मिलीभगत से बिकी महादेव मंदिर को दान में मिली भूमि: अधिकारियों से साठगांठ कर पुजारी परिवार और भू-माफियाओं ने की सौदेबाजी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । अक्सर देखा जाता है कुछ अधिकारी छोटे-छोटे काम कर सस्ती लोकप्रियता बटोरते हैं, लेकिन इसी आड़ में बड़े-बड़े घोटालों को अनदेखा कर दिया जाता है। ऐसे एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है,
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अक्सर देखा जाता है कुछ अधिकारी छोटे-छोटे काम कर सस्ती लोकप्रियता बटोरते हैं, लेकिन इसी आड़ में बड़े-बड़े घोटालों को अनदेखा कर दिया जाता है। ऐसे एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें श्री महादेव मंदिर के नाम दान दी गई कई एकड़ जमीन को कथित तौर पर पुजारी परिवार और भू-माफियाओं की मिलीभगत से बेच दिया गया।
केसरबाग रोड स्थित महादेव मंदिर को दान की गई भूमि को भूमाफियाओं को बेचने का पूरा खुलासा हो गया है। मामला अधिकारियों के साथ गहरी साठगांठ का है। फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ है, जिनमें मंदिर के नाम दर्ज जमीन को बेचने संबंधी एक शपथ-पत्र शामिल है।
15 जुलाई 1987 के शपथ-पत्र के अनुसार चंद्रहास पिता गुरु सच्चिदानंद अवस्थी (90) निवासी केसरबाग रोड, रामपुरा कोठी के सामने द्वारा इन सर्वे नंबरों की भूमि 1459/1 (3.70 हे.), 1459/2 (4.15 हे.), 1459/3 (1.29 हे.), 1459/4 (0.10 हे.), 1462 (0.42 हे.), 1463/1 (1.14 हे.), 1463/2 (0.12 हे.), 1460 (3.08 हे.) एवं 1451 (1.56 हे.) को आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था को बेचने का अनुबंध 3 जून 1980 को किया गया। भूमि का कब्जा उसी समय संस्था को सौंपने का उल्लेख है।
दस्तावेजों के अनुसार, उक्त भूमि का पंजीयन क्रमांक डीआरआईडीआर 68 दिनांक 20 फरवरी 1965 है। भूमि विक्रय के लिए धारा 20 में आवेदन किया गया था तथा यह भी उल्लेख है आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित के अतिरिक्त किसी अन्य को भूमि बेचने का कोई अनुबंध नहीं किया गया था।
^ पुराने दस्तावेज भी सवालों के घेरे में: मामले में होलकर स्टेट का 21 जनवरी 1935 का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज “पर्चा बाबत तहसीलदार इनाम जमीन’ भी सामने आया है। इसमें इनामदार का नाम चन्द्रहास्य सच्चिदानंद ब्राह्मण, निवासी इंदौर दर्ज है। इनामी खेतों के खसरा नंबर और रकबा 1459 (9.24), 1462 (0.42), 1463 (1.26), 1464 (1.18), 1467 (0.50), 1466 (9.77), 1468 (0.33) को देवस्थान कस्बा इंदौर में रामपुरा कोठी के पास स्थित श्री महादेव मंदिर के पूजा प्रयोजन हेतु ताहयात दर्ज बताया गया है।
^ बंटांकन और नामांतरण कैसे हो गया?: जब ये जमीनें श्री महादेव मंदिर के नाम पर दर्ज थीं, तो फिर उक्त खसरों का बंटांकन और नामांतरण कैसे हुआ? निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम जमीन किस आधार पर चढ़ाई गई? जिस समय प्रक्रिया हुई, उस दौरान पदस्थ अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
^ सौदे के समय जीवित थे चंद्रहास्य?: चन्द्रहास्य सच्चिदानंद का जन्म और मृत्यु किस सदी में हुई, इस विषय पर निश्चित जानकारी चाहिए। महादेव मंदिर के लगभग 650 वर्ष पुराने होने के दावे से यह प्रश्न उत्पन्न हो रहा है क्या चन्द्रहास्य सच्चिदानंद का जीवनकाल इसी समय का है। ऐसे कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों में चन्द्रहास्य का नाम दर्ज है, जिसके आधार पर 1987 में उनके जीवित होने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसी आधार पर उस शपथपत्र को फर्जी बताया जा रहा है।
^ प्रशासन का ढुलमुल रवैया: महादेव मंदिर की दान की जमीन पर भू-माफियाओं का नामांतरण होने और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोपों को लेकर जब कलेक्टर शिवम वर्मा से सवाल किया तो उन्होंने कहा जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। एडीएम रौशन राय ने कहा पहले ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वही एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने कहा अभी तो एसआईआर का काम चल रहा है इसके खत्म होने के बाद ही कुछ कार्रवाई कर पाएंगे। इन अधिकारियों के मतों में भिन्नता ही बता रही है आरोप झूठे नहीं है।
^ रावजी बाजार थाने में भी दर्ज हुआ था केस : सतबीर सिंह के खिलाफ रावजी बाजार थाने में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने को केस दर्ज किया गया था। यह प्रकरण आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था के प्रशासक एवं वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक संतोष जोशी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। सतबीर सिंह आकाश हाउसिंग सोसायटी का अध्यक्ष रह चुका था और लंबे समय से प्रशासक को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रहा था। छापामार कार्रवाई के दौरान उसके निवास से आकाश हाउसिंग सोसायटी सहित अन्य संस्थाओं के दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।
पूर्व में हुई कार्रवाई
ऑपरेशन क्लीन’ (2019): बॉबी छाबड़ा, सतबीर सिंह और संदीप रमानी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था।
भंवरकुआं पुलिस ने भूमाफिया बॉबी छाबड़ा, उसके चचेरे भाई सतबीर सिंह और प्रबंधक संदीप रमानी के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया था।
यह कार्रवाई जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग और पुलिस की संयुक्त छापामार कार्रवाई के बाद हुई थी।
खातीवाला टैंक स्थित बॉबी के प्रबंधक रमानी के कार्यालय से करीब 20 सहकारी हाउसिंग संस्थाओं का रिकॉर्ड बरामद हुआ था।
विभाग का मानना था इन संस्थाओं के दस्तावेजों में हेरफेर कर मूल सदस्यों के स्थान पर अपात्र सदस्यों को भूखंड बेचने की नीयत से यह रिकॉर्ड अवैध रूप से अपने पास रखा था।
सतबीर सिंह के पागनीसपागा स्थित निवास से भी आकाश सहित अन्य हाउसिंग संस्थाओं के रिकॉर्ड जब्त किए थे। तत्कालीन सहकारिता उपायुक्त राजेश क्षत्री के निर्देश पर सब ऑडिटर आईसी वर्मा ने आरोपियों पर केस दर्ज कराया।
जिन 20 संस्थाओं का रिकॉर्ड मिला है, उनमें बॉबी छाबड़ा या संदीप रमानी पदाधिकारी या प्रबंधक नहीं हैं, बावजूद दस्तावेज रमानी के कार्यालय में मिले।
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