बीआरटीएस हटाने में लापरवाही: सड़क बनी जानलेवा
नगर निगम की सुस्ती से बड़ा हादसा, पत्थर-कंकर बने खतरा, अनियंत्रित हुई स्कूटी, तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, स्कूटी चालक हुआ गंभीर घायल खुलासा फर्स्ट, इंदौर । बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के नाम पर नगर निगम
Khulasa First
संवाददाता

नगर निगम की सुस्ती से बड़ा हादसा, पत्थर-कंकर बने खतरा, अनियंत्रित हुई स्कूटी, तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, स्कूटी चालक हुआ गंभीर घायल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के नाम पर नगर निगम की घोर लापरवाही अब आम लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। रेलिंग हटाने के बाद सड़क पर बिखरे पत्थर और गिट्टी हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं। कल देर रात ऐसा ही एक गंभीर हादसा हुआ, जिसमें एक स्कूटी सवार युवक की जान जाते-जाते बची। हादसे ने निगम की कार्यशैली और अधूरी तैयारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
राहगीरों के अनुसार स्कूटी (क्रमांक एमएच-04-केटी -6637) का चालक एलआईजी चौराहे से विजय नगर तरफ जा रहा था, वह जैसे ही गुरुद्वारे के आगे पहुंचा तभी बीआरटीएस रेलिंग हटाने के बाद सड़क पर पड़ी गिट्टी और पत्थरों से स्कूटी अचानक अनियंत्रित हो गई। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रही कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि चालक स्कूटी समेत घसीटते हुए बीआरटीएस की टूटी रेलिंग में जा घुसा। हादसे में उसके पैर की उंगलियां टूट गईं। वहीं स्कूटी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। कार चालक मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने तत्काल पुलिस को सूचित कर मौके पर बुलाया और घायल को पास स्थित डीएनएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया।
घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस... एमआईजी पुलिस के मुताबिक घायल का नाम रजत जाधव (32) निवासी सूर्यदेव नगर फूटी कोठी सामने आया है। वह एलआईजी चौराहे से विजय नगर की ओर जा रहा था। हालांकि घायल का इलाज जारी है। मामले में पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर कार चालक की तलाश कर रही है।
एक राहगीर ने बताया कि बीआरटीएस रेलिंग हटाने के बाद से सड़क पर जगह-जगह पत्थर और कंकर पड़े हैं। आए दिन दोपहिया वाहन स्लिप हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम ने न तो सफाई करवाई और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए।
यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। बीआरटीएस हटाने का काम बिना सुरक्षा इंतजामों के किया जा रहा है। न बैरिकेडिंग, न सफाई और न ही ट्रैफिक डायवर्जन-नतीजा, आम जनता भुगत रही है।
खुलासा की पड़ताल में निगम की गंभीर लापरवाही आई सामने... घटना के बाद खुलासा फर्स्ट की टीम मामले को लेकर बीआरटीएस का दौरा करने पहुंची, जहां देखा कि टुकड़े-टुकड़े में एक तरफ की रेलिंग निगम द्वारा हटाई हुई थी। हटाई हुई रेलिंग सड़क किनारे पड़ी हुई थी तो कई जगह दूसरी तरफ की रेलिंग तरफ पड़ी हुई थी। जहां-जहां की रेलिंग हटाई गई है वहां पत्थर-कंकर सड़क पर फैले पड़े थे।
कई जगह जहां की रेलिंग शुरुआत में हटाई गई वहां रेलिंग वाली जगह पर सीमेंट सड़क बनाने के बजाय डामर की ऊपर-नीचे अनबैलेंस सड़क बनी हुई थी। टुकड़े-टुकड़े में चल रहे काम के कारण पत्थर कंकर व्हाइट चर्च से लेकर रसोमा चौराहे तक पड़े हुए थे। जहां- जहां डामर की सड़क बनी हुई थी वह पूरी तरफ अनबैलेंस थी, जो कि आगे जाकर सड़क दुर्घटना का मुख्य बड़ा कारण बन सकती है।
बीआरटीएस हटाने पर हाई कोर्ट सख्त, 15 दिन में रिपोर्ट तलब... इधर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम को बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने में देरी पर कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने एक तरफ बने बीआरटीएस कॉरिडोर को 15 दिन में हटाने का आदेश दिया है। यह फैसला राजलक्ष्मी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर आया है।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फरवरी 2025 में आदेश देने के बावजूद नौ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सोमवार को सुनवाई के दौरान इंदौर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर कोर्ट में पेश हुए। कमिश्नर ने भरोसा दिलाया कि 15 दिन में बीआरटीएस का एक हिस्सा हटाकर रिपोर्ट पेश की जाएगी।
वैसे बीआरटीएस हटाने के लिए एजेंसी फाइनल हो चुकी है और 7 नवंबर 2025 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ठेकेदार को तीन महीने में काम पूरा करना है।
भोपाल में तुरंत बीआरटीएस हटा दिया, इंदौर में देरी क्यों... याचिकाकर्ता पक्ष ने भोपाल का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां तुरंत बीआरटीएस हटा दिया गया, जबकि इंदौर में देरी क्यों? जवाबदेही तय करने के लिए कोर्ट ने वरिष्ठ वकील गिरीश पटवर्धन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय निगरानी समिति बनाई है।
समिति काम की प्रगति पर नजर रखेगी और अगली सुनवाई में रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि शहर में अतिक्रमण, लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण और चौराहों पर ट्रैफिक अव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी अगली सुनवाई में जवाब मांगा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
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