सहारा सिटी सहित कई कॉलोनियों में तेंदुए और डकैतों की दहशत कायम: बायपास क्षेत्र में जान-माल की सुरक्षा को गम्भीर खतरा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । बासपास को अतिविकसित क्षेत्र कहा जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि इस पर बसी कॉलोनियों को बिल्डरों-डेवलपरों ने बेहद असुरक्षित बनाया है, जिससे लोग दहशत में हैं। यहां कभी तेंदुआ घुस आत
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बासपास को अतिविकसित क्षेत्र कहा जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि इस पर बसी कॉलोनियों को बिल्डरों-डेवलपरों ने बेहद असुरक्षित बनाया है, जिससे लोग दहशत में हैं। यहां कभी तेंदुआ घुस आता है तो कभी डकैत बड़े आराम से डाका डालकर निकल जाते हैं।
इनके अलावा इन कॉलोनियों में आए दिन जहरीले जानवर निकलते हैं, जिससे रहवासियों की जान-माल का खतरा है। स्थिति ये है कि बिल्डर कंपनियां इस भीषण समस्या की ओर ध्यान नहीं देना चाहतीं, नतीजा ये कि लोग बायपास की कॉलोनियों से घर छोड़कर भाग रहे हैं।
दो दिन पूर्व सहारा सिटी में तेंदुआ देखा गया, लेकिन वो अब तक नहीं पकड़ा जा सका। स्थिति ये है कि रहवासियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। डर के मारे वे कालोनी से बाहर नहीं निकल पा रहे। रहवासियों का कहना है कि शाम 5 बजे के बाद वे टहलने के लिए भी घर से बाहर नहीं निकल रहे।
और तो और, वे घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद कर घर में कैदी जैसा जीवन जी रहे हैं। वे अच्छे और सुरक्षित आवास की चाह में बायपास की कॉलोनी में रहने आए थे, लेकिन यहां तो और भी ज्यादा असुरक्षा है। उनका गुस्सा कालोनाइजरों-बिल्डरों-डेवलपरों पर है।
डाका पड़ने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं
सवाल सहारा सिटी होम्स का ही नहीं है, अन्य कॉलोनियों में भी असुरक्षा की स्थिति है। बायपास की इन कालोनियों में डाका पड़ने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। सवाल ये है कि जब इन कालोनियों में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है तो फिर डकैत या चोर-उठाईगिरे कैसे घुस आते हैं?
जाहिर है कि बिल्डरों-डेवलपरों ने रहवासियों को सुविधाएं बोलने के बावजूद नहीं दी है। रहवासियों ने बताया कि तमाम कालोनियों में सांप, बिच्छू समेत तमाम जहरीले जानवरों का निकलना आम बात है। कब किस सडक़ पर कोई जहरीला जानवर मिल जाए, कोई भरोसा नहीं।
डर के मारे घर से बाहर कालोनी के गेट तक बेहद संभलकर आना-जाना पड़ रहा है। खासकर, बच्चों-महिलाओं और बुजुर्गों को तो जान का खतरा बना ही हुआ है। कई कालोनियों में तो पक्का निर्माण भी नहीं है, खुला मैदान है जो और भी खतरनाक है क्योंकि वहां जहरीले जानवरों ने अपने बिल बना रखे हैं।
जबकि बिल्डरों ने तमाम सुविधाओं का वादा किया था। सहारा सिटी होम्स में पहली बार तेंदुआ दिखा हो, ऐसा नहीं है। इससे पूर्व इसी कालोनी समेत अन्य कालोनियों में तेंदुए-सियार आदि दिखे हैं। इस लिहाज से इन कालोनियों में जान-माल का खतरा बना हुआ है। बिल्डरों-डेवलपरों की नाकामी और लापरवाही की सजा रहवासियों को भुगतना पड़ रही है।
तेंदुए के पगमार्क मिले,आज पिंजरा लगाएंगे
डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि सहारा सिटी होम्स में तेंदुए और शावकों के पगमार्क मिले हैं, जिससे पता चलता है कि उनका मूवमेंट कॉलोनी में है। दो दिन से हमारी टीम मुआयना कर रही है। आज पिंजरा लगाएंगे और तेंदुए जहां भी छिपा है, उसे बाहर निकालने की कोशिश करेंगे।
भ्रामक विज्ञापन देकर लुभाते हैं
बायपास की कालोनियों में असुरक्षा और असुविधाएं हैं लेकिन बिल्डर कंपनियां भ्रामक विज्ञापन देकर लुभाती हैं। विज्ञापनों में दावे तो कई किए जाते हैं लेकिन जमीन पर एक भी दावा और वादा पूरा नहीं होता। रहवासियों के प्राण संकट में ही रहते हैं। बायपास की कालोनियों में कभी भी कोई बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।
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