है कोई माई का लाल: जो भारत को बेच दे; राहुल का प्रधानमंत्री पर देश को बेचने का गंभीर आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

बोलने से रोकने के आरोप के बाद संसद में जमकर बोले नेता प्रतिपक्ष
अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल ने संसद में सरकार को जमकर घेरा
पूर्व सैन्य प्रमुख की किताब पर खूब हल्ला मचाया, बोलने की बारी आई तो एक शब्द नहीं बोले राहुल
राहुल के आरोप को सरकार ने तथ्यहीन करार दिया, गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस की तैयारी
ओम बिड़ला के बाद आसंदी पर बैठे जगदंबिका पाल से भी बार-बार बहस करते रहे राहुल
राहुल के ‘जोशीले' भाषण पर कांग्रेस कुल गद्गद्, पार्टी ने विशेषाधिकार नोटिस की चुनौती भी की स्वीकार
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
क्या आज के समय में भारत जैसा देश किसी गैर मुल्क के हाथों बेचा जा सकता है? क्या हमारे मुल्क में कोई नेता इतना ताकतवर व दुस्साहसी हो गया कि वह हिंदुस्तान का ही सौदा कर दे? है कोई ऐसा माई का लाल, जो दुनिया की तीसरी बड़ी हस्ती इंडिया को बेचने की हिमाकत कर सके?
आज के तिजारती दौर में क्या कोई भी मुल्क, चाहे वह कितने भी बुरे दौर में क्यों न हो? किसी अन्य देश के हाथों बिक सकता है? जब पाकिस्तान जैसे ‘भिखारी मुल्क' के ऐसे हालात नहीं, तो भारत जैसे राष्ट्र की दशा इतनी दयनीय हो गई कि हमारे नेता मुल्क का सौदा करने पर आमादा हो जाएं?
सवालों की ये फेहरिस्त नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पर देश बेचने के आरोप के बाद देश के हर हिस्से से सामने आ रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने जवाब दिया है कि कोई माई का लाल देश को बेच नहीं सकता। खुलासा फर्स्ट का भी ये ही सवाल है- है कोई माई का लाल, जो मेरे देश को बेच दे?
ये तमाम सवाल संसद में नेता प्रतिपक्ष और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी के देश बेचने के वक्तव्य से उभरकर सामने आए हैं। गांधी का यह वक्तव्य देश की सबसे बड़ी पंचायत, यानी लोकसभा में सामने आया।
बजट भाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने ये आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बेच दिया है। अमेरिका को खरीददार देश बताते हुए राहुल ने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हितों के साथ समझौता कर अमेरिका के हाथों देश के भविष्य को दांव पर लगा दिया। राहुल ने अमेरिका से हुई ट्रेड डील को डील नहीं, होलसेल सरेंडर बताया और स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी दबाव में भारत के डेढ़ अरब देशवासियों को दांव पर लगा दिया।
राहुल तो आदत के मुताबिक बोलकर सुर्खियां बटोर ले गए। अब सरकार तिलमिला गई है। उसने राहुल गांधी को गैर गंभीर नेता प्रतिपक्ष करार दिया और सदन में तथ्यहीन बयान देने का आरोप लगाया। सरकार ने बिना तथ्य देश को बेचने का आरोप लगाया, बल्कि अब वह राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गई है। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस भी डर नहीं रही और वह अपने नेता के लिए सरकार से एक बार फिर सदन में दो-दो हाथ करने को ये कहकर तैयार हो गई है कि प्रस्ताव आएगा तो जवाब भी दिया जाएगा। बशर्ते सत्ता पक्ष जवाब सुनने को तैयार हो।
राहुल गांधी के इस गंभीर बयान ने सरकार व कांग्रेस के बीच चल रही तकरार को और बढ़ा दिया है। अब सरकार भी विशेषाधिकार प्रस्ताव के जरिये पलटवार को तैयार हो गई है। सरकार का कहना है कि राहुल का बयान बेबुनियाद व लोकसभा और देश को गुमराह करने वाला है।
राहुल कांग्रेस को लगातार मिल रही चुनावी हार से नफरत से भर गए हैं और अब उनकी ये नफरत देश के खिलाफ तक आ गई है। वित्त मंत्री ने राहुल गांधी के आरोप पर कहा कि देश के हित से समझौता हमेशा कांग्रेस ने किया। मोदी राज में मुल्क के तरक्की करने के दावे के साथ वित्त मंत्री ने 90 के दशक के डंकल प्रस्ताव से लेकर डब्लूटीओ तक के समझौते गिनाना शुरू कर दिए हैं।
राहुल जमकर बोले, पर गंभीरता का फिर दिखा अभाव
सदन में ‘सरकार बोलने नहीं दे रही’ के सप्ताहभर मचे शोर के बाद कल राहुल मुखर हुए। सदन में उनकी मुखरता पर सबकी नजरें थीं। देश ही नहीं, दुनिया के भी कई नामचीन मुल्क टकटकी लगाए हुए थे कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश का नेता प्रतिपक्ष ऐसा क्या बोलना चाह रहा था, जो उसे सरकार सदन में बोलने नहीं दे रही थी।
इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव तक आ गया था और बिड़ला ने भी स्वयं को आसंदी से दूर कर लिया था। लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर जगदंबिका पाल बैठे थे, लेकिन राहुल कल भी आदत के मुताबिक आसंदी से पूरे समय उलझते रहे।
आसंदी बार-बार उन्हें टोकती भी रही और सदन में बोलने के नियम-कायदे भी गिनाती रही। यहां तक कि अध्यक्ष को उन्हें समझाना पड़ा कि राहुलजी, आप सदस्यों की तरफ, सत्ता पक्ष की तरफ देखकर नहीं बोलें, आसंदी को संबोधित करें। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बार-बार आसंदी के समक्ष आपत्ति जताई कि राहुल जो भी बोल रहे हैं, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है। राहुल गांधी के वक्तव्य के कई शब्द रिकॉर्ड से बाहर भी किए गए। उन्होंने अडानी-अंबानी का नाम लिया, जबकि सदन के वे सदस्य नहीं हैं।
पूर्व सैन्य प्रमुख की पुस्तक पर राहुल की हैरतभरी चुप्पी
राहुल गांधी उस पुस्तक के विषय में कल सदन में एक शब्द नहीं बोले, जिस पर बोलने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा तक सदन में मुकम्मल नहीं हो पाई थी। सब तरफ बस एक ही चर्चा थी कि राहुल आज नरवणे की पुस्तक के जरिये जोरदार हमला करेंगे, लेकिन राहुल ने इस विषय को छुआ तक नहीं।
पूर्व सैन्य प्रमुख नरवणे की पुस्तक के जरिये राहुल प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री को चीन के समक्ष कमजोर साबित करने पर आमादा थे, लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा पुस्तक के मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद राहुल गांधी की इस पुस्तक व उसके तथ्य पर मौन धारण करना सबको हैरत में डाल गया।
अब मोदी से सरकार नरवणे की पुस्तक के लीक होने की जांच में जुट गई है और ये जांच भारत से निकलकर अमेरिका, कनाडा, जर्मनी व ऑस्ट्रेलिया तक जा पहुंचा है। भारत से पहले इन मुल्कों में ये पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध कैसे हुई, इसकी जांच शुरू हुई है।
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