BRTS पर सुनवाई के दौरान बड़ा खुलासा: ठेकेदारों से मांगा जा रहा 40 प्रतिशत कमीशन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में BRTS और ट्रैफिक समस्या को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर एक बार फिर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अहम सुनवाई हुई। करीब एक घंटे तक चली इस सुनवाई में जहां अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया, वहीं अदालत कक्ष में एक ऐसी चर्चा भी हुई जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
सुनवाई के दौरान ‘कमीशन’ की खुसर-फुसर
हाईकोर्ट द्वारा आदेश लिखवाए जा रहे थे, उसी दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं के बीच आपसी बातचीत शुरू हुई। जिसमे कहा गया कि पहले ठेकेदारों से 20 फीसदी कमीशन लिया जाता था, लेकिन अब यह बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया गया है।
इसी वजह से ठेकेदार काम बीच में छोड़ रहे हैं। यह बातचीत भले ही ऑन रिकॉर्ड न आई हो, लेकिन हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान इसका ऑडियो वीडियो में रिकॉर्ड हो गया। चर्चा में यह भी कहा गया कि अब इस तरह की बातों को खुले तौर पर कहना संभव नहीं है।
कौन-कौन रहा कोर्ट में मौजूद
इस महत्वपूर्ण सुनवाई में हाईकोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त IAS क्षितिज सिंघल, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी, PWD अधिकारी और BRTS रेलिंग हटाने के ठेकेदार दिनेश यादव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
ठेकेदार ने क्यों छोड़ा काम?
ठेकेदार दिनेश यादव की फर्म की ओर से कोर्ट को बताया गया कि टेंडर में जिस गुणवत्ता और मात्रा का स्क्रैप बताया गया था, वास्तविकता उससे काफी कम निकली। बस स्टैंड पर जहां 12 टन स्क्रैप निकलने की उम्मीद थी, वहां केवल 8 टन ही मिल रहा है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी कारण काम छोड़ा गया।
इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह जनहित का मामला है और इस आधार पर काम रोका नहीं जा सकता। अदालत ने निर्देश दिए कि ठेकेदार निगमायुक्त के साथ बैठक कर समाधान निकाले।
मुख्य सचिव को सुलझाने होंगे नीतिगत मुद्दे
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एलिवेटेड कॉरिडोर और BRTS जैसे विषय नीतिगत हैं और स्थानीय स्तर पर समाधान संभव नहीं दिख रहा। अदालत ने निर्देश दिए कि मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग और PWD विभाग के साथ बैठक कर इस पर अंतिम निर्णय लें।
इंदौर को प्रयोगशाला बना दिया गया है
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इंदौर को प्रयोगशाला बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि एलिवेटेड कॉरिडोर योजना 2019 की है, जिसका भूमिपूजन जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
लेकिन अभी भी इसके पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इस पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि दिसंबर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है और फरवरी से PWD द्वारा काम शुरू किया जाएगा।
डिवाइडर और BRTS पर क्या निर्देश मिले
अधिकारियों ने कोर्ट को जानकारी दी कि BRTS की कुल लंबाई 11.20 किमी है। इसमें से 6 किमी LIG से नवलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर में शामिल है। शेष 3.20 किमी हिस्से में अप्रैल तक सेंट्रल डिवाइडर का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। एक ओर की रेलिंग हटाई जा चुकी है।
ग्रीन कॉरिडोर पर भी जोर
हाईकोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी शामिल थे, ने ग्रीन कॉरिडोर की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए सुगम रास्ता होना जरूरी है, जैसा अन्य बड़े शहरों में होता है।
28 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव, AAG राहुल सेठी सहित अन्य पक्षकार मौजूद रहे।
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