पापों से मुक्ति और सौभाग्य का पर्व है यह: जानिये कब मनाई जाएगी यह एकादशी; क्या नहीं खाया जाता इस दिन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हिंदू धर्म में जया एकादशी का विशेष महत्व है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। जया एकादशी अथवा भौमि एकादशी 29 जनवरी( गुरुवार) को मनाई जाएगी।
मिलता है मोक्ष
धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करते हैं, उन्हें पिशाच योनि जैसी नीच योनियों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की विशेष आराधना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
व्रत से जुड़ी ये है कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र की सभा में माल्यवान (गंधर्व) और पुष्पवती (अप्सरा) का गायन-वादन चल रहा था। कामदेव के प्रभाव से उनका ध्यान भटक गया। इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने उन्हें स्वर्ग से निष्कासित कर दिया और पिशाच योनि में जाने का श्राप दे दिया।
हिमालय की ठंडी कंदराओं में कष्ट भोगते हुए, माघ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने अनजाने में ही निराहार रहकर केवल फलाहार किया। रात भर जागरण किया। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति दिलाकर वापस स्वर्ग में स्थान दिलाया।
व्रत के दिन करें ऐसा
पंडितों के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
इसके साथ ही भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं।
इस दिन तुलसी की सेवा विशेष फलदायी होती है। यह भी कि इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है।
व्रत में रात भर जागकर भजन-कीर्तन करने का विधान है, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।
मानसिक अनुशासन का पर्व भी
जया एकादशी का पर्व मानसिक अनुशासन और इंद्रिय संयम की सीख भी देती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के अनजाने में किए गए पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
प्रारंभ और अंत
जया एकादशी का प्रारंभ 28 जनवरी 2026 को शाम 04:35 बजे से होगा और समापन 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01:55 बजे तक है। पारण का समय 30 जनवरी 2026 को सुबह 07:10 बजे से 09:20 बजे के बीच।
जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को ही
उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को ही रखा जाएगा। इस दिन शुद्धता और भोजन को लेकर खास ध्यान रखें।
चावल नहीं खाए जाते इस दिन
यह भी जान लीजिये कि इस दिन चावल नहीं खाए जाते हैं। अगले दिन चावल का दान किया जाता है। दान करके और भगवान विष्णु की पूजा करके ही व्रत का पारण करना चाहिए।
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