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' संघ दक्ष ' हुए मेयर-कलेक्टर: ‘संघम शरणम् गच्छामि' हुए नगर निगम-जिला प्रशासन

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 जनवरी 2026, 7:15 पूर्वाह्न
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' संघ दक्ष ' हुए मेयर-कलेक्टर

आरएसएस को अब जाकर हुई इंदौर की चिंता, मेयर-कलेक्टर हुए संघ दफ्तर तलब

देशभर में धूमिल हुई अहिल्या नगरी की उज्ज्वल छवि को लेकर चिंतित हुआ संघ

भागीरथपुरा में हुई डेढ़ दर्जन से अधिक मौत के बाद संघ का टूट गया धैर्य

‘सुदर्शन' में कल डेढ़ घंटे तक लगी महापौर व कलेक्टर की ‘शाखा'

प्रांत प्रचारक, प्रांत कार्यवाह की अगुआई में नगर निगम व जिला प्रशासन की हुई बहुप्रतीक्षित ‘समन्वय बैठक'

भागीरथपुरा कांड के बाद इंदौर की छवि को पुनर्स्थापित करने पर फोकस की मिली हिदायत

कलेक्टर के आरएसएस दफ्तर जाने पर कांग्रेस बिफरी, प्रांत प्रचारक क्या मुख्य सचिव, जो कलेक्टर ने लगाई हाजिरी?

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार आरएसएस का धैर्य टूट ही गया। उसने तमाम किंतु-परंतु से परे जाकर इंदौर को प्राथमिकता में रख ही लिया। 1990 के दौर में कभी ‘76, रामबाग' इस स्थिति में रहा, जो बुधवार शाम को इंदौर में निर्मित हुई। तब पटवा सरकार का दौर था। उस दौर में ‘स्व. रणवीर सिंह भाईसाहब' ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना तब भी किसी को नहीं थी।

उसके लंबे अंतराल बाद ‘राजमोहनजी' ने एक आस जगाई है। भाजपा चाहे न चाहे, मोहन सरकार पसंद करे न करे, विधायक को भाये न भाये, लेकिन औसत इंदौरी ये चाहता है कि इस बेलगामी राजनीतिक दौर पर कम से कम आरएसएस तो लगाम लगाए? अन्यथा आज जो इंदौर की थू-थू देशभर में हो रही है, वह कभी खत्म न होगी।

इंदौर के बाशिंदे आरएसएस से उम्मीद ही इसलिए कर रहे हैं कि संघ के ‘जन जागरण' के कारण ही ये शहर 3 दशक से आंखें मींचकर कमलदल पर भरोसा कर रहा है। जब दल में आपस में ही मारकाट मची है तो ‘मातृसंस्था' का जाग जाना जरूरी हो जाता है। अब ‘सुदर्शन' को जाग्रत रहना ही होगा। नहीं तो संघ की एक सदी की साधना दांव पर लगती जाएगी। सत्ता तो आती-जाती रहेगी...!!

इं दौर के महापौर तो पहले से ही आरएसएस से शिक्षित-दीक्षित थे, लेकिन कल, यानी बुधवार को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा भी ‘संघ दक्ष' हो गए। जिले के ये दोनों नीति-नियंता किरदार आरएसएस के प्रांत दफ्तर के नियंत्रण में ले लिए गए। डेढ़ घंटे से भी ज्यादा समय तक दोनों महानुभावों की ‘शाखा' संघ की पंतवैद्य कॉलोनी स्थित ‘सुदर्शन' में आहूत हुई।

प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह व प्रांत कार्यवाह विनीत नवाथे ‘मुख्य शिक्षक' की भूमिका में थे। इस बैठक के राजनीतिक मायने कुछ भी हों, लेकिन शहर के लिए ये उम्मीद बनी कि अब कम से कम तो इंदौर के साथ ‘राजनीतिक खेल' पर लगाम लग जाएगी।

संघ के रामबाग स्थित विभाग कार्यालय छोड़, संघ के प्रांत कार्यालय में ‘संघ दक्ष' हुए मेयर-कलेक्टर को इस शाखा से स्पष्ट कर दिया गया कि भागीरथपुरा कांड ने इंदौर की वो बदनामी कर दी है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। आरएसएस ने स्पष्ट किया कि अब सिर्फ इस बात पर ही फोकस कीजिए कि कैसे अहिल्या नगरी का खोया हुआ देशव्यापी गौरव लौटे। प्रांत दफ्तर से ये हिदायत भी मिली कि अब तक समन्वय की जो कमी थी, वह हो गई। अब ये बात सामने नहीं आना चाहिए कि इंदौर जैसे शहर में शीर्ष स्तर पर इस तरह के मतभेद काम कर रहे हैं।

