महा-धिक्कार पत्र, इंदौर के नरसंहार और सत्ता की निर्लज्जता के विरुद्ध एक नागरिक गर्जना: क्या यही राजनीति के संस्कार हैं; क्या जनता की जान की कीमत इतनी तुच्छ है
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. तेज प्रकाश व्यास (एंटी एजिंग साइंटिस्ट) पूर्व प्रचार्य महाराजा भोज स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार,
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर की पावन मिट्टी, जिसे हम मां अहिल्या की नगरी कहते हैं, आज आपके कुशासन के कारण निर्दोष नागरिकों के रक्त और सीवेज की गंदगी से अपवित्र हो चुकी है। 16 चिताएं जल चुकी हैं, जिनमें एक 5 माह का दूधमुंहा मासूम भी शामिल है, जिसकी हत्या का पाप सीधे तौर पर आपके विभाग के माथे पर है।
नैतिकता का मरण और अहंकार का तांडव
भारत की राजनीति में स्व. लालबहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया और टीटी कृष्णमाचारी जैसे महामानव हुए हैं, जिन्होंने तिनके जैसी दुर्घटना पर भी ‘नैतिकता’ के आधार पर पद को लात मार दी थी। और आप कैलाशजी, जिनकी जवाबदेही जब पूछी जाती है, तो आपके मुख से ‘घंटा’ जैसे सड़कछाप और अपमानजनक शब्द निकलते हैं। क्या यही आपकी राजनीति के संस्कार हैं? क्या जनता की जान की कीमत आपके लिए इतनी तुच्छ है?
भ्रष्टाचार की पाइप लाइन में घुलता मानव मल
नागरिक अमृत जल के नाम पर मानव विष्ठा और घातक बैक्टीरिया पीने को मजबूर हुए। यह प्रशासनिक चूक नहीं, ‘प्रायोजित सामूहिक हत्याकांड’ है। जनता के टैक्स से ‘स्वच्छता’ का ढोंग करने वालों, आपकी असलियत पाइपलाइन की उस गंदगी में तैर रही है जिसे पीकर गरीब मर रहे हैं।
स्पष्ट चेतावनी और मांगें: इस्तीफा दो या बदनामी चुनो: अगर रगों में 0.1% भी शर्म और इंसानियत बची हो, तो नैतिकता के नाम पर तुरंत त्यागपत्र दो। अन्यथा याद रखना, सत्ता के गलियारों से बाहर निकलते ही जनता तुमसे उस एक-एक बूंद जहर का हिसाब लेगी जो आपने उन्हें पिलाया है। आपकी पूरी जिंदगी अब ‘बदनामी के साये’ में गुजरेगी।
निजी कोष से हर्जाना
सरकारी पैसा जनता का है। आपने जो अकूत संपत्ति बटोरी है, उसमें से 10-10 लाख रुपए प्रत्येक मृतक के परिवार को अपनी जेब से दिजिये। यह मुआवजा नहीं, आपके पापों का आंशिक प्रायश्चित होगा।
दशानन से भी बदतर स्वरूप
आज आपका व्यवहार और अहंकार देखकर रावण भी लज्जित हो जाए। सत्ता के मद में चूर होकर आप खुद को भगवान समझने लगे हैं, लेकिन याद रखिए, जनता जनार्दन जब हिसाब मांगती है, तो बड़े-बड़े सिंहासन मिट्टी में मिल जाते हैं।
डॉ. व्यास का संदेश
इंदौर की जनता आपको माफ नहीं करेगी। उन 15 घरों के बुझते चिराग और बिलखती माताओं की ‘हाए’ आपका पीछा कभी नहीं छोड़ेगी। यह पत्र नहीं, आपके राजनीतिक पतन का घोषणापत्र है। या तो इस्तीफा दो, या इतिहास के सबसे संवेदनहीन नेताओं की सूची में अपना नाम दर्ज करवाओ।
सोशल मीडिया के लिए ‘आग उगलते’ पोस्ट कार्ड्स
कार्ड 1: 16 लाशें, 5 महीने का बच्चा... और मंत्री जी कहते हैं ‘घंटा’! शर्म करो या कुर्सी छोड़ो!
कार्ड 2: अमृत जल में मानव मल! इंदौर को ‘नंबर 1’ कहने वालों, तुमने जनता को जहर पिलाया है। #ResignKailash #ResignMayor
कार्ड 3: शास्त्रीजी ने नैतिकता के लिए पद त्यागा था, आप बदनामी के लिए पद से चिपके हो। 0.1% शर्म बची है क्या? इस्तीफा दो!
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