खबर
टॉप न्यूज

भली करी जी ‘श्रीमान’ देर आए, दुरुस्त आए: अब खजराना से ही अंडरग्राउंड होगी हमारी मेट्रो; एमजी रोड का बड़ा नुकसान टला

ड्राइंग-डिजाइन बदलने पर खड़ा किया जा रहा दिल्ली का ‘हौआ’ दूर कर गए मुख्यमंत्री मेट्रो के नाम पर शहर को ‘सत्यानाश’ से बचाने के लिए मोहन सरकार खर्च करेगी 800 करोड़ मेट्रो के मामले में ‘गुटबाजी’ से ऊपर उठी

Khulasa First

संवाददाता

15 दिसंबर 2025, 8:03 पूर्वाह्न
2 views
शेयर करें:
भली करी जी ‘श्रीमान’ देर आए, दुरुस्त आए

ड्राइंग-डिजाइन बदलने पर खड़ा किया जा रहा दिल्ली का ‘हौआ’ दूर कर गए मुख्यमंत्री

मेट्रो के नाम पर शहर को ‘सत्यानाश’ से बचाने के लिए मोहन सरकार खर्च करेगी 800 करोड़

मेट्रो के मामले में ‘गुटबाजी’ से ऊपर उठी इंदौर भाजपा, शहरहित में सब नेता हुए एकजुट

खुलासा फर्स्ट ने मेट्रो को लेकर इंदौर की परेशानियों पर बेबाकी से जो भी लिखा, सब पर लगी मुहर

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर
याद है न, खुलासा फर्स्ट का मेट्रो को लेकर सबसे पहले दिया गया शीर्षक- ‘अंडरलाइन कर लें, मेट्रो यानी अंडरग्राउंड?’ इस शीर्षक पर सरकार के मुखिया डॉ. मोहन यादव मुहर लगा गए। अब इंदौर में मेट्रो अंडरग्राउंड ही दौड़ेगी। मुख्यमंत्री ने खुलासा फर्स्ट के एक और शीर्षक ‘दिल्ली न हुई ‘हौआ’ हो गई’ पर भी अपनी दो-टूक से सारे भ्रम दूर कर दिए और अपने तेवर से स्पष्ट कर दिया कि राजधानी क्या किसी गैर की है, जो इंदौर की नहीं सुनेगी।

मुख्यमंत्री की सदारत में हुई बैठक में इंदौर के जनप्रतिनिधियों की एकजुटता ने खुलासा फर्स्ट के एक और शीर्षक ‘इंदौर की मेट्रो है या भाजपा की गुटबाजी’ के पीछे के भाव को समझा और उसे सामूहिक स्वर से दूर कर दिया। मल्हारगंज में मेट्रो स्टेशन को लेकर अड़चन भी साफ सामने आ गई।

खुलासा फर्स्ट ने भी फर्स्ट ही बता दिया था कि मल्हारगंज में स्टेशन नहीं बनेगा। यानी आपके इस पक्का इंदौरी अखबार ने मेट्रो को लेकर इंदौर की परेशानियों पर जो भी बेबाकी से लिखा, सब पर रविवार को सरकार के मुखिया की मौजूदगी में एक तरह से मुहर लग गई। यूं ही नहीं हम ‘खालिस इंदौरी’ कहलाने का रश्क करते हैं!

भ ली करीजी ‘श्रीमान’, जो आपने अहिल्या नगरी की असल समस्या को मन से समझा व बड़े मन से उसका समाधान भी किया। एक ‘पालक’ के नाते ये इंदौर आपसे ये ही अपेक्षा तो कर रहा था कि आप ‘मुखिया’ होकर ‘मुख’ के समान व्यवहार करें। रविवार को आपने ये रत्तीभर नहीं देखा कि मेरे समाधान का श्रेय किसके हिस्से में जाएगा।

न इस बात की चिंता की कि सबसे ज्वलंत मुद्दे के निदान पर कितना खर्च सरकार के हिस्से में आएगा। एक झटके में आपने वे संशय दूर कर दिए, जिसे लेकर दो बरस से शहर में बातें तो खूब हो रही थीं, पर समस्या के हल की बजाय बातों का बतंगड़ ही बन रहा था। छुट्टी वाले दिन आपने ‘श्रीमान’ शहर के विकास की एक बहुप्रतीक्षित बैठक कर ये साफ कर दिया कि ‘सरकार’ के यहां ‘देर है, अंधेर नहीं’। शहर ने भी साफ महसूस किया कि पूरा मसला ‘देर आए, दुरुस्त आए’ की तर्ज पर इंदौरहित में रहा।

