मास्टर प्लान तैयार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास नहीं है देखने का समय: सरकार की बेरुखी पर उठ रहे सवाल
असमंजस के चलते शहर के विकास कार्य अटके खुलासा फर्स्ट, इंदौर । सपनों का शहर कहा जाने वाला इंदौर आज विकास के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। शहर के सुनियोजित विकास के लिए अहम माना जाने वाला मास्टर प्लान तैयार त...
Khulasa First
संवाददाता

असमंजस के चलते शहर के विकास कार्य अटके
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सपनों का शहर कहा जाने वाला इंदौर आज विकास के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। शहर के सुनियोजित विकास के लिए अहम माना जाने वाला मास्टर प्लान तैयार तो हो चुका, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा रहा।
कारण है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इसे अब तक नहीं देखा जाना। इसे लेकर इन दिनों राजनीतिक हलकों में चर्चा सरगर्म है। वहीं शहर विकास में सरकार की प्राथमिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इंदौर मध्य प्रदेश का सबसे तेजी से बढ़ता शहर है। इसके विकास को दिशा देने के लिए मास्टर प्लान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। शहर के भविष्य को लेकर सैकड़ों निवेशक उत्सुक हैं, लेकिन मास्टर प्लान के लंबित होने से विकास कार्यों पर विराम लग गया है।
मास्टर प्लान तैयार, समय की कमी -विजयवर्गीय
नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वयं स्वीकार किया है कि इंदौर का मास्टर प्लान पूरी तरह तैयार है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उसे देखने का समय नहीं मिल पाया। इस बयान के बाद सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गजट नोटिफिकेशन बनाम मुख्यमंत्री का बयान
प्रदेश शासन के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं। वहीं उनका कहना है कि वे जिले के प्रभारी मंत्री नहीं हैं, बल्कि जहां प्रभारी मंत्री नियुक्त नहीं है, वहां की जिम्मेदारी वे संभालते हैं। उनके इस विरोधाभासी बयान ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
भाजपा की एकतरफा सत्ता, जनता परेशान -कांग्रेस
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया इंदौर में विधायक, सांसद, महापौर, जिला परिषद और जनपद सभी पदों पर भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद शहर की जनता परेशान है। जनहित याचिकाओं में न्यायालय लगातार शासन और प्रशासन को फटकार लगा रहा है, जो व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
स्मार्ट सिटी योजना में घोटाले का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर हुए घोटाले की पुष्टि तब हुई, जब प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश जारी किए गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि स्मार्ट सिटी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
हुकुमचंद मिल मामले में दोहरा मापदंड क्यों?
एडवोकेट द्विवेदी ने हुकुमचंद मिल की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार को 26 करोड़ रुपए से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी का नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि मप्र गृह निर्माण मंडल द्वारा स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की गई, जिस पर पंजीयन विभाग ने धारा 48(ख) के तहत प्रकरण भी दर्ज किया है।
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