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रास्ता भटके बच्चे के साथ 27 किमी दौड़ती रही लूसी

KHULASA FIRST

संवाददाता

15 फ़रवरी 2026, 9:32 पूर्वाह्न
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रास्ता भटके बच्चे के साथ 27 किमी दौड़ती रही लूसी

स्ट्रीट डॉग बना बॉडी गार्ड

जिस मोहल्ले ने उसके बच्चे छीने उसी के बच्चे के लिए दौड़ी

सुचेंद्र मिश्रा 97531-70007 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश के अलग-अलग भागों से बच्चों के गायब होने की खबरों के बीच मंगलवार शाम शहर के बंगाली चौराहे इलाके से 11 साल का अथर्व गायब हो गया था। वह घर से साइकिल चलाने के लिए निकला और फिर वापस नहीं लौटा तो परिजन ने उसे खोजा और बाद में उसके गायब होने की एफआईआर पुलिस में दर्ज कराई।

यह कहानी केवल एक बच्चे के गायब होने की नहीं, बल्कि इंसानों द्वारा प्रताड़ित स्ट्रीट डॉग की भी है। जिस स्ट्रीट डॉग के बच्चों को मोहल्ले वाले कहीं दूर छोड़ आए थे, वही स्ट्रीट डॉग मोहल्ले के बच्चे के लिए 27 किलोमीटर तक दौड़ी।

दरअसल अथर्व साइकिल की लॉन्ग राइड लेने के चक्कर में रास्ता भूल गया और भटककर इंदौर से 27 किलोमीटर दूर शिप्रा पहुंच गया। वहां कुछ लोगों ने घबराए हुए अथर्व को देख उससे बात की, लेकिन घबराहट में वह अपने पिता का मोबाइल नंबर भी नहीं बता पाया।

इस पर उन लोगों ने उसे पास बैठा लिया और पुलिस को सूचना दी, जब पुलिस अथर्व को साथ ले जाने लगी तो फीमेल स्ट्रीट डॉग बीच में आ गई और गुर्राने लगी। वह अथर्व को हाथ लगाने नहीं दे रही थी। यह डॉग अथर्व की कॉलोनी की थी। वह उसे खाना खिलाता है और उसने उसका नाम लूसी रखा है।

लूसी अथर्व के घर से 100 मीटर दूर कैलाशपुरी के शिव मंदिर के आसपास के इलाके में रहती है। जब अथर्व मंदिर जाता है तब उसे खाना खिलाता है। वह अथर्व के घर तक नहीं आती, क्योंकि उस गली में जो दूसरे कुत्ते हैं, वह आने नहीं देते, लेकिन इसके बाद भी लूसी का अथर्व के लिए लगाव कम नहीं है।

आमतौर पर वह अथर्व का पीछा नहीं करती, लेकिन मंगलवार शाम जब अथर्व साइकिल से निकला तो लूसी ने उसका पीछा किया और वह 27 किमी तक लगातार उसके पीछे दौड़ती रही।

मोहल्ले वालों ने बच्चों को फेंक दिया - मनुष्य के साथ लूसी के अनुभव बहुत अच्छे नहीं हैं। बताया गया है कि घटना के 5-6 दिन पहले ही मंदिर के आसपास के लोगों ने उसे उठाकर कहीं दूर छोड़ दिया था, लेकिन वह वापस आ गई।

कुछ दिन पहले उसने जो बच्चे दिए थे, कुछ बच्चे मर गए और तीन बच्चों को मोहल्ले वालों ने कहीं दूर ले जाकर छोड़ दिया।

हमने लूसी का वीडियो बनाया और दूसरे दिन सुबह फिर उसे देखने पहुंचे तो वह वहां नहीं मिली। पूछने पर मंदिर के पुजारी के परिवार और आसपास वालों ने बताया कि वह यहां नहीं रहती उसे तो कुछ दिन पहले ही उठाकर कहीं दूर छोड़ आए थे। जब हमने बुधवार रात बनाया हुआ वीडियो दिखाना चाहा तो पहले तो यह कहते हुए दूर जाने लगे कि हमारा वीडियो मत बनाओ।

इससे पता चलता है कि लूसी को वहां से दूर छोड़कर आने वाले लोग कौन थे? हमने लूसी को आसपास की गलियों में ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली। हालांकि दोपहर को वह वहीं मिली और शाम को भी।

कहीं छोड़ दिए जाने का खतरा
अथर्व के पिता सुधीर पंडित से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि बुधवार रात को जब अथर्व लूसी को दूध पिलाने गया था उस समय भी आसपास के कुछ लोगों ने कहा था कि तुम इसे अपने घर ले जाओ नहीं तो हम इसे फिर कहीं दूर छोड़ आएंगे।

उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि देर रात वह लोग लूसी को कहीं छोड़ आए हों। लूसी का डॉग बाइट का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल मंदिर आने वालों को उससे यह समस्या है कि वह वहां गंदगी करती है। वहां के निवासी ने बताया कि जितनी समस्या उसे नहीं है, उससे ज्यादा उसके बच्चों से थी।

इसके चलते उसके बच्चों को दूर छोड़ दिया गया है। खास बात यह है कि हर साल लूसी जैसे स्ट्रीट डॉग कितने ही बच्चों को इस तरह से बचाते हैं, लेकिन फिर भी मीडिया, हेटर्स, सरकार और सुप्रीम कोर्ट उन्हें कटघरे में खड़ा करता है और उन्हें हमेशा के लिए जेल भेजने की तैयारी में लगा हुआ है। लूसी की मुश्किलें कम नहीं हैं, लेकिन शायद इस घटना के बाद लोगों का नजरिया उसके बारे में बदल जाए।

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