जी हां, बात है हमारे इंदौर की मेट्रो की। इसे लेकर लंबे समय से गहरा कुहांसा छाया हुआ था कि आखिरकार इंदौर मेट्रो का भविष्य होगा क्या? कमर्शियल रन के बाद तो पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट्स की एक तरह से खिल्ली ही उड़ रही थी। शहर के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की बेहोशी और मामले के जानकारों की अनदेखी इस खिल्ली को और बढ़ा रहे थे।

राजनीतिक गुटबाजी भी इस प्रोजेक्ट में घर करती जा रही थी और पूरा प्रोजेक्ट ही अधर में जाता नजर आ रहा था, क्योंकि ये साफ हो ही नहीं पा रहा था कि आखिरकार मध्य शहर में मेट्रो गुजरेगी कैसे? क्या ये भूमिगत चलेगी या हवा में अपना रास्ता तय करेगी। बड़ा गणपति से अंडरग्राउंड होगी या राजवाड़ा-कोठारी मार्केट तोड़फोड़ का शिकार होंगे?

इस असमंजस के चक्कर में शहर के अलग-अलग हिस्सों में खड़े हुए मेट्रो के भारी-भरकम बने हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर एक ‘ताबूत’ के समान नजर आ रहे थे कि कहीं सब कुछ पर पानी न फिर जाए। लेकिन देर से ही सही, इस मुद्दे पर शहर का राजनीतिक नेतृत्व मतैक्य भुलाकर एकजुट हुआ।

इसी एकजुटता का नतीजा रहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर के सुर में अपना मजबूत स्वर शामिल किया और मेट्रो प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी व अंतिम बाधा दूर कर दी। अब मेट्रो खजराना से ही भूमिगत हो जाएगी। ये उस एमजी रोड से भी जमीन के अंदर नहीं होगी, जिसे लेकर जबरदस्त हल्ला व नाराजगी पहले दिन से बनी थी। मेट्रो के नाम पर अब शहर के मध्य हिस्से यानी ‘हैरिटेज इंदौर’ की दुर्गति नहीं होगी। व्यापार-व्यवसाय, मकान-दुकान व यातायात सुरक्षित रहेगा।

सीएम ने एक झटके में दूर किया ‘दिल्ली का हौआ’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उस हौए को भी दूर कर दिया, जो शहर को बार-बार ये बता व जंचा रहा था कि मेट्रो को खजराना से ही अंडरग्राउंड करना लगभग असंभव-सा है। अलबत्ता ऐसा होगा नहीं और हुआ भी तो दिल्ली से इजाजत लेना होगी। सवाल ये भी उठाए गए थे कि मेट्रो की डिजाइन में परिवर्तन का भारी-भरकम खर्च आएगा।

ये खर्च कौन वहन करेगा? मुख्यमंत्री ने एक ही झटके में ये सब संशय व भ्रम दूर कर दिए। उन्होंने पहले तो दो-टूक ये कहा कि मेट्रो खजराना से ही अंडरग्राउंड होगी और फिर लगे हाथ ये भी कहा कि इस काम पर होने या बढ़ने वाले खर्च को मध्य प्रदेश सरकार ही वहन करेगी। फर भले ही वो 800 करोड़ हो या हजार करोड़।

मुख्यमंत्री की इस घोषणा ने इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी बाधा को एक झटके में दूर कर दिया और उस बात को भी सिरे से खारिज कर दिया कि एक बार तय हुई ड्राइंग-डिजाइन में बदलाव नहीं हो सकता।

आखिरकार एलिवेटेड कॉरिडोर ही विकल्प, फ्लाईओवर नहीं: सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रभारी मंत्री के रूप में सीएम की ये पहली बैठक थी। इसमें शहर से जुड़े 20 बिंदुओं पर बात हुई। इंदौर का नया दौर थीम पर रविवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में यातायात सुधार, सिटी प्लानिंग, रेडी इंदौर स्लम फ्री सिटी सहित सीसीटीवी कैमरे से शहर को जोड़ते हुए सुरक्षा के मसले पर बात की।

बीआरटीएस हटाने के बाद एबी रोड के अलग-अलग चौराहों पर फ्लायओवर बनाने की बजाय पुराने एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पर ही काम होगा। इसके लिए फिर से सर्वे होगा। एक और अहम फैसला मेट्रोपोलिटन रीजन को लेकर हुआ। अब रतलाम तक का हिस्सा जुड़ा है, जिससे पूरा मालवा कवर हो गया है।

टैग:

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!