हाईराइज बिल्डिंगों में आग से खतरा, सुरक्षा के संसाधन नहीं
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । प्रशासन और नगर निगम अफसरों की लापरवाही से शहरभर में हाईराइज बिल्डिंगों में आग का खतरा बना हुआ है। ऊंचे-ऊंचे होटल, होस्टल व हॉस्पिटलों में आग से सुरक्षा के संसाधन नहीं हैं। निर्म...
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रशासन और नगर निगम अफसरों की लापरवाही से शहरभर में हाईराइज बिल्डिंगों में आग का खतरा बना हुआ है। ऊंचे-ऊंचे होटल, होस्टल व हॉस्पिटलों में आग से सुरक्षा के संसाधन नहीं हैं। निर्माणकर्ताओं ने फायर एनओसी भी नहीं ली है। इससे आमजन की जान को आग से खतरा बना हुआ है।
नगर निगम फयर फाइटिंग के लिए अत्याधुनिक संसाधन जुटाने में लगा हुआ है। हालांकि मौजूदा में शहर की ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों में आग लगने पर उसे बुझाने के संसाधन निगम के पास नहीं हैं। इसके चलते हाईराइज बिल्डिंग का निर्माण के दौरान ही निर्माणकर्ता को निर्देश दिए जाते हैं कि वह अपनी बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के संसाधन लगाएं, लेकिन शहर की अधिकतर हाईराइज बिल्डिंगों में निर्माण के बाद यह जांच नहीं होती है कि उनमें आग से सुरक्षा के संसाधन हैं कि नहीं।
कई बहुमंजिला बिल्डिंगों में होटल, हॉस्पिटल व होस्टलों का संचालन हो रहा है, लेकिन अधिकतर संस्थानों में फायर एनओसी नहीं ली गई है। इसके चलते कभी भी आग लगने पर यहां मौजूद लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, लेकिन अफसर ऐसे मामलों की अनदेखी कर रहे हैं।
हाल ही में खुलासा हुआ है कि शहर के कई कारखाने और अस्पतालों में आग से सुरक्षा के संसाधन नहीं हैं। इसके चलते कारखानों की जांच के निर्देश कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी किए, जबकि अस्पतालों की जांच के निर्देश अदालत ने जारी किए हैं। जांच के आदेश जारी होने के बाद भी अब तक एक भी कारखाने या अस्पताल पर कार्रवाई का खुलासा नहीं हुआ है। अफसर पूरे मामले में लीपापोती कर मामले को दबाने में जुट गए हैं।
34 निजी अस्पतालों में फर्जी एनओसी
अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने बताया कि हाईकोर्ट में शहर के 34 निजी अस्पतालों के खिलाफ याचिका दायर की गई। इन अस्पतालों के पास फर्जी भवन अनुज्ञा और फायर एनओसी पाई गई है। हालांकि मामले की शिकायत सीएमएचओ, कलेक्टर, निगमायुक्त सहित आला अफसरों से की गई थी, लेकिन किसी भी स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद अब अदालत में याचिका दायर की गई। इसकी सुनवाई के बाद अदालत ने अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट छह सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे सीएमएचओ व अस्पताल संचालकों में खलबली मच गई है।
जांच अधूरी: ज्ञात रहे कि पूर्व में शासन ने अस्पतालों में आग से सुरक्षा के इंतजाम की जांच के निर्देश दिए थे। इसके चलते प्रशासन ने अस्पतालों की जांच शुरू की, लेकिन बीच में ही ठप हो गई। जांच के दौरान कई अस्पतालों को नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन सभी नोटिस फाइलों में दबा दिए गए। इससे अस्पताल में आग से सुरक्षा के इंतजाम आधे-अधूरे या न होने से मरीजों को जान का खतरा बन गया है। वहीं मनमाने तरीके से भवन का निर्माण किए जाने से उसमें आग लगने पर आग बुझाना भी सहज नहीं है।
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