लोकायुक्त की कार्रवाई: सहायक गुणवत्ता नियंत्रक रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
खुलासा फर्स्ट, सिवनी। लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जहाँ मप्र वेयर हाउसिंग व लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के एक सहायक गुणवत्ता नियंत्रक को 15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गि
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, सिवनी।
लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जहाँ मप्र वेयर हाउसिंग व लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के एक सहायक गुणवत्ता नियंत्रक को 15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।
लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों पर काम करते हुए, जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया।
अधिकारी ने मांगी थी घूस
यह पूरा मामला धनौरा निवासी आवेदक सुरेन्द्र जैन से जुड़ा है। सुरेन्द्र जैन के पास नाईपिपरिया गाँव में एक जैन वेयर हाउस है, जिसका उपयोग धान उपार्जन और अन्य अनाज की खरीदी के लिए किया जाता है।
वेयर हाउस में धान उपार्जन के लिए आवश्यक पर्याप्त सुविधाएँ मौजूद नहीं थीं। नियमानुसार, सहायक गुणवत्ता नियंत्रक को इस असुविधा के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में रिपोर्ट भेजनी थी। लेकिन, यहाँ अधिकारी की नीयत बदल गई।
आरोपित सहायक गुणवत्ता नियंत्रक, मुकेश परमार (उम्र 41 वर्ष, पुत्र स्व. नानजी परमार), ने इस आधिकारिक लिखा-पढ़ी को न करने, यानी मामले को दबाने के बदले में आवेदक से 25,000 की मोटी रिश्वत की मांग की थी।
रिश्वत लेते ही रंगे हाथ गिरफ्तारी
भ्रष्ट अधिकारी मुकेश परमार के इस रवैये से परेशान होकर, आवेदक सुरेन्द्र जैन ने जबलपुर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (SP) अंजुलता पटले से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
एसपी पटले के मार्गदर्शन में, लोकायुक्त की टीम ने मामले की सत्यता की पुष्टि की और फिर एक गोपनीय प्लान तैयार किया। आरोपी और आवेदक के बीच हुई बातचीत के बाद रिश्वत की रकम ₹25,000 से कम होकर ₹15,000 तय हुई।
दिनांक 12 दिसंबर को, जैसे ही आरोपी मुकेश परमार ने कार्यालय मप्र वेयर हाउसिंग व लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन, धनौरा के अपने कक्ष में आवेदक सुरेन्द्र जैन से ₹15,000 की रिश्वत ली, उसी समय लोकायुक्त दल ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया।
आरोपी पर लगाई गई गंभीर धाराएं
लोकायुक्त की कार्रवाई दल में निरीक्षक शशि मर्सकोले, निरीक्षक राहुल गजभिए, और निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित अन्य स्टाफ शामिल था। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी मुकेश परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की कठोर धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
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