नेहरू स्टेडियम बना नशेड़ियों का अड्डा: नियमों को ताक पर रखकर चल रही निजी एकेडमियां
KHULASA FIRST
संवाददाता

महापौर ने कहा- मुद्दा संज्ञान में, कार्रवाई जरूर होगी
विवान सिंह राजपूज वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर का सबसे पुराना और इंटरनेशनल ग्रेडेड खेल परिसर नेहरू स्टेडियम गंभीर अव्यवस्थाओं और अवैध गतिविधियों के घेरे में है। नगर निगम के अधीन इस स्टेडियम में खेलने के लिए नियम और शुल्क तय हैं, लेकिन कुछ निजी क्रिकेट और फुटबॉल एकेडमियों ने अवैध कब्जा जमा रखा है।
चौंकाने वाली बात है स्टेडियम में खेलने के लिए आम नागरिकों से पैसे लेकर कुछ असामाजिक तत्व, नगर निगम की अनुमति के बिना गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इस अवैध व्यवस्था के चलते न राजस्व नगर निगम तक पहुंच रहा है न खेल सुविधाओं का सही उपयोग हो पा रहा है जबकि स्टेडियम के संचालन के लिए नगर निगम ने जो तंत्र बनाया है, उसमें स्पष्ट रूप से संचालन के नियम, समय और राजस्व की व्यवस्था तय है लेकिन पालन नहीं हो रहा।
यदि हालात ऐसे ही रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब इंटरनेशनल दर्जा प्राप्त स्टेडियम अपनी खेल पहचान, गरिमा और उद्देश्य खो बैठेगा। नेहरू स्टेडियम असामाजिक तत्वों एवं प्राइवेट क्रिकेट व फुटबॉल अकादमी संचालकों के लिए शराब पीने का अड्डा बन चुका है पूरे मैदान में अलग-अलग स्थानों पर दर्जनों शराब की बोतलें, खाली गिलास और स्नैक्स के पैकेट बिखरे रहते हैं।
समय का पालन भी नहीं
खेलने का निर्धारित समय सुबह 6 से 10 और शाम 4 से रात 8 बजे है, लेकिन निजी क्रिकेट और फुटबॉल एकेडमी समय का पालन नहीं करतीं। कभी भी विकेटों पर खेलना शुरू कर देती हैं। खास बात यह जब स्टेडियम में शुल्क देकर कोई टूर्नामेंट आयोजित करता है, तो ये उसका विरोध भी करते हैं।
स्टेडियम में 12 सीसीटीवी कैमरे हैं, जो पूरे स्टेडियम को कवर नहीं करते। हाल ही में स्टेडियम इंचार्ज ने संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अधिकारियों को भेजा है, लेकिन जवाब नहीं मिला है। स्टेडियम की हालत इतनी खराब है निजी फुटबॉल एकेडमी संचालक क्रिकेट पिच को खोदकर उन पर मंच बना लेते हैं।
इससे पिच दोबारा तैयार करने में महीनों लगते हैं। शुल्क देकर क्रिकेट खेलने आने वालों को स्टेडियम प्रबंधन मना करने पर मजबूर होता है। निर्वाचन संबंधी कार्य भी स्टेडियम में होता है, जिसके लिए बड़े-बड़े तंबू और केबिन लगाए जाते हैं। पूरा मैदान खोद दिया जाता है, जिसे फिर से तैयार करने में छह महीने तक लगते हैं।
चार गेट पर कब्जा
निजी फुटबॉल एकेडमी संचालकों ने स्टेडियम के गेट नंबर 1, 2, 3 और 5 पर कब्जा कर रखा है। यहां तक कि टिकट घर पर भी कब्जा है। जब निगम अधिकारी खुलवाने का प्रयास करते हैं, तो विवाद शुरू हो जाता है, जिसमें छावनी क्षेत्र के कुछ स्थानीय नेता और गुंडे हस्तक्षेप करते हैं।
स्वच्छ शहर की हकीकत...
