हाशिए पर चल रहे नेताओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी: खरमास के बाद मप्र भाजपा संगठन में हलचल होगी तेज
KHULASA FIRST
संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
खरमास समाप्त होते ही मध्यप्रदेश की सियासत में सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर बड़े फेरबदल के संकेत मिलने लगे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर निगम-मंडलों में नियुक्तियां और प्रदेश संगठन के विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।
खासतौर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम के विस्तार को लेकर उन नेताओं की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं, जो लंबे समय से संगठन में ‘लूप लाइन’ पर चल रहे हैं और बड़ी जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे हैं।
खरमास के बाद मध्यप्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपनी टीम का विस्तार कर सकते हैं। ऐसे में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम में अहम भूमिका निभा चुके कई वरिष्ठ नेताओं को फिर से संगठन में तरजीह मिलने की उम्मीद बंधी है।
बता दें कि 23 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल ने अपनी पहली टीम की घोषणा की थी, जिसमें 9 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री और 9 मंत्री शामिल किए गए थे। इसके साथ ही किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्षों के नाम भी घोषित किए गए थे।
इसके बावजूद मुख्य संगठन में कई पद अब भी खाली हैं, जिन पर नियुक्तियां होना बाकी हैं। राजनीतिक विज्ञानियों का मानना है कि भाजपा संगठन फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहली सूची में कई बड़े और अनुभवी नेताओं के नाम शामिल नहीं होने से यह संदेश गया कि पार्टी नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि, कुछ वरिष्ठ नेताओं को प्रशासनिक दृष्टि से अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, लेकिन कई नेता अब भी संगठनात्मक पदों की प्रतीक्षा में हैं।
खामोश हैं उपेक्षित वरिष्ठ नेता
खरमास समाप्त होने की तारीख 14 जनवरी को लेकर संगठन में बैठे नेताओं की नजरें टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इसके बाद जैसे ही नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी, लंबे समय से इंतजार कर रहे नेताओं की सुनवाई होगी। इसी उम्मीद में कई उपेक्षित अनुभव कर रहे बड़े नेता फिलहाल खामोशी से समय काट रहे हैं।
इन बड़े शहरों में अब तक कार्यकारिणी घोषित नहीं
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों सहित कई जिलों की कार्यकारिणियां अब तक घोषित नहीं हो पाई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय सांसदों और विधायकों की दखलअंदाजी इस देरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। अपने-अपने समर्थकों को जिला कार्यकारिणी में शामिल कराने की कोशिशों के चलते जिला अध्यक्षों और प्रदेश नेतृत्व को संतुलन बनाने में कठिनाई आ रही है।
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