर वे स्वयं बच्चों के बीच बैठ गए और उन्हें पढ़ाने लगे। क्या आपको नहीं लगता कि शहर की सीवर के बीच उलझी हुई पाइप लाइनों और फाइलों के जाल को सुलझाने के लिए शायद इसी ‘ शिक्षक’ वाले धैर्य और अनुशासन की जरूरत है।
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