इंदौर को आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का पुरस्कार मिल चुका है, लेकिन अंदर की हकीकत कुछ और ही है। इंटरनेशनल ग्रेड के इस स्टेडियम पर अब किसी भी निगम अधिकारी का ध्यान नहीं है। यहां तक कि स्टेडियम को संचालित करने के लिए बनाए गए संकल्प पत्र के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
स्टेडियम में क्रिकेट के कुल 9 विकेट हैं, जिनमें 4 सिंथेटिक और 5 टर्फ हैं। अनधिकृत क्रिकेट अकादमियां बिना निर्धारित शुल्क दिए विकेटों का उपयोग कर रही हैं, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है। स्टेडियम का प्रभार नगर निगम के जितेंद्र पांडे के पास है। उनके अधीन 18 कर्मचारी हैं, जो रख-रखाव करते हैं।
सचिन एवं स्वामी विवेकानंद क्रिकेट एकडेमी का संचालन बिना फीस जमा किए हो रहा है। जब स्टेडियम के इंचार्ज रोकते हैं, तो विवाद की स्थिति बन जाती है। खास बात यह निगम के कुछ निचले अधिकारी, जो स्टेडियम पर तैनात हैं, इन अकादमियों से रुपए लेकर उन्हें टर्फ विकेट पर खेलने की अनुमति दे देते हैं।
कुछ स्थानीय नेता भी इन एकेडमी संचालकों का समर्थन कर उन्हें स्टेडियम में प्रवेश दिलाते हैं। स्टेडियम में खेलने का शुल्क निगम के खातों में जमा न होकर निचले कर्मचारियों की जेब में जा रहा है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत कई बार निगम के एडिशनल कमिश्नर अभय राजनगांवकर से की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्टेडियम की हालत यह है पार्किंग पर स्थानीय असामाजिक तत्वों का कब्जा है। जब उन्हें अंदर खेलने की अनुमति नहीं दी जाती, तो वे शनिवार और रविवार को स्टेडियम की पार्किंग में ही क्रिकेट खेलते हैं। रोकने पर विवाद की स्थिति बनती है। कई बार शिकायत संयोगितागंज पुलिस से भी की गई, लेकिन पुलिस समझाइश देकर चली जाती है।
तोड़फोड़ भी करते हैं अवैध कब्जाधारी
नेहरू स्टेडियम में शराबखोरी, अवैध कब्जे और अवैध रूप से क्रिकेट व फुटबॉल एकेडमी संचालित करने वाले तोड़फोड़ भी करते हैं। वॉशरूम की हालत बेहद खराब है। कई से नल तक निकालकर ले जाए जा चुके हैं। कभी सही सर्वे हो तो गहरी नींद में सो रहे वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी वास्तविक स्थिति का पता चले।
नेहरू स्टेडियम के बाहर 10 क्वार्टर हैं, जो स्टाफ के लिए आवंटित होने थे, लेकिन अब यहां भी निगम के निचले कर्मचारियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। जिनके नाम पर आवंटन है, वे नहीं रहते। उनके रिश्तेदार रह रहे हैं, जबकि कुछ किराए पर तक दे दिए गए हैं।
संकल्प पत्र के नियम
स्टेडियम का उपयोग केवल खेल गतिविधियों एवं स्वास्थ्यवर्धक कार्यक्रमों के लिए रहेगा।
समय प्रातः 6 से 10 तक एवं सायं 4 से रात 8 बजे तक रहेगा।
खेल संगठन/खिलाड़ियों के लिए को प्रवेश पत्र जरूरी।
सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत प्रवेश पत्र के आधार पर ही प्रवेश मान्य होगा।
खेल संगठन स्टेडियम के रख-रखाव एवं सुरक्षा में सहयोग करेंगे।
समस्याओं की सूचना लिखित में स्टेडियम कार्यालय को देंगे।
वाहन पार्किंग निर्धारित स्थल पर।
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