आरएसएस की फिक्र में ये बात भी शामिल थी कि जिस तरह इंदौर के ही कुछ चुनींदा व्यक्तियों ने इस आपदा को ‘अवसर' मान इंदौर का दृश्य-श्रव्य माध्यम में ‘मान-मर्दन' किया है, वह अक्षम्य है और ऐसे किरदारों को अब चिह्नित किया जाना चाहिए। आरएसएस के साथ हुई इस ‘प्रशासनिक शाखा' पर कांग्रेस की भृकुटियां तन गईं।

प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि कलेक्टर को संघ ने किस हैसियत से कार्यालय बुलाया? कलेक्टर को भी कटघरे में खड़ा कर सवाल किया कि क्या प्रांत प्रचारक मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव हैं, जो कलेक्टर सामने जाकर हाजिर हुए?

जहरीले पानी से हुई मौत से गमगीन व गुस्से से भरे शहर में बुधवार शाम उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब ये खबर तेजी से फैली कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव आरएसएस कार्यालय सुदर्शन पहुंचे हैं। शहर इस बात से इत्तेफाक जोड़ ही रहा था कि एक और धमाका हुआ कि कलेक्टर शिवम वर्मा भी संघ दफ्तर पहुंचे हैं।

ये खबर आग की तरह शहर में फैली और मीडिया के कैमरे व कदम रामबाग से लगी पंतवैद्य नगर कॉलोनी तक बढ़ चले, लेकिन हाथ में व आंखों में सिर्फ मेयर-कलेक्टर के वाहन ही समा पाए। अंदर क्या चल रहा है, इसकी खबर बाहर नहीं आई।

इस अहम बैठक की खबर बाहर आना भी नहीं थी। ऐसा कम से कम संघ में तो नहीं होता, लेकिन प्रांत प्रचारक के लिए ये जरूर खोज का विषय होना चाहिए कि मेयर व कलेक्टर तो खबर कर संघ दफ्तर आए नहीं होंगे? फिर बैठक में शामिल ऐसा कौन ‘खबरी' था, जिसने कलेक्टर के संघ दफ्तर पहुंचने की खबर चलाई।

कलेक्टर के संघ कार्यालय में आने से किसकी ‘लाइजेनिंग' भागीरथपुरा से इतर काम आएगी? इस सवाल में ही कलेक्टर के संघ समक्ष हाजिर होने की कहानी छिपी है। खैर, ये आरएसएस के लिए खोज का विषय है, ताकि भविष्य में वह इस बिंदु को भी जेहन में रखें।

संघ की दो-टूक- ‘भगीरथ' प्रयासों से धोएं भागीरथपुरा का कलंक
नगर निगम व जिला प्रशासन की इस अहम बैठक को आरएसएस के धैर्य से जोड़ा जा रहा है, जो दूषित जल से हुई मौत से आखिरकार टूट गया। जन-जन व पल-पल की खबर रखने वाले आरएसएस से इंदौर की राजनीति के अंदरखाने जो चल रहा है, वह अब तक कोई छिपा नहीं था, लेकिन उसे भी ये उम्मीद न थी कि इस राजनीतिक मतभेद व शहर पर कब्जे करने की छोटी मानसिकता की परिणीति निर्दोषों की मौत व शहर की बदनामी में होगी।

लिहाजा संघ की प्रांत इकाई ने बुधवार को शहर की दोनों प्रमुख एजेंसियों के मुखिया को बुलाकर साफ कर दिया कि जो हो चुका वह अब अंतिम हो और जो इंदौर की बरसों की पुण्याई पर गहरा आघात लगा है, उसे दूर करने के अब ‘भगीरथ' प्रयास बेहद जरूरी हैं।

इन प्रयासों में अब रत्तीभर भी तालमेल का अभाव व आरोप-प्रत्यारोप स्वीकार नहीं होगा। देशभर में इंदौर की धूमिल हुई छवि को लेकर संघ ने रोष के साथ चिंता भी प्रकट की और हिदायत दी कि ऐसी नौबत क्यों आई, इसका समय रहते निराकरण अब हो।

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