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शराब दुकान के पास बच्चे के साथ रातभर ठिठुरती रही मां: राज्य महिला आयोग अध्यक्ष के दौरे में सामने आई स्तब्ध कर देने वाली घटना

खुलासा फर्स्ट, इंदौर । राष्ट्रीय राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर के दो दिवसीय इंदौर दौरे में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। शुक्रवार सुबह वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) के निरीक्षण से ठीक

Khulasa First

संवाददाता

29 नवंबर 2025, 9:11 पूर्वाह्न
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शराब दुकान के पास बच्चे के साथ रातभर ठिठुरती रही मां

खुलासा फर्स्ट, इंदौर
राष्ट्रीय राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर के दो दिवसीय इंदौर दौरे में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। शुक्रवार सुबह वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) के निरीक्षण से ठीक पहले एक डरी हुई किशोरी नवजात शिशु को गोद में लिए स्थानीय लोगों के साथ पहुंची। खुद को सनावद निवासी बताने वाली यह नाबालिग कुछ बोल ही न पाई।

आंखों में आंसू लिए सिर्फ इतना कहा, 112 वाले छोड़ गए, पति को मार दिया। ठंडी हवा में बच्चे के साथ कांपती मां की यह दर्दभरी दास्तां सुन हर कोई सिहर उठा। आयोग अध्यक्ष ने तुरंत 5 दिन केंद्र में रखने का आदेश दिया, लेकिन घटना की गहराई में उतरने की बजाय मामला महज फोटो सेशन तक सिमट गया। क्या यह निरीक्षण न्याय की मांग करता है या सिर्फ दिखावा?

पुलिस की लापरवाही से नाबालिग ठिठुरी, सखी केंद्र भी घेरे में
संयोगितागंज क्षेत्र स्थित कंपोजिट शराब दुकान के पास यह महिला रातभर ठंडी हवा की चपेट में सड़क पर पड़ी रही। तड़के करीब 4 बजे राहगीरों ने सिर्फ एक पतले कपड़े में लिपटी 1 महीने की मासूम नवजात और उसकी मां को सड़क पर कंपकंपाते देखा। बच्ची तेज बुखार से कांप रही थी, जबकि मां ठंड और डर से कांपती हुई कुछ बोल न पा रही थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत पीसी सेठी अस्पताल के सामने से कपड़े और कंबल खरीदे, बच्ची को लपेटा और उसकी मां को खाना खिलाया।

सवाल उठता है कि देर रात डायल 112 को सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने नाबालिग को नवजात संग सड़क किनारे क्यों छोड़ दिया? वन स्टॉप सेंटर महज कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद उसे शेल्टर क्यों नसीब न हुआ? किशोरी ने रोते हुए बयां किया कि पति को किसी ने पीट-पीटकर फेंक दिया। यह घटना महिला सुरक्षा की पोल खोलते हुए पुलिस विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

आयोग अध्यक्ष का निरीक्षण फोटोबाजी या न्याय?... वन स्टॉप सेंटर पर निरीक्षण का निर्धारित समय सुबह 9 बजे था, लेकिन विजया रहाटकर डेढ़ घंटे लेट पहुंचीं। प्रभारी डॉ. वंचनासिंह परिहार, डॉ. संध्या विकास (संयुक्त संचालक, महिला-बाल विकास) समेत कर्मचारियों ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया।

वहीं निरीक्षण के दौरान किशोरी रो-रोकर अपनी व्यथा सुना रही थी- पति की पिटाई, पुलिस की बेरुखी, रातभर की ठंड में तड़प… लेकिन अध्यक्ष ने इस दर्द पर गौर ही नहीं किया। दौरा महज फोटो खिंचवाने और औपचारिकता निभाने का लग रहा था।

इससे सखी केंद्र की कार्यप्रणाली पर भी दाग लग गया- नाबालिग को तुरंत सहारा क्यों न मिला? यह घटना न सिर्फ पुलिस की लापरवाही का खुलासा करती है, बल्कि महिला आयोग के निरीक्षण की गहराई पर भी सवालिया निशान लगाती है।

क्या ऐसी घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करेंगी या सिर्फ सुर्खियां बनेंगी? इंदौर की सड़कों पर घूमने वाली असहाय मां-बच्ची की आवाज अब और दबने न पाए, आखिर पांच दिन बाद कहां जाएगी नवजात को लेकर महिला? इसका जवाब भी राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष नहीं दे पाईं